दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार नोबेल प्राइज की शुरुआत 1901 में हुई थी और तब से लेकर अब तक यह पुरस्कार हर साल अलग-अलग क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान के लिए लोगों और संगठनों को दिया जाता है। इस साल के पुरस्कारों का ऐलान 2 अक्टूबर से 9 अक्टूबर के दौरान किया जाएगा। हम यहां नोबेल प्राइज और उससे जुड़ी 5 अहम बातों के बारे में जानकारी दे रहे हैं।
...जब अवॉर्ड लेने के लिए उपस्थित नहीं हो सके लोग
1901 से अब तक नोबेल शांति पुरस्कार पाने वाले 6 लोगों को पुरस्कार समारोह में जाने नहीं दिया गया। जर्मन पत्रकार और शांतिवादी कार्यकर्ता कार्ल वॉन ओस्सिएट्ज (Carl Von Ossietzky) को नाजी यातना शिविर में हिरासत में रखा गया था। सोवियत नेताओं ने 1975 में रूसी विद्रोही आंद्रेई सखारोव (Andrei Sakharov) को पुरस्कार ग्रहण करने के लिए ओस्लो जाने से रोक दिया था। पुरस्कार समारोह में आंद्रेई का प्रतिनिधित्व उनकी पत्नी येलेना बोनर (Yelena Bonner) ने किया था। पोलैंड के यूनियन लीडर लेच वालेसा (Lech Walesa) ने 1983 में ओस्लो का निमंत्रण अस्वीकार कर दिया था। म्यांमार की विपक्षी नेता आंग सान सू की (Aung San Suu Kyi) को जब 1991 में नोबेल पुरस्कार मिला, तो वह अपने घर में कैद थीं। 2010 में चीनी विद्रोही नेता लियू शाओबो (Liu Xiaobo) को जब नोबेल पुरस्कार दिया गया, तो वह जेल में थे। बेलारूस के मानवाधिकार कार्यकर्ता एलेस बियलात्स्की को 2022 को नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया, लेकिन जेल में रहने की वजह से पुरस्कार ग्रहण करने के लिए नहीं जा सके।
नोबेल फाउंडेशन ने 1974 में नियमों में बदलाव किया था, जिसके तहत नोबले पुरस्कार मरणोपरांत नहीं दिए जा सकते। इस बदलाव से पहले सिर्फ दो लोगों को मरणोपरांत नोबेल पुरस्कार मिला था। 1961 का नोबेल पुरस्कार संयुक्त राष्ट्र के तत्कालीन महासचिव और स्वीडन के निवासी डैग हम्मरएस्केजोल्ड (Dag Hammarskjold) को मिला था। हालांकि, इससे पहले ही 1961 में एक विमान दुर्घटना में उनकी मौत हो गई थी। 1931 में एक और स्वीडिश नागरिक एरिक एक्सेल कार्लफेल्ड्ट (Erik Axel Karlfeldt) को मरणोपरांत पुरस्कार दिया गया था। साल 2011 में कनाडा के राल्फ स्टेनमैन (Ralph Steinman) को मेडिसिन के क्षेत्र का नोबेल पुरस्कार दिया गया था, जबकि उनकी मौत पुरस्कार के ऐलान से तीन दिन पहले ही हो गई थी। हालांकि, फाउंडेशन ने उन्हें पुरस्कार देने का फैसला किया।
कम रही है महिलाओं की संख्या
पिछले कुछ दशकों में नोबेल पुरस्कारों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व शुरुआती दौर के मुकाबले बढ़ा है, लेकिन अब तक 60 महिलाओं को ही नोबल पुरस्कार मिले हैं, जो कुल विजेताओं का महज 6 प्रतिशत है। हालांकि, स्थितियां अब बेहतर हो रही हैं। साल 2000 के बाद से अब तक कुल 31 महिलाओं को पुरस्कार दिए जा चुके हैं, जो इससे पिछले दो दशकों की तुलना में तीन गुना ज्यादा है।
मैथ्स के लिए नहीं है पुरस्कार
इस बात को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है कि मैथ्स के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार क्यों नहीं दिया जाता है। ऐसी भी अफवाहें थीं कि नोबेल पुरस्कार के संस्थापक अल्फ्रेड नोबेल की प्रेमिका का मैथमटिशियन गोस्टा मिट्टाग-लेफलर (Gosta Mittag-Leffler) से प्रेम था। हालांकि, 1980 के दशक में शोधकर्ताओं ने इस अटकल पर विराम लगा दिया। शोधकर्ताओं के मुताबिक, मैथ्स के लिए पुरस्कार की वजह यह भी हो सकती है कि स्वीडन में मैथ्स के लिए पहले से ही प्राइज था, लिहाजा अल्फ्रेड नोबेल ने इसकी कोई जरूरत नहीं समझी।
नोबेल पुरस्कारों का ऐलान अक्टूबर के शुरू में हो जाता है, लेकिन पुरस्कारों का आयोजन हर साल 10 दिसंबर को ओस्लो और स्टॉकहोम में होता है, जो नोबेल पुरस्कार के संस्थापक अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि है। स्टॉकहोम में मेडिसिन, फिजिक्स, केमिस्ट्री, लिटरेचर और अर्थशास्त्र के विजेताओं को पुरस्कृत किया जाता है। पुरस्कार दिए जाने के बाद सिटी हॉल में तकरीबन 1,300 गेस्ट के लिए भोज का इंतजाम किया जाता है।