तीन घंटों में चेन्नई से कोलकाता और किराया मात्र 600 रुपये? Aero India में IIT-M ने दिखाया अपना 'ई-फ्लाइंग बोट'

आप कल्पना करो कि चेन्नई से कोलकाता तक की यात्रा केवल तीन घंटे में कर सको और इसकी कीमत एसी थ्री-टियर ट्रेन टिकट से भी सस्ता है। चेन्नई से कोलकाता तक की यात्रा केवल तीन घंटे में और उसकी कीमत मात्र 600 रुपये। भले ही ये आपको अभी असंभव सा लगा रहा हो पर ऐसा हो सकता है, अगर IIT-मद्रास द्वारा बनाई गई स्टार्टअप कंपनी, वाटरफ्लाई टेक्नोलॉजीज का नया प्रोजेक्ट सफल हो जाता है

अपडेटेड Feb 14, 2025 पर 9:57 PM
वाटरफ्लाई टेक्नोलॉजीज का नया प्रोजेक्ट काफी चर्चा में रहा

Aero India 2025: बेंगलुरु के येलहंका एयरफोर्स स्‍टेशन पर चल रहे एयरो इंडिया 2025 आज समाप्त हो गया है। एयरो इंडिया के आखिरी दिन एक तरफ अमेरिका का F-16 और F-35 ने लोगों को चौंकाया तो वहीं दूसरी तरफ रूस के SU-57 ने असमान में गजब का करतब दिखाया। वहीं इस एयरो इंडिया में IIT-मद्रास द्वारा बनाई गई स्टार्टअप कंपनी, वाटरफ्लाई टेक्नोलॉजीज का नया प्रोजेक्ट काफी चर्चा में रहा। यह कंपनी एक खास तरह के इलेक्ट्रिक हवाई जहाज बना रही है, जिसे "विंग-इन-ग्राउंड" (WIG) क्राफ्ट कहा जाता है, जो पानी के ऊपर उड़ते हैं।

आप कल्पना करो कि चेन्नई से कोलकाता तक की यात्रा केवल तीन घंटे में कर सको और इसकी कीमत एसी थ्री-टियर ट्रेन टिकट से भी सस्ता है। चेन्नई से कोलकाता तक की यात्रा केवल तीन घंटे में और उसकी कीमत मात्र 600 रुपये। भले ही ये आपको अभी असंभव सा लगा रहा हो पर ऐसा हो सकता है, अगर IIT-मद्रास द्वारा बनाई गई स्टार्टअप कंपनी, वाटरफ्लाई टेक्नोलॉजीज का नया प्रोजेक्ट सफल हो जाता है। यह कंपनी एक खास तरह के इलेक्ट्रिक हवाई जहाज बना रही है, जिसे "विंग-इन-ग्राउंड" (WIG) क्राफ्ट कहा जाता है, जो पानी के ऊपर उड़ते हैं। इसे सीग्लाइडर कहा जाता है और ये तटीय क्षेत्रों में यात्रियों और माल को जल्दी और सस्ते में ले जाएंगे।

तीन घंटे में पहुंचे चेन्नई से कोलकाता

वाटरफ्लाई टेक्नोलॉजीज ने बेंगलुरू में एयरो इंडिया शो में अपना डिज़ाइन दिखाया है, और जल्द ही इसका प्रोटोटाइप भी बनेगा। ये क्राफ्ट हवाई जहाज और नाव का अच्छा मिलाजुला विकल्प है, जो पर्यावरण के लिए भी अच्छा है। इसके CEO हरीश राजेश ने बताया कि, 1,600 किलोमीटर की यात्रा, जैसे कि चेन्नई से कोलकाता, केवल 600 रुपए में हो सकती है। उनका कहना है कि इस साल के अंत तक इसका एक छोटा प्रोटोटाइप तैयार होगा और अगले साल तक इसका बड़ा संस्करण बनाया जाएगा, जिसमें 20 सीटें और चार टन सामान ले जाने की क्षमता होगी।


कैसे करेगा काम

WIG क्राफ्ट पानी से उड़ता है, और लगभग 4 मीटर की ऊंचाई पर उड़ता रहता है। इससे यह बहुत कम ऊर्जा में तेज गति से यात्रा कर सकता है। इसकी अधिकतम गति 500 किलोमीटर प्रति घंटा है और यह बिल्कुल एक विमान की तरह चलता है, लेकिन इसकी लिफ्ट पानी के ऊपर से उत्पन्न होती है, जिससे हवाई अड्डे की जरूरत नहीं होती। यह पूरी तरह से इलेक्ट्रिक है और बैटरी से चलता है, जिससे यह पर्यावरण के लिए अच्छा है। भविष्य में कंपनी हाइड्रोजन-इलेक्ट्रिक वेरिएंट भी बना रही है, जो 2,000 किलोमीटर तक जा सकेगा। इसे पानी के अलावा बर्फ, रेगिस्तान या किसी भी सपाट जगह पर भी उड़ाया जा सकता है।

सफर को बनाएगा और भी सस्ता

वाटरफ्लाई टेक्नोलॉजीज का प्लान है कि इसे एयरलाइन ऑपरेटरों को बेचा जाए और साथ ही कार्गो और निगरानी के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाए। कंपनी का मानना है कि 2029 तक, यह अंतरमहाद्वीपीय यात्रा भी कर सकेगा, जैसे दुबई से लॉस एंजिल्स। वाटरफ्लाई को अब IIT मद्रास से मदद मिल रही है और यह और धन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि वह इसका प्रोटोटाइप जल्दी से जल्दी बना सकें। जब यह पूरी तरह से तैयार हो जाएगा, तो यह न केवल पर्यावरण को बचाने में मदद करेगा, बल्कि यात्रा को भी सस्ता और तेज़ बनाएगा।

क्या है ग्राउंड-इफ़ेक्ट 

WIG वाहनों का विचार 1960 के दशक से है, जब सोवियत संघ ने इस तरह के सैन्य उपयोग के लिए बड़े वाहन बनाए थे। लेकिन वाटरफ्लाई टेक्नोलॉजीज का डिज़ाइन अधिक प्रभावी और व्यावसायिक उपयोग के लिए है। कई कंपनियाँ, जैसे फार्मास्युटिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियाँ, इसे कम लागत और कम प्रदूषण के कारण इस्तेमाल करना चाहती हैं।

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