Ram Temple: राम मंदिर के गर्भ गृह में इस दिन होगी रामलला की प्राण प्रतिष्ठा, दर्शन और पूजन भी होगा शुरू

Ram Temple: रिपोर्ट की मानें तो 22 जनवरी को राम मंदिर के गर्भ गृह में पूरे विधि विधान और पूजा पाठ के साथ रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। इसके बाद राम मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा और भक्त यहां भगवान राम के दर्शन कर सकेंगे

अपडेटेड Apr 28, 2023 पर 5:42 PM
बताया जा रहा है कि भगवान राम की पुरानी और नई दोनों प्रतिमाओं को राम मंदिर में स्‍थापित करने की योजना है

Ram Mandir in Ayodhya: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में बन रहे राम मंदिर में गर्भगृह में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को की जाएगी। यानि साल 2024 में राम लला अपने भव्य मंदिर में विराजमान हो जाएंगे। उत्तर प्रदेश के मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। राम मंदिर का 70 फीसदी निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। गर्भगृह के पिलर 14 फीट तक बनकर तैयार हो चुके हैं। आपको बता दें कि राममंदिर निर्माण समिति की दो दिवसीय बैठक शुक्रवार को शुरू हुई, इसके बाद ही यूपी के मंत्री का ट्वीट सामने आया है।

बताया जा रहा है कि भगवान राम की पुरानी और नई दोनों प्रतिमाओं को राम मंदिर में स्‍थापित करने की योजना है। अयोध्या में मंदिर के निर्माण के लिए 5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भूमिपूजन किया गया था। अब बताया जा रहा है कि 22 जनवरी, 2024 को मंदिर के गर्भ गृह में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी।

रिपोर्ट की मानें तो 22 जनवरी को राम मंदिर के गर्भ गृह में पूरे विधि विधान और पूजा पाठ के साथ रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। इसके बाद राम मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा और भक्त यहां भगवान राम के दर्शन कर सकेंगे।


एक अधिकारी ने बताया कि गर्भ गृह ऐसे बनाया जा रहा है कि राम लला की मूर्ति पर राम नवमी के दिन सूर्य की किरणें अभिषेक करें। उस दिन पांच मिनट तक सूर्य की किरणें रामलला के ललाट पर रहेंगी। इसे सूर्य तिलक कहा गया है।

राम मंदिर पर किया गया 155 देशों के पानी से अभिषेक

दुनिया भर के सात महाद्वीपों की 155 नदियों से लाया गया जल हाल ही में अयोध्या के राम मंदिर में जलाभिषेक के जरिए अर्पित किया गया। दिल्ली स्थित गैर सरकारी संगठन ‘दिल्ली स्टडी ग्रुप’ के सदस्यों ने दिल्ली के पूर्व बीजेपी विधायक विजय जॉली के नेतृत्व में अनिवासी भारतीयों के एक समूह और विभिन्न देशों के राजदूतों की उपस्थिति में राम जन्मभूमि में भगवान राम के दरबार के समक्ष 155 कंटेनर पानी चढ़ाया गया। इस दौरान 40 से अधिक देशों के अनिवासी भारतीयों ने बड़ी संख्या में कार्यक्रम में भाग लिया।

फिजी, मंगोलिया, डेनमार्क, भूटान, रोमानिया, हैती, ग्रीस, कोमोरोस, काबो वर्डे, मोंटेनेग्रो, तुवालु, अल्बानिया और तिब्बत के राजनयिकों ने राम मंदिर में इस ऐतिहासिक जलाभिषेक में भाग लिया। इसके अलावा भूटान, सूरीनाम, फिजी, श्रीलंका और कंबोडिया जैसे देशों के प्रमुखों ने भी इस कार्य के लिए शुभकामनाएं भेजीं।

आयोजन के संयोजक विजय जॉली ने अपने स्वागत भाषण में दावा किया कि मुगल बादशाह बाबर के जन्म स्थान उज्बेकिस्तान के अंदीजान शहर से प्रसिद्ध कशक नदी का पवित्र जल भी जलाभिषेक के लिए पहुंचाया गया है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही इस पवित्र कार्य के लिए युद्धग्रस्त रूस और यूक्रेन का पानी और चीन तथा पाकिस्तान से भी पानी लाया गया था।

उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम न केवल भारत के लोगों बल्कि विश्व के नागरिकों की भगवान राम के आदर्शों में आस्था को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि कोरोना के सबसे बुरे दौर में पवित्र जल को इकट्ठा करने में ढाई साल से ज्यादा का वक्त लग गया।

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जॉली ने दावा किया कि दुनिया के सभी सात महाद्वीपों के हिंदुओं ने ही नहीं बल्कि मुसलमानों, ईसाइयों, यहूदियों ने भी इस काम में सहयोग किया। उन्होंने इसे ऐतिहासिक और अविस्मरणीय स्मृति बताया।

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