होली का त्योहार खुशियों और स्वादिष्ट पकवानों का संगम होता है, लेकिन इस मौके पर मिलावटखोर भी एक्टिव हो जाते हैं। खासतौर पर घी और मावा जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स में भारी मिलावट देखने को मिलती है। हाल ही में नोएडा में 10,000 लीटर से ज्यादा नकली घी बरामद किया गया, जो ये साबित करता है कि बाजार में मिलावटी सामान की भरमार है। नकली घी का सेवन सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है, जिससे पेट की समस्याओं से लेकर गंभीर बीमारियां तक हो सकती हैं। असली और नकली घी में फर्क करना मुश्किल जरूर है, लेकिन नामुमकिन नहीं।
कुछ आसान घरेलू तरीकों की मदद से आप इसकी शुद्धता परख सकते हैं और खुद को मिलावट के जाल में फंसने से बचा सकते हैं। तो अगर आप भी होली पर मिलावटी घी की चपेट में आने से बचना चाहते हैं, तो इन आसान तरीकों को जरूर अपनाएं।
नकली घी भी असली जैसा दिखता है!
मिलावटखोर इतनी चालाकी से नकली घी तैयार करते हैं कि ये देखने और सूंघने में असली जैसा ही लगता है। इसमें फ्लेवर और एसेंस मिलाया जाता है ताकि इसकी महक भी असली घी जैसी लगे। यही वजह है कि लोग आसानी से धोखा खा जाते हैं। लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि कुछ आसान टेस्ट से आप खुद ही असली और नकली घी की पहचान कर सकते हैं।
असली और नकली घी की पहचान कैसे करें?
थोड़ा सा घी अपनी हथेली पर लेकर रगड़ें। अगर ये आसानी से पिघलकर खुशबू देने लगे, तो घी असली है। नकली घी पिघलने में समय लेता है और उसमें अजीब सी गंध आ सकती है।
एक चम्मच घी में 2-3 बूंद आयोडीन टिंचर डालें। अगर घी में स्टार्च मिलाया गया है, तो इसका रंग नीला हो जाएगा। वहीं, असली घी में कोई बदलाव नहीं आएगा।
गुनगुने पानी में डालकर देखें:
एक गिलास गुनगुने पानी में थोड़ा सा घी डालें। असली घी पानी में ऊपर तैरने लगेगा और एक परत बना लेगा, जबकि नकली घी तुरंत घुलकर नीचे बैठ जाएगा।
एक चम्मच घी को गर्म करें। अगर ये तुरंत पिघलकर सुनहरे रंग का हो जाता है और अच्छी खुशबू आती है, तो ये असली घी है। वहीं, नकली घी में झाग बनने लगता है और इससे हल्की गंध आ सकती है।
नकली घी का सेवन पेट की बीमारियों के साथ-साथ दिल की समस्याएं भी पैदा कर सकता है। इसलिए, बाजार से घी खरीदते समय सतर्क रहें और ब्रांडेड और प्रमाणित कंपनियों का ही घी लें। साथ ही, अगर आपको घी की गुणवत्ता पर शक हो, तो इन घरेलू तरीकों से उसकी शुद्धता की जांच जरूर करें।