Ram Mandir: भगवान राम के आगमन से खत्म हो रहा धर्म नगरी अयोध्या का भी वनवास
Ram Mandir Inauguration: लखनऊ से अयोध्या तक के सड़क पर गाड़ियों की लंबी कतारे हैं। साइकिल पर केसरिया झंडा लगाए बहुत से लोग अयोध्या की तरफ बढ़ रहे हैं। गर्मी-सर्दी की परवाह नहीं। अयोध्या जा रहा हूं, राम लला के दर्शन करने। बड़े-बड़े होर्डिंग्स, जिसमें नरेंद्र मोदी और योगी छाए हुए हैं। सरकार की अपनी तैयारी चल रही है और हिंदू संगठनों की अलग
Ram Mandir: भगवान राम के आगमन से खत्म हो रहा धर्म नगरी अयोध्या का भी वनवास
Ram Mandir Inauguration:अयोध्या (Ayodhya) नगरी लंबे समय तक संत्रास झेलने के बाद अब उत्सव में डूबी हुई है। वो अब अपनी पुरानी पीड़ा भी भूल चुकी है। रामनगरी का हर पल उल्लास में गुजर रहा है। पूरी अयोध्या श्रद्धालुओं से भरी हुई है। इस अयोध्या में ढोल है, नगाड़ा है और लोकगीत है। लोगों की नृत्य करती टोलियां हैं। भाव के चलते श्रद्धालुओं की भीगी आंखे हैं। लखनऊ से निकलते ही एहसास होने लगता है की हम किसी धार्मिक नगरी की तरफ बढ़ रहे हैं। वो नगरी, जो लोगों के दिल में बसी हुई है। सड़क के दोनों छोर केसरिया झंडों से पटे पड़े हैं।
लखनऊ से अयोध्या तक के सड़क पर गाड़ियों की लंबी कतारे हैं। साइकिल पर केसरिया झंडा लगाए बहुत से लोग अयोध्या की तरफ बढ़ रहे हैं। गर्मी-सर्दी की परवाह नहीं। अयोध्या जा रहा हूं, राम लला के दर्शन करने। बड़े-बड़े होर्डिंग्स, जिसमें नरेंद्र मोदी और योगी छाए हुए हैं। सरकार की अपनी तैयारी चल रही है और हिंदू संगठनों की अलग।
जब रास्तों पर लगता था डर...
यह सब देखकर तमाम बातें, याद आ गईं, जब 1990 में पूरा लखनऊ-अयोध्या रोड में एक चिड़िया के दर्शन नहीं होते थे। लगभग 120 किलोमीटर लखनऊ से अयोध्या तक की सड़के सूनसान थीं। सन्नाटे को चीरती गाड़ी आगे बढ़ती थी। स्थिति ऐसी की रास्ते में डर लगता था।
पुलिस का कड़ा पहरा और रास्ते पर सुरक्षा बलों की कड़कती आवाज की कहां जा रहे हो? गाड़ी किनारे खड़ी करो, आगे नहीं जाना है। मालूम नहीं की अयोध्या का सड़क मार्ग ही नहीं बल्कि ट्रेन तक बंद है। फिर परिचय देना पड़ता था कि मैं पत्रकार हूं। अयोध्या कवरेज के लिए जा रहा हूं। लेकिन अब सब कुछ बदल चुका है।
अयोध्या आज अपने श्रद्धालुओं और दर्शनार्थियो के लिए पूरी तरह खुली हुई है, वो भी बहुत उत्सव के साथ। सड़के गुलजार हैं। अयोध्या भी केसरिया झंडों से पटी पड़ी है। इस उत्सव के बीच राजनीतिक दलों के बीच शह मात का खेल जारी है। लेकिन लोगों को इसकी परवाह नहीं।
छत्तीसगढ़ से आए धर्मपाल कहते हैं कि उन्हें केवल राम से मतलब है, उन्हीं के दर्शन करने आए हैं, जिसका भाग्य होगा वह अयोध्या में आकर दर्शन करेगा, जिसका भाग्य नहीं होगा वह नहीं आएगा।
अयोध्या पहुंचकर ऐसा महसूस ही नहीं होता कि ये वही अयोध्या है, जिसको बहैसियत पत्रकार 35 सालों से देखता रहा हूं। राम मंदिर आंदोलनों से बंजर हो गई अयोध्या के अब दिन बदल चुके हैं।
हर श्रद्धालू में उमंग है। आंदोलनों के कारण अयोध्या के व्यवसाय में सूखे जैसी स्थिति हो गई थी। नित नई पाबंदियां लगाई जाती थी। इसका असर अयोध्या के व्यवसाय पर पड़ा। रोज नई पाबंदी और तमाम लोगों के चलते इस नगरी के लोग इतने तंग आ गए थे कि सवाल उठाने लगे थे।
वनवास के बाद अपनी अयोध्या लौट रहे हैं राम
इस उत्सव को देख कर ऐसा लगता है कि 14 साल के वनवास के बाद राम वापस अयोध्या आ रहे हैं। उनके आगमन का उत्सव मनाने के लिए हर जगह सजावट हो रही है। लगभग आधा दर्जन देशो की सरकारों ने भारत सरकार से प्लॉट मांगे हैं, जिससे वह अपने लोगों के लिए ठहरने के लिए गेस्ट हाउस बना सके।
केवल देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लोग यह अंदाज लगा चुके हैं कि अयोध्या बहुत ही उत्सवी और महत्वपूर्ण होने वाली है, जो दुनियां भर के लोगो को आकर्षित करेगी। यहां पर पूरी दुनिया के लोगों को तांता लगने वाला है। तमाम निर्माण कार्य हो चुका है, लेकिन बदलाव युद्ध स्तर पर अभी भी चल रहा है।
निर्माण के लिए उपकरण सड़कों में अभी भी खड़े हुए हैं। सड़क निर्माण चल रहा है। कदम कदम पर अयोध्या को सजाने की तैयारी चल रही है। वह दौर भी याद आ रहा है, जब अयोध्या में रुकने के लिए कोई जगह नहीं थी और लोग फैजाबाद में रुकते थे, लेकिन अब लगभग 25 नए होटल बनाने की तैयारी चल रही है।
इसके साथ कई होटल बन भी चुके हैं। जमीन के दाम आसमान छू रहे हैं। श्रद्धालुओं के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। बड़ी संख्या में लोग और संस्थाएं अयोध्या में भंडारा चलाने की अनुमति मांग रही हैं, लेकिन यह संख्या इतनी ज्यादा है की उन्हें प्रशासन भंडारा चलाने की अनुमति नहीं दे रहा है। फिर भी 25 तारीख के बाद लगभग एक लाख लोगों के लिए रहने और खाने की व्यवस्था की गई है। हर प्रदेश के लिए अलग भंडारे बनाए गए हैं, यही नहीं रहने के लिए मंदिरों में भी इंतजाम किया गया है।