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Ayodhya Ram Mandir: 'जाकर नाम सुनत शुभ होई...' क्या मुहूर्त और क्या अधूरा मंदिर? रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर एकमत है अयोध्या

Ayodhya Ram Mandir: वास्तव में अयोध्या में मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर पूरे देश में जबरदस्त चर्चा है। अभी भी कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं। कई तरह के जवाब भी आ रहे हैं। इसके केंद्र में अयोध्या है, लेकिन दिलचस्प तथ्य है कि अयोध्या इससे अछूती है। अयोध्या को कोई चर्चा न उद्वेलित करती है, न कोई असर छोड़ती है। इस नगरी में आने वाला हर श्रद्धालु इन चर्चाओं पर ज्यादा बात भी नहीं करना चाहता। हां, मंदिरों और मठों के महंत जरूर इस पर टिप्पणी करते हैं, लेकिन राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लेकर अयोध्या लगभग एकमत है

Brijesh Shuklaअपडेटेड Jan 17, 2024 पर 7:36 PM
Ayodhya Ram Mandir: 'जाकर नाम सुनत शुभ होई...' क्या मुहूर्त और क्या अधूरा मंदिर? रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर एकमत है अयोध्या
Ayodhya Ram Mandir: क्या मुहूर्त और क्या अधूरा मंदिर? रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर एकमत है अयोध्या

Ayodhya Ram Mandir: न यह जानने की परवाह की मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का मुहूर्त सही है या गलत। न इस बात की चर्चा की मंदिर अधूरा है। मंदिर का शिखर अभी बना है या नहीं बना। अभी तो बस एक ही लक्ष्य है कि किसी तरह राम लला एक बार फिर गर्भ गृह में पधारें। श्रद्धालुओं के लिए यही प्रथम और अंतिम लक्ष्य है कि जल्द ही प्राण प्रतिष्ठा (Pran Pratishtha) समारोह का दिन आए। शायद यह जानकर उन लोगों की चिंता जरूर बढ़ेगी, जो मुहूर्त पर सवाल उठा रहे हैं। जल्दबाजी में मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह की चर्चा कर रहे हैं। उसे चुनाव से जोड़ने की बात कर रहे हैं। आधे-अधूरे बने मंदिर और शिखर का निर्माण अभी तक न होने के बावजूद प्राण प्रतिष्ठा करने को गलत ठहरा रहे हैं।

इतना ही नहीं आरोप तो ये भी लगाए गए कि मंदिर भगवान राम के जन्मस्थान से तीन किलोमीटर दूर बनाया जा रहा है। असल में आम श्रद्धालु इन बातों को सुनना भी नहीं चाहता और न ही इस पर कोई चर्चा करना चाहता है और न ही उन्हें इसकी परवाह है।

महाराष्ट्र के ही श्रद्धालुओं का एक दल यह कहकर आगे बढ़ जाता है कि मैं तो अपनी आंखों से देख रहा हूं की रामलला वहीं विराजमान हो रहे हैं, जहां पर उनका जन्म हुआ था। अब कौन क्या कह रहा है, हम लोगों को इससे कोई मतलब नहीं। इस दल के साथ मंदिर-मंदिर जाकर दर्शन कर रहे महेश भाई कहते हैं कि राम लला जल्द से जल्द नए नए मंदिर में आकर बिराज जाए, अपनी आंखों से यही देखना चाहते हैं। ये परम सौभाग्य है कि वो दिन अब जल्द आ रहा है। कौन क्या कह रहा है, मुझे इससे मतलब नहीं।

पास खड़े हम सभी की बात सुन रहे एक साधु बोल पड़े, "जाकर नाम सुनत शुभ होई। मोरे ग्रह आवा प्रभु सोई।" यानी जिसका नाम सुनने से ही शुभ हो, वह स्वयं मेरे घर आ गए हैं। उनका आगमन पूरे विश्व का कल्याण करने वाला है। इसलिए कैसा मुहूर्त? मुहूर्त तो दिव्य ही है, लेकिन न भी हो तो कोई बात नही ।

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