सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में कॉमन ड्रेस कोड लागू करने की मांग वाली जनहित याचिका को किया खारिज

जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने कहा कि यह कोई ऐसा मामला नहीं है, जिसे अदालत में दायर किया जाना चाहिए

अपडेटेड Sep 16, 2022 पर 5:46 PM
याचिकाकर्ता ने शिक्षा का अधिकार कानून के तहत सरकारों को निर्देश जारी करने का अनुरोध किया था

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने केंद्र, राज्यों एवं केंद्र-शासित प्रदेशों को रजिस्टर्ड शैक्षणिक संस्थानों के कर्मचारियों एवं छात्रों के लिए कॉमन ड्रेस कोड लागू करने का निर्देश देने का अनुरोध करने वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया।

जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने कहा कि यह कोई ऐसा मामला नहीं है, जिसे अदालत में दायर किया जाना चाहिए। याचिका में तर्क दिया गया था कि समानता स्थापित करने और बंधुत्व एवं राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए एक समान ड्रेस कोड को लागू किया जाना चाहिए।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, याचिकाकर्ता निखिल उपाध्याय की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने कहा कि यह एक संवैधानिक मामला है। उन्होंने शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के तहत सरकारों को निर्देश जारी करने का अनुरोध किया।


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यह एहसास हो जाने पर कि पीठ इस जनहित याचिका पर सुनवाई नहीं करना चाहती, वकील ने इसे वापस ले लिया। यह याचिका कर्नाटक हिजाब विवाद की पृष्ठभूमि में दायर की गई थी। जस्टिस गुप्ता की अगुवाई वाली यही पीठ राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध को हटाने से इनकार करने वाले कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अश्विनी उपाध्याय और अश्विनी दुबे के माध्यम से दाखिल की गई जनहित याचिका में केंद्र को ऐसा न्यायिक आयोग या एक विशेषज्ञ पैनल गठित करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया था। जो सामाजिक एवं आर्थिक न्याय, सामाजिक धर्मनिरपेक्षता एवं लोकतंत्र के मूल्यों और छात्रों के बीच भाईचारा और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए सुझाव दे सके।

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