Char Dham Yatra 2022: चारधाम यात्रा के दौरान अबतक 39 श्रद्धालुओं की मौत, यात्री ऐसे करें खुद का बचाव

मंदिरों में उमड़ रही भारी भीड़ के मद्देनजर प्रत्येक धाम में दर्शन के लिए निर्धारित दैनिक श्रद्धालुओं की अधिकतम संख्या में एक हजार की बढ़ोतरी की गई है

अपडेटेड May 16, 2022 पर 3:59 PM
मौत का कारण हाई ब्लड प्रेशर, हृदय संबंधी समस्याएं और पर्वतीय बीमारी रही हैं

Char Dham Yatra 2022: उत्तराखंड में चारधाम शुरू होने के बाद से अब तक 39 श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य कारणों से मौत हो चुकी है। उत्तराखंड की हेल्थ डायरेक्टर जनरल डॉ. शैलजा भट्ट ने कहा कि चार धाम यात्रा मार्ग पर अब तक 39 तीर्थयात्रियों की मौत हो चुकी है। मौत का कारण हाई ब्लड प्रेशर, हृदय संबंधी समस्याएं और पर्वतीय बीमारी रही हैं। उन्होंने कहा कि मेडिकल रूप से अयोग्य तीर्थयात्रियों को चार धाम यात्रा न करने की सलाह दी जा रही है।

उत्तराखंड के उच्च गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र में स्थित चारधामों की यात्रा 3 मई को अक्षय तृतीया के पर्व से शुरू हुई थी। चार धाम यात्रा के दौरान तीर्थयात्री उत्तरकाशी जिले में स्थित यमुनोत्री और गंगोत्री, जबकि रुद्रप्रयाग में स्थित केदारनाथ और चमोली के बद्रीनाथ जाते हैं।

अधिकतम श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी


चार धामों की यात्रा पर आने वाले खासतौर से बुजुर्ग श्रद्धालुओं के हेल्थ को लेकर चिंतित उत्तराखंड सरकार ने स्वास्थ्य संबंधी दिशानिर्देश जारी किए हैं। साथ ही मंदिरों में उमड़ रही भारी भीड़ के मददेनजर प्रत्येक धाम में प्रतिदिन दर्शन के लिए निर्धारित अधिकतम श्रद्धालुओं की संख्या में एक हजार की बढ़ोतरी कर दी गई है।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से गाइडलाइंस में कहा गया है कि 2,700 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित सभी चारों धाम- बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में तीर्थयात्री अत्यधिक ठंड, कम हवा का दबाव और ऑक्सीजन की कम मात्रा से प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए वे मेडिकल जांच के बाद ही यात्रा शुरू करें।

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डॉ. शैलजा ने पहले कहा कि यात्रा मार्गों पर बनाए गए बिंदुओं पर तीर्थयात्रियों की हेल्थ जांच की जा रही है। शैलजा ने कहा कि इस साल तीर्थयात्रियों की संख्या काफी अधिक है, क्योंकि यात्रा 2020 और 2021 में महामारी के कारण नहीं हुई थी।

सीएम ने दिए सख्त निर्देश

चार धाम यात्रा में श्रद्धालुओं की मौत को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गंभीरता से लिया है। सीएम के सख्त निर्देश के बाद करीब 25 यात्रियों को स्वास्थ्य जांच के बाद डॉक्टरों की सलाह पर यमुनोत्री के पड़ाव जानकीचट्टी से ही वापस लौटा दिया गया।

सीएम धामी ने कहा कि चारधाम में तीर्थयात्रियों की मौत की वजह अव्यवस्था नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं। धामी ने दावा किया कि उनकी सरकार यात्रा को सरल बनाने की पूरी कोशिश में जुटी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यात्रा को सफल बनाने की जिम्मेदारी सरकार के साथ-साथ जनता की भी है।

यात्री ऐसे करें खुद का बचाव

दरअसल, जैसे-जैसे आप अधिक ऊंचाई पर चढ़ते हैं, वैसे-वैसे दबाव कम हो जाता है और उपलब्ध ऑक्सीजन की मात्रा कम होती जाती है। पर्वतीय बीमारी 8,000 फीट से अधिक की यात्रा करने वाले किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। जिन यात्रियों को सिर दर्द, चक्कर आना, उल्टी, थकान, सांसों लेने में दिक्कत आना, नींद की समस्या और भूख में कमी महसूस हो वह तुरंत अपना मेडिकल जांच करवा लें।

डॉक्टरों ने कहा कि चार धाम यात्रा करने वालों को रास्ते में एक दिन विश्राम जरूर करना चाहिए। हृदय रोग, सांस की बीमारी, डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर वाले तीर्थयात्रियों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। अधिकारियों ने बताया कि 2019 में लगभग 38 लाख तीर्थयात्रियों ने चार धाम यात्रा में भाग लिया था, जिसमें से लगभग 90 तीर्थयात्रियों की मौत हो गई थी। वहीं 2017 में 112 तीर्थयात्रियों की मौत हुई और 2018 में 102 की जान चली गई थी।

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