सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश को अनुमति के खिलाफ दाखिल की गई याचिका पर फैसला सुनाते हुए एक बड़ी बेंच को रेफर कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री के पक्ष में फैसला दिया था, जिसके खिलाफ याचिका दाखिल की गई थी, कोर्ट ने इसपर सुनवाई कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब कोर्ट ने इसे बड़ी बेंच को रेफर कर दिया है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच जजों की बेंच ने इस पीटिशन पर सुनवाई की थी। इस बेंच ने अब इस केस को सात जजों की संवैधानिक बेंच के पास भेज दिया है। कोर्ट ने कहा है कि अदालत को धार्मिक विश्वासों से संबंधित मामलों में सावधानी बरतनी चाहिए, ऐसे में यह केस बड़ी बेंच को भेजा जा रहा है।
इस पीटिशन पर पांच जजों की बेंच के तीन जजों ने 3:2 का फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस केस के फैसले का असर मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश पर प्रतिबंध और पारसी महिलाओं के अग्यारी में प्रवेश पर प्रतिबंध पर भी पड़ेगा।
हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि महिलाओं के सबरीमाला में प्रवेश संबंधी 28 सितंबर, 2018 का उसका फैसला अभी भी लागू है या नहीं। यह स्पष्ट होना जरूरी है क्योंकि 16 नवंबर से भगवान अयप्पा का मंदिर खुल रहा है। कोर्ट ने मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध की प्रथा के खिलाफ कोर्ट पहुंची महिला एक्टिविस्ट्स की याचिका पर तब फैसला सुनाते हुए कहा था कि लिंग के आधार पर मंदिर में प्रवेश देना भेदभाव की प्रथा है।
सालों पुरानी इस रीति को खत्म करने के कोर्ट के फैसले के खिलाफ कोर्ट में रिव्यू पीटिशन दाखिल की गई।