आज एक ऐसी दबंग लेडी अफसर की चर्चा कर रहे हैं ,जिन्हें कभी उन्हीं के पुलिस कर्मियों ने मौत के घाट उतारने की कोशिश की थी। महिला आज DIG रैंक की अफसर हैं। पुलिसकर्मी आज सजा सुनकर फूट-फूट कर रो रह हैं। दरअसल हम महिला आईपीएस अधिकारी कल्पना सक्सेना के बारे में चर्चा कर रहे हैं। IPS कल्पना सक्सेना को कार से कुचलने की कोशिश करने वाले तीन पुलिस कर्मियों को कोर्ट ने 10-10 साल की सजा सुनाई है। यह केस 15 साल तक चला। कोर्ट ने 8 सबूतों को बेहद अहम माना। टोटल 14 लोगों की गवाही हुई। इनमें 4 मुख्य गवाह थे। जिसमें खुद तत्कालीन SP कल्पना सक्सेना शामिल हैं।
सबसे अहम उस वक्त सिक्योरिटी गार्ड था, जिसे रवींद्र के भाई ने पूरी घटना कर बताकर गवाही बदलने को कहा था, लेकिन उसने कोर्ट में सच बोला। जिसके आधार पर एंटी कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। कल्पना सक्सेना मौजूदा समय में गाजियाबाद में एडिशनल कमिश्नर हैं। घटना दो सितंबर 2010 को शाहजहांपुर रोड स्थित मजार के निकट कैंट थाना क्षेत्र में हुई थी।
पुलिसकर्मियों ने 200 मीटर तक कार से घसीटा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कल्पना सक्सेना साल 2010 में बरेली में एसपी यातायात (SP Traffic) के पद पर तैनात थीं। उन्हें पता चला कि उनके कुछ सिपाही ट्रक वालों से अवैध वसूली करते हैं। लिहाजा 2 सितंबर 2010 को जब वह बरेली के कैंट थाना क्षेत्र में, बरेली-शाहजहांपुर रोड के पास मजार के पास पहुंच गई। वहां उन्होंने पुलिसवालों को रंगे हाथ ट्रक वालों से अवैध वसूली करते हुए पकड़ लिया। ऐसे में सिपाही रवींद्र, मनोज और एक अन्य धर्मेंद्र ने उन्हें कार से कुचलकर मारने की कोशिश की। उन्हें 200 मीटर तक कार से घसीटा भी गया। उनके सिर पर भी हमला किया गया। यहां तक कि पुलिसवाले कहते रहे कि ‘आज तेरा आखिरी दिन है।’ जब वे एसपी कल्पना सक्सेना को नहीं मार सके तो उन्हें धक्का देकर भाग गए। इस घटना ने देश भर के प्रशासनिक अमले को हिला कर रख दिया था।
पुलिसकर्मियों पर दर्ज हुई थी FIR
अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद कल्पना सक्सेना ने FIR दर्ज कराई थी। पुलिस ने धारा-307 के तहत मुकदमा किया था। उस वक्त IPS ने कहा था- 'वे (पुलिसकर्मी) मुझे अच्छी तरह से जानते थे। उन्होंने जानबूझकर मुझे घसीटा था। मैसेज देना चाहते थे कि उन्हें अपने वरिष्ठ अफसरों का डर नहीं है।'
पुलिस ने 2010 में एक चार्जशीट लगाई। जिसके बाद तीन सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया। बाद में विभागीय जांच हुई। जांच में दोषी पाए जाने पर तीनों पुलिसकर्मियों को 2014 में बर्खास्त कर दिया गया। कोर्ट में कुल 14 गवाह और 22 साक्ष्य पेश किए गए, जिसे सुनने के बाद अब कोर्ट ने चारों को सजा सुनाई।
उत्तर प्रदेश पुलिस में 16 साल की नौकरी के बाद, कल्पना सक्सेना का प्रमोशन साल 2010 में आईपीएस के पद पर हो गया। बरेली में उनकी पहली पोस्टिंग एसपी ट्रैफिक के पद पर हुई। इसके बाद वह कई अलग-अलग जगहों पर रहीं। अब वह डीआईजी (DIG) रैंक की अधिकारी हैं। 30 जनवरी 2024 को उन्हें एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस, गाजियाबाद नियुक्त किया गया। पुलिस विभाग में बेहतरीन सेवाओं के लिए उन्हें कई अवॉर्ड्स भी मिल चुके हैं।
UP के मेरठ की हैं कल्पना सक्सेना
कल्पना सक्सेना मूल रूप से मेरठ की रहने वाली हैं। यूपी पुलिस की वेबसाइट uppolice.gov.in के मुताबिक, 21 अप्रैल 1968 में उनका जन्म हुआ था। कल्पना सक्सेना ने जियोग्राफी से एमए तक की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने यूपीपीएससी पीसीएस परीक्षा (UPPSC PCS Exam) पास की और उनका चयन 1994 में पीपीएस अधिकारी के रूप में हुआ। 16 जनवरी 1994 को उनकी नियुक्ति हुई थी।