Ram Mandir Inauguration: कौन हैं चंपत राय? एक केमिस्ट्री टीचर, जिसने अयोध्या राम मंदिर आंदोलन के लिए खपा दिया अपना पूरा जीवन
Ram Mandir Inauguration: 1977 में इमरजेंसी के दौरान राम जन्मभूमि आंदोलन के मामले में चंपत राय (Champat Rai) को जेल में डाल दिया गया था। जेल से रिहा होने के तुरंत बाद, राय ने 1980 में विश्व हिंदू परिषद (VHP) में शामिल होने का फैसला किया और समाज के लिए काम करना जारी रखा। वह धामपुर के आश्रम डिग्री कॉलेज में केमिस्ट्री के प्रोफेसर रहे
Ram Mandir Inauguration: कौन हैं चंपत राय? एक केमिस्ट्री टीचर, जिसने अयोध्या राम मंदिर आंदोलन के लिए खपा दिया अपना पूरा जीवन
Ram Mandir Inauguration: आयनिक और कोवेलेंट बॉन्ड या मैटर की स्टेट्स पढ़ाते समय, चंपत राय (Champat Rai) ने कभी नहीं सोचा होगा कि वह किसी ऐसे चेन रिएक्शन में एक प्रमुख एलिमेंट बन जाएंगे, जो लाखों लोगों के सदियों पुराने अयोध्या (Ayodhya) में राम मंदिर (Ram Mandir) के सपने को साकार करेगा। विश्व हिंदू परिषद (VHP) के उपाध्यक्ष, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव और राम मंदिर आंदोलन (Ram Mandir Movement) के योद्धा बनने से पहले, राय एक केमिस्ट्री टीचर थे।
लेकिन देश की सर्वोच्च अदालत से आंदोलन के पक्ष में न्यायिक फैसले के बाद से, वह बेहद प्रतीक्षित मंदिर के निर्माण और विकास की देखरेख का अहम भूमिका निभा रहे हैं।
'सपना सच हो गया'
चंपत राय ने कहा, “ये किसी के सपने को सच होते देखने जैसा है। ये एक दुर्लभ घटना है, क्योंकि लगभग 500 साल बाद रामलला अयोध्या में विराजमान होने जा रहे हैं। 22 जनवरी, 2024 सही मायनों में दिवाली होगी, क्योंकि उसी दिन मंदिर में भगवान राम की मूर्ति का प्राण प्रतिष्ठा समारोह आयोजित किया जाना है।"
1946 में उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले की नगीना तहसील के मोहल्ला सरायमीर निवासी रामेश्वर प्रसाद बंसल के परिवार में जन्मे राय बहुत कम उम्र में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ गए थे। अपनी उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद वह धामपुर के आश्रम डिग्री कॉलेज में केमिस्ट्री के प्रोफेसर बन गए।
'इमरजेंसी के दौरान 18 महीने की हुई जेल'
1977 में इमरजेंसी के दौरान राम जन्मभूमि आंदोलन के मामले में राय को जेल में डाल दिया गया था। राम जन्मभूमि ट्रस्ट के एक सदस्य ने कहा, "18 महीनों तक वह जेल में रहे, उन्हें यातनाएं दी गईं और अलग-अलग जिलों में ट्रांसफर कर दिया गया।"
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि राय ने जेल में जो 18 महीने बिताए, उन्होंने उन्हें पूरी तरह से बदल दिया। वह और भी मजबूत दृढ़ संकल्प के साथ एक अलग व्यक्ति के रूप में सामने आए। उन 18 महीनों ने उन्हें तोड़ने के बजाय और सख्त बना दिया। रिहा होने के तुरंत बाद, वह वापस लौट आए और अपनी यात्रा पर फिर से निकल पड़े, जिसका मकसद अयोध्या में राम मंदिर की स्थापना सुनिश्चित करना था।"
जेल से रिहा होने के तुरंत बाद, राय ने 1980 में विश्व हिंदू परिषद (VHP) में शामिल होने का फैसला किया और समाज के लिए काम करना जारी रखा।
जो लोग राय को करीब से जानते हैं, उनका कहना है कि वह हमेशा "समर्पित", "मेहनती" और "एक मूक कार्यकर्ता" रहे हैं। उनका कहना है कि ये गुण राम मंदिर आंदोलन में उनके योगदान में साफ दिखाई देते हैं। मंदिर अभियान के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले राय ने 35 सालों तक सुर्खियों से दूर रहकर इसे साकार करने की दिशा में काम करना जारी रखा है।
अयोध्या के वरिष्ठ पत्रकार राम नरेश तिवारी बताते हैं, “उस समय, अशोक सिंघल श्री राम जन्मभूमि आंदोलन का चेहरा थे। लेकिन पर्दे के पीछे रहकर, राय ने मंदिर अभियान को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।”
तिवारी ने कहा कि 20 सालों से ज्यादा समय तक VHP के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष रहे, अशोक सिंघल की मृत्यु के बाद, राय ने एक "आज्ञाकारी शिष्य" की तरह मंदिर अभियान की जिम्मेदारी संभाली।
जब प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अगस्त, 2020 को अयोध्या में भव्य मंदिर के निर्माण का शुभारंभ किया, तो यह चंपत राय ही थे, जिन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की और इसके कार्यान्वयन की शुरुआत की।
विवादों से भी रहा नाता
2021 में, समाजवादी पार्टी (SP) और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं ने राय के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, आरोप लगाया कि दो रियल एस्टेट डीलरों ने 2 करोड़ रुपए में जमीन का एक प्लॉट खरीदा, जो खरीद के 10 मिनट के भीतर ही श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट को 18.5 करोड़ रुपए में बेच दिया गया।
राय ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने जो जमीन खरीदी वो मार्केट रेट से कम कीमत पर खरीदी गई थी। इसके अलावा, उन्होंने ये भी कहा कि पारदर्शिता से संबंधित सभी जांच और संतुलन अच्छी तरह से बनाए रखा गया था।
2023 में, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक नए विवाद में फंस गया, जब हनुमान गढ़ी मंदिर के नागा साधुओं ने उस पर राम मंदिर स्थल के पास अंगद टीला में धोखाधड़ी से जमीन हड़पने का प्रयास करने का आरोप लगाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि गढ़ी पर दबाव बनाकर जमीन पर कब्जा करने की ट्रस्ट की कोशिश विफल होने के बाद, उसने स्थानीय प्रशासन पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए इस जमीन को "नजूल भूमि" (गैर-कृषि सरकारी भूमि) घोषित करवा दिया।
साधुओं ने कहा कि जिस जमीन की बात हो रही है, वो 13वीं सदी से गढ़ी के स्वामित्व में है, जिसके दस्तावेजी प्रमाण भी उपलब्ध हैं। ट्रस्ट ने अपने जवाब में कहा कि प्रशासन की कार्रवाई उसके नियंत्रण से बाहर थी और इसलिए उसे इस फैसले के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।