Diabetes: खराब दिनचर्या, गलत खानपान, तनाव और अत्यधिक आराम की वजह से डायबिटीज आम समस्या बन गई है। इस बीमारी के मरीजों की संख्या में रोजाना इजाफा हो रहा है। इसके लिए भारत को डायबिटीज की राजधानी भी कहा जाता है। जानकारों की मानें तो आने वाले सालों में डायबिटीज के मरीजों की संख्या में बड़ी तेजी से बढ़ोत्तरी हो सकती है। ऐसे में इस कंट्रोल करना बेहद जरूरी है। डायबिटीज के मरीजों के लिए कई ऐसी जड़ी-बूटियां और पेड़ पौधों की पत्तियां हैं। जिनके सेवन से ब्लड शुगर लाइफ टाइम कंट्रोल रहता है। ऐसे ही पीतांबर के पत्ते डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद माने गए हैं।
पीतांबर के पौधे को एड़गज, दादमारी, कैंडल बुश, रिंगवर्म श्रब आदि नामों से भी जाना जाता है। पीतांबर पौधे का वैज्ञानिक नाम केसिया अलाटा (Cassia alata) है। इस पौधे में पीले रंग का फूल निकलता है जो 25 इंच तक लंबा हो जाता है। इस कारण यह गार्डेन में भी लगाया जाता है। देखने में यह बेहद आकर्षक लगता है। यह औषधीय गुणों से भरपूर है। इसके सेवन से कई बीमारियां खत्म हो सकती हैं।
पीतांबर के पत्तों से डायबिटीज का होगा नाश
पीतांबर के पत्तों में एंटी-एलर्जिक, एंटी-इंफ्लामेटरी, एंटीऑक्सीडेंट, एंटीकैंसर, एंटीडायबेटिक और एंटीफंगल गुण होता है। पीतांबर के पत्तों को अगर सुबह-सुबह चबाया जाए तो कई बीमारियों की छुट्टी हो जाएगी। दरअसल, पीतांबर के पौधे में कई तरह के मेटाबोलिक कंपाउड होते हैं। इनमें फ्लेवोनेस, फ्लेवोनोएड, फ्लेवोनोल्ड, ग्लाइकोसाइड, एलाटिनोन, डी ग्लूकोसाइड जैसे कंपाउड होता है, जो मेटाबोलिज्म को बूस्ट कर इंसुलिन के प्रोडक्शन को बढ़ाता है। ऐसे में अगर रोज सुबह पीतांबर के पत्ते को अगर चबाया जाए तो इससे दिन भर आपका ब्लड शुगर नहीं बढ़ेगा। पीतांबर की पत्तियों से स्किन से जुड़ी समस्याएं भी ठीक हो सकती है। इसकी पत्तियों को स्किन पर लगाने से टीनिया वर्सिकलर, सोरोसिस, रासासिया, वार्ट, कैंडिडा एल्बीकांस, टी. सीमी, सी हुनाटा जैसी स्किन से जुड़ी बीमारियां जल्द ही दूर हो जाती हैं।
पीतांबर को पत्तों में एंटीकैंसर के गुण
पीतांबर की पत्तियों से निकाले गए रस से कैंसर कोशिकाओं का नाश हो जाता है। पीतांबर में मौजूद फ्लेनोएड और केंमफेरोल कंपाउड के कारण कैंसर कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं।
पीतांबर के पत्तों से डिप्रेशन होगा दूर
पीतांबर के पत्ते डिप्रेशन दूर करने में मददगार हैं। पीतांबर के पत्तों के सेवन से शरीर में तेजी से फुर्ती आती है। जिस तरह डिप्रेशन की दवा फ्लूऑक्सीटाइन काम करती है। उससे कहीं ज्यादा तेजी से पीतांबर के पौधे से निकाले गए कंपाउड काम करते हैं।