भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India (RBI) ने कहा कि वे लिक्विडिटी को मैनेज करने के लिए ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO) बिक्री पर विचार कर सकते हैं। आरबीआई के ऐसा कहने के बाद भारत के बेंचमार्क 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड पर यील्ड में 8 बेसिस प्वाइंट (Bps) की बढ़ोत्तरी देखने को मिली। एक बेसिस प्वाइंट प्रतिशत अंक का सौवां भाग होता है। बता दें कि आरबीआई की द्विमासिक मॉनेटरी पॉलिसी बैठक में लिक्विडिटी मैनेज करने के बारे में ऐसा विचार करने का निर्णय लिया गया। आज सुबह 10-वर्षीय बेंचमार्क 7.18 प्रतिशत 2033 बॉन्ड पर यील्ड सुबह 10:50 बजे 7.2890 प्रतिशत पर था। जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यील्ड 7.2140 प्रतिशत पर बंद हुआ था।
Rockfort Fincorp के संस्थापक वेंकटकृष्णन श्रीनिवासन ने कहा, "यह बहुत स्पष्ट और एक चेतावनी के रूप में आया है कि आरबीआई लिक्विडिटी टाइट रखने और महंगाई को नियंत्रित करने के लिए OMO बिक्री करना चाहता है। उन्हें उम्मीद है कि हेडलाइन इनफ्लेशन यानी कि रिटेल महंगाई उम्मीद से अधिक रह सकती है।"
श्रीनिवासन ने आगे कहा कि जाहिर तौर पर बॉन्ड बाजार को इसकी उम्मीद नहीं थी। 10 साल की gsec यील्ड पहले से ही 5-7 बीपीएस बढ़ गया है।
पॉलिसी की घोषणा के दौरान आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) ने कहा कि केंद्रीय बैंक लिक्विडिटी को मैनेज करने के लिए ओपन मार्केट ऑपरेंशंस (OMO) बिक्री पर विचार करेगा।
दास ने कहा, "मॉनेटरी पॉलिसी के रुख के हिसाब से लिक्विडिटी को मैनेज करने के लिए हमें OMO बिक्री पर विचार करना पड़ सकता है।"
OMO का मतलब केंद्रीय बैंक द्वारा खुले बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों (government securities) की खरीद या बिक्री करना होता है।
इसके अलावा दास ने ये भी कहा कि इस तरह के ऑपरेशन की टाइमिंग और मात्रा उस समय उभरने वाली लिक्विडिटी कंडीशन पर निर्भर करेगी।
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना हेतु दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।)