ISRO: इसरो ने अपना 100वां मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया है। बुधवार को श्रीहरिकोटा से जीएसएलवी रॉकेट के जरिए एक नया नेविगेशन सैटेलाइट लॉन्च किया गया। यह सैटेलाइट भारत और उसके आसपास के क्षेत्र में NavIC (नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन) प्रणाली के तहत बेहतर नेविगेशन सेवाएं प्रदान करेगा। यह सैटेलाइट 2025 का पहला मिशन है और भारत को नेविगेशन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस मिशन को इसरो प्रमुख वी. नारायणन के नेतृत्व में लॉन्च किया गया जिन्होंने हाल ही में इसरो का कार्यभार संभाला।
ये सैटेलाइट किसानों को खेती में सही जानकारी वाहनों की ट्रैकिंग, समुद्र और हवा में मार्गदर्शन, और आपातकालीन सेवाओं में मदद करेगा। इसके अलावा यह सैटेलाइट मोबाइल फोन और अन्य उपकरणों के लिए लोकेशन सेवाएं भी उपलब्ध कराएगा। इस मिशन से भारत की अंतरिक्ष तकनीकी क्षमता में और भी वृद्धि होगी।
ये सैटेलाइट श्रीहरिकोटा से GASLV रॉकेट की मदद से लॉन्च किया गया। 27.30 घंटे की उलटी गिनती (काउंटडाउन) के बाद रॉकेट सुबह 6:23 बजे रवाना हुआ और करीब 19 मिनट बाद सैटेलाइट को उसकी कक्षा में स्थापित कर दिया गया।
नए इसरो प्रमुख के लिए खास मिशन
13 जनवरी को इसरो प्रमुख बने वी. नारायणन के लिए यह पहला मिशन था। इससे पहले 30 दिसंबर 2024 को इसरो ने 99वां मिशन पूरा किया था जिसमें अंतरिक्ष में दो यानों को जोड़ने का सफल प्रयोग हुआ था।
ये सैटेलाइट भारत के NavIC (नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन) सिस्टम का हिस्सा है। यह अमेरिकी GPS की तरह ही काम करेगा और भारत के साथ 1500 किलोमीटर के आसपास के क्षेत्र में भी सटीक नेविगेशन सेवाएं देगा। इससे पहले मई 2023 में NavIC का पहला सैटेलाइट लॉन्च हुआ था।
सटीक नेविगेशन सेवाएं – जमीन, हवा और समुद्र में रास्ता दिखाएगा।
कृषि में मदद – किसानों को मौसम और खेती की सही जानकारी मिलेगी।
वाहनों और जहाजों की ट्रैकिंग – गाड़ियों और जहाजों की लोकेशन पर नजर रखेगा।
मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग – स्मार्टफोन में बेहतर GPS सुविधा देगा।
आपातकालीन सेवाएं – दुर्घटना और अन्य आपात स्थितियों में काम आएगा।
NavIC सिस्टम में कुल 5 सैटेलाइट होंगे – NVS-01 से NVS-05 तक। इस सैटेलाइट को बेंगलुरु के यू. आर. राव सैटेलाइट सेंटर में तैयार किया गया है और इसका वजन 2,250 किलोग्राम है। इसमें एक खास ट्राई-बैंड एंटीना भी लगाया गया है जिससे यह ज्यादा सटीक डेटा भेज सकेगा।
इसरो का 100वां मिशन भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इससे भारत की अंतरिक्ष ताकत बढ़ेगी और देश नेविगेशन के मामले में आत्मनिर्भर बनेगा। यह मिशन विज्ञान, रक्षा और संचार क्षेत्र में भारत की मजबूत स्थिति को दिखाता है।