Chamoli Glacier Burst Avalanche : उत्तराखंड के चमोली जिले में शुक्रवार सुबह भारी तबाही की खबर सामने आई। भारत चीन सीमा पर स्थित माणा गांव में ग्लेशियर टूटने की वजह से बड़ा हादसा हो गया। बर्फ का बड़ा पहाड़ टूटने से बीआरओ कैंप में मौजूद 57 मजदूर बर्फ में दब गए। हालांकि, इस हादसे के बाद सेना के जवानों ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया। फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन में 15 मजदूरों को बचा लिया गया है और बाकियों की तलाश जारी है। सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की टीमें (NDRF SDRF) रेस्क्यू में जुटी हैं। वहीं इस हादसे के बाद एक बार फिर ये सवाल उठने लगा कि आखिर पहाड़ों में बार -बार हिमस्खलन क्यों होता है?
बता दें कि, पहाड़ियों पर बर्फ की चादरे कहीं पर कमजोर हो जाती है तो खिसक जाती है। उसी घटना को हिमस्खलन कहा जाता है। अगर छोटी बर्फ की चट्टान या चादर नीचे की ओर आती है तो खतरा कम होता है लेकिन यही बर्फ की चट्टाने बड़ी हो तो वो तबाही लाती हैं। जब ये चट्टाने नीचे की ओर आती है तो इसके साथ कई बड़े-बड़े चट्टान भी साथ में आते हैं इसके आलावा पत्थर, पेड़-पौधे और सारा मलबा भी आता है। इसके जद में जो भी आता है वो खत्म हो जाता है।
बता दें कि हिमस्खलन, ज्यादातर सर्दियों के महीनों में देखने को मिलता है। जब पहाड़ियों पर बर्फबारी होती है तो पुराने बर्फ जो नीचे दब जाते हैं। नए बर्फ के दबाव में पुराने बर्फ खिसक जाते हैं। वहीं उत्तराखंड के सभी जिलों में पिछले दो दिनों से भारी बारिश हो रही है, साथ ही पहाड़ी इलाकों में जोरदार बर्फबारी भी हुई है। मौसम विभाग ने पहले ही इसके लिए अलर्ट जारी कर दिया था। शुक्रवार को चमोली में हुए हिमस्खलन की घटना ने सभी को चौंका दिया।
पहाड़ों में बार -बार क्यों होता है हिमस्खलन?
जियोलॉजिस्ट अजय पॉल के अनुसार, 'हिमस्खलन एक प्राकृतिक आपदा है, जिसमें बर्फ, चट्टानें और मिट्टी का बड़ा हिस्सा तेजी से नीचे गिरता है। यह आमतौर पर पहाड़ी और बर्फीले इलाकों में होता है, जहां ग्लेशियर होते हैं।' उत्तराखंड अपनी खूबसूरत पहाड़ियों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां जियोलॉजिकल घटनाएं भी चिंता का कारण बनती हैं। हिमस्खलन तब होता है जब ग्लेशियर का कोई हिस्सा टूटकर नीचे गिरने लगता है। अजय पॉल के मुताबिक, चमोली में हुए ग्लेशियर हिमस्खलन के पीछे कई कारण हो सकते हैं। जैसे
उन्होंने हिमस्खलन के कुछ और कारण बताए, जैसे ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन और जियोलॉजिकल हलचल। ग्लोबल वार्मिंग से तापमान बढ़ने के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम में अचानक बदलाव आता है, जिससे ग्लेशियर प्रभावित होते हैं।
और जब बर्फ पिघलेंगी तो जाहिर सी बात है कि वो नीचे की ओर चलेंगी। वहीं जियोलॉजिकल हलचल पहाड़ों में कंपन पैदा करती है, जिससे ग्लेशियर टूट सकते हैं। उत्तराखंड एक हिमालयी राज्य है, इसलिए यहां ऐसी घटनाएं अक्सर होती रहती हैं।