देश में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवा देने का रास्ता साफ, सरकार ने जारी की नई भारतीय स्पेस पॉलिसी

नई पॉलिसी के तहत कंपनियों को IN-SPACe से मंजूरी मिलना आसान हो जाएगा। नई पॉलिसी के माध्याम से इन- स्पेस को अधिकार मिलेगा। मौजूदा समय में दो कंपनियों के पास ही सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाएं देने का लाइसेंस है। अभी वन वेब (Oneweb) और रिलायंस जियो (Reliance Jio) के पास ही लाइसेंस है

अपडेटेड Apr 10, 2023 पर 2:10 PM
Nelco ने Telesat से करार किया है। रिलायंस जियो ने SES के साथ करार किया हुआ है।

5G के बाद अब देश में स्पेस ब्रॉडबैंड क्रांति आने वाली है। नई स्पेस पॉलिसी से सरकार ने देश में सैटेलाइट के जरिए ब्रॉडबैंड सेवा देने की रास्ता आसान बना दिया है। इससे अब विदेशी सैटेलाइट्स को देश में आसानी से ऑपरेट कर पाएंगी। नेल्को (Nelco), वन वेब (OneWeb), स्टारलिंक (Starlink) और जियो (Jio) जैसी कंपनियां जल्द ही अपनी सर्विस शुरू कर सकती हैं।

सीएनबीसी-आवाज के संवाददाता असीम मनचंदा ने कहा कि नई स्पेस पॉलिसी की मदद से दूरदराज के इलाकों में ब्रॉडबैंड सर्विस पहुंच सकेगी। इससे सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाएं देने की राह आसान हो गई है। सरकार ने नई भारतीय स्पेस पॉलिसी जारी कर दी है। अब भारत से बाहर की सैटेलाइट कंपनियों को आसानी से मार्केट एक्सेस मिल जाएगा।

असीम मनचंदा ने आगे कहा कि नई पॉलिसी के तहत कंपनियों को IN-SPACe से मंजूरी मिलना आसान हो जाएगा। नई पॉलिसी के माध्याम से इन- स्पेस को अधिकार मिलेगा। मौजूदा समय में दो कंपनियों के पास ही सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाएं देने का लाइसेंस है। अभी वन वेब (Oneweb) और रिलायंस जियो (Reliance Jio) के पास ही लाइसेंस है। जबकि नेल्को (Nelco) और स्टारलिंक (Starlink) ने लाइसेंस के लिए आवेदन किया हुआ है।


बता दें कि Nelco ने Telesat से करार किया है। रिलायंस जियो ने SES के साथ करार किया हुआ है। वन वेब ने अपनी सैटेलाइट का लॉन्च पूरा कर ली है। कंपनियां विदेशी सैटेलाइट के जरिए सर्विस शुरू कर सकती हैं।

क्या है नई स्पेस पॉलिसी

हाल ही में कैबिनेट ने भारतीय स्पेस पॉलिसी 2023 को मंजूरी दी थी। ये पॉलिसी भारत के अंतरिक्ष विभाग की भूमिका का विस्तार करेगी। अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोलने के लगभग तीन साल बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गुरुवार को निजी क्षेत्र के खिलाड़ियों द्वारा भागीदारी की प्रक्रिया को कारगर बनाने के लिए भारतीय की अंतरिक्ष नीति 2023 को मंजूरी दी।

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