उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में आधी रात को हुए एक अनोखे विरोध प्रदर्शन ने सबका ध्यान खींच लिया। कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर दो महिलाएं अपने छोटे बच्चों के साथ धरने पर बैठ गईं, जिससे हड़कंप मच गया। जब ड्यूटी पर मौजूद सिपाहियों ने यह नजारा देखा, तो तुरंत अधिकारियों को सूचना दी। कुछ ही देर में एसडीएम और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे और महिलाओं से बातचीत की। लेकिन जो वजह सामने आई, उसने सभी को चौंका दिया। महिलाओं का आरोप था कि सरकार द्वारा आवंटित उनकी जमीन पर दबंगों ने कब्जा कर लिया है, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई सुनवाई नहीं हो रही।
कई बार प्रशासन से गुहार लगाने के बाद भी न्याय न मिलने से मजबूर होकर उन्होंने यह कदम उठाया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिससे प्रशासन पर सवाल उठने लगे हैं। अब देखना यह है कि क्या इन महिलाओं को न्याय मिल पाएगा।
धरने की वजह बनी जमीन पर कब्जे की शिकायत
देर रात लगभग 11 बजे, बलिया कलेक्ट्रेट ऑफिस के बाहर दो महिलाएं अपने छोटे बच्चों के साथ धरने पर बैठ गईं। ये महिलाएं बांसडीह तहसील के देवरार गांव की रहने वाली थीं। उनका आरोप था कि उन्हें सरकार द्वारा जो पट्टा की जमीन आवंटित किया गया था, उस पर कुछ दबंगों ने कब्जा कर लिया है। इसके खिलाफ उन्होंने लेखपाल, एसडीएम, तहसीलदार, एडीएम और यहां तक कि जिलाधिकारी से भी कई बार गुहार लगाई, लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिली।
थक-हारकर किया आधी रात को प्रदर्शन
न्याय न मिलने से परेशान महिलाओं ने रात के अंधेरे में कलेक्ट्रेट ऑफिस के बाहर धरना देने का फैसला किया। उनका कहना था कि जब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं होगा, वे वहां से नहीं हटेंगी। इस दौरान स्थानीय लोग भी वहां जुटने लगे और यह खबर आग की तरह फैल गई।
अधिकारियों में मचा हड़कंप
महिलाओं के धरने की खबर मिलते ही जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। सदर एसडीएम अत्रे मिश्रा और सिटी मजिस्ट्रेट तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने महिलाओं को समझाने की कोशिश की और उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी समस्या का जल्द समाधान किया जाएगा। लेकिन महिलाएं अपनी मांगों पर अड़ी रहीं।
धरने का वीडियो वायरल, प्रशासन पर उठे सवाल
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं कि आखिर गरीबों की आवाज़ सुनने के लिए उन्हें आधी रात को धरना देने की जरूरत क्यों पड़ी? हालांकि, अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि इस मामले की गहन जांच कराई जाएगी और महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए उचित कार्रवाई की जाएगी।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और क्या इन महिलाओं को वाकई उनका हक मिल पाएगा, या यह मामला भी सिर्फ आश्वासनों तक ही सीमित रह जाएगा।