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Ram Mandir: राम मंदिर के गर्भगृह में बालस्वरूप में बिराजेंगे रामलला, जानिए पुरानी मूर्ति का क्या होगा

Ram Mandir: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में रामलला को विराजमान कराया जाएगा। 22 जनवरी को राम मंदिर में रामलला की नई प्रतिमा स्थापित की जाएगी। ऐसा कहा जा रहा है कि राम मंदिर में विराजमान होने वाली भगवान राम की नई मूर्ति दुनिया की सबसे अनोखी मूर्ति होगी। राम मंदिर के मूल गर्भगृह में प्राण प्रतिष्ठित होने वाला रामलला का विग्रह श्याम वर्ण का होगा

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 30, 2023 पर 11:02 AM
Ram Mandir: राम मंदिर के गर्भगृह में बालस्वरूप में बिराजेंगे रामलला, जानिए पुरानी मूर्ति का क्या होगा
Ram Mandir: रामलला की तीन मूर्तियां बनाई गईं हैं। इन तीनों मूर्तियों की ऊंचाई 51-51 इंच हैं।

Ram Mandir: राम मंदिर के उद्घाटन की तारीख भी नजदीक आ रहा है। 22 जनवरी 2024 को पूरी दुनिया इस ऐतिहासिक पल की गवाह बनेगी। सालों बाद राम लला अपने महल में विराजेंगे। अयोध्या बाबरी मंजिद मामले के बाद एक चबूतरे में श्रीराम के बाल स्वरूप की पूजा की जा रही थी। अब अयोध्या के राम मंदिर के मूल गर्भगृह में प्राण प्रतिष्ठित होने वाला रामलला का विग्रह श्याम वर्ण का होगा। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्यों ने मूर्ति चयन के लिए गुप्त मतदान हो चुका है। इसके नतीजे भी 10 जनवरी तक सार्वजनिक कर दिए जाएंगे।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, रामलला के जिस विग्रह को ट्रस्ट के अधिकाधिक सदस्यों ने पसंद किया है। उसे अरुण योगीराज ने कर्नाटक की श्याम शिला से बनाया है।

रामलला की तीन मूर्तियां बनाई गईं

रामलला की तीन मूर्तियां बनाई गईं हैं। इन मूर्तियों को अरुण योगीराज, गणेश भट्ट और सत्यनारायण पांडेय ने बनाई हैं। तीनों मूर्तियों की ऊंचाई 51-51 इंच हैं। इन्हें आठ फीट ऊंचे आधार पर स्थापित किया जाएगा। पहले यह तय किया गया था कि बनने वाली तीनों मूर्तियों में से एक ही गर्भगृह में स्थापित की जाएगी। बाद में फैसला लिया गया कि तीनों मूर्तियों को मंदिर के अलग-अलग जगह रखी जाएंगी। कौन सी मूर्ति कहां स्थापित की जाएगी। इस बारे में मतदान भी हो चुका है। कहा जा रहा है कि अरुण योगीराज की बनाई हुई मूर्ति को मूल गर्भगृह में जगह दी जा सकती है। अरुण कर्नाटक के मैसूर निवासी प्रसिद्ध मूर्तिकार योगीराज शिल्पी के बेटे हैं। उनके पिता को वाडियार घराने के महलों को खूबसूरती देने के भी लिए जाना जाता था।

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