COVID की एंटीवायरल दवा Molnupiravir पर ICMR चीफ ने जताई चिंता, जानिए वजह

WHO और UK ने नेशनल ट्रीटमेंट गाइडलाइंस में Molnupiravir को शामिल नहीं किया है। अमेरिका में इस ड्रग को 1433 मरीजों पर टेस्ट करने के बाद मंजूरी दी गई है

अपडेटेड Jan 06, 2022 पर 9:06 AM
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Molnupiravir दवा गर्भ में पल रहे बच्चे पर डाल सकती है बुरा असर

इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (Indian Council for Medical Research -ICMR) के चीफ डॉ. बलराम भार्गव (Dr Balram Bhargava) ने कोरोना वायरस की एंटीवायरल दवा मोलनुपिरविर (Molnupiravir) की सेफ्टी के बारे में चिंता जताई है।

डॉ. भार्गव ने कहा कि इस दवा को कोरोना वायरस के इलाज के लिए नेशनल प्रोटोकॉल में शामिल नहीं किया गया है। इतना ही नहीं इस दवा को न तो विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation – WHO) और यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom) ने भी नेशनल ट्रीटमेंट में शामिल किया है।

मीडिया से बातचीत करते हुए डॉ भार्गव ने कहा, इस दवा की सुरक्षा को लेकर बड़ी चिंताएं हैं। यह दवा टेराटोजेनिसिटी और म्यूटेजेनेसिटी का कारण बन सकती है। टेराटोजेनिसिटी से मतलब है कि जब यह दवा कोई गर्भवती महिला लेती है तो इस दवा के प्रभाव से भ्रूण से जुड़े विकार या भ्रूण के विकास में समस्या आ सकती है। वहीं म्यूटेजेनेसिटी का अर्थ जेनेटिक मटेरियल में होने वाले स्थाई बदलावों से है।


पुरुष और महिलाओं दोनों के लिए दवा लेने के बाद 3 महीने तक गर्भ निरोधक उपाय बनाए रखना चाहिए। क्योंकि टेराटोजेनिक दवा के प्रभाव से जन्म हुए बच्चे में कई तरह की समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि इस दवा के इस्तेमाल से मांसपेशियों और हड्डियों की सुरक्षा समेत कई तरह की दिक्कतें आ सकती हैं। अमेरिका में इस दवा को 1433 मरीजों पर टेस्ट करने के बाद मंजूरी दी गई है।

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उन्होंने आगे बताया कि इस दवा के इस्तेमाल को लेकर पैनल में चर्चा हुई और बातचीत अब भी जारी है। इस दवा को लेकर हमारी चिंताएं हैं। स्तनपान (lactation) के समय इस दवा के इस्तेमाल से बच्चों में, सॉफ्ट टिश्यू इंजरी, प्रजनन से जुड़े विषय शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हम इस संभावना पर भी चर्चा करेंगे कि इस दवा को नेशनल ट्रीटमेंट गाइडलाइंस में शामिल किया जाना चाहिए।

इस दवा को भारत के ड्रग रेगुलेटर ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (Central Drugs Standard Control Organisation) ने 28 दिसंबर को इमरजेंसी में इस्तेमाल करने के लिए मंजूरी दी थी। भारत में इस दवा को सिप्ला, सन फार्मा और डॉ रेड्डी लैबोरेट्री बना रही हैं।

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