Get App

Janmashtami 2023:  जानिए जन्माष्टमी में खीरे का महत्व, क्यों इसके बिना अधूरा है त्योहार

Janmashtami 2023: इस साल जन्माष्टमी के लिए अष्टमी तिथि अर्द्धरात्रि में और दूसरे दिन भी है। उसके साथ ही पहले दिन रोहिणी नक्षत्र है। ऐसे में जन्माष्टमी पहले दिन मनाई जाएगी। अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम के अनुसार इस बार 7 सितंबर को कृष्ण जन्माष्टमी रहेगी। इसके अलावा इस दिन खीरे की महत्वता और माता देवकी से इसका संबंध के बारे में भी जानना जरूरी है।

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 05, 2023 पर 9:29 AM
Janmashtami 2023:  जानिए जन्माष्टमी में खीरे का महत्व, क्यों इसके बिना अधूरा है त्योहार
इस साल जन्माष्टमी 6 सितंबर 2023 को बुधवार के दिन मनाना बिलकुल सही है।

Janmashtami 2023: इस साल कृष्ण जन्मोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं के बीच काफी ज्यादा कनफ्यूजन है। दुविधा है कि जन्माष्टमी किस दिन है और जन्माष्टमी का व्रत और पारण किस दिन रखें? कुछ कैलेंडर्स के मुताबिक जन्माष्टमी 6 सितंबर को है और कुछ के मुताबिक जन्माष्टमी 7 सितंबर को है। अगर आप भी हर साल धूमधाम से जन्माष्टमी मनाते हैं और इस दिन व्रत रखते हैं तो आइए आपको इस साल इस खास सेलिब्रेशन के शुभ मुहूर्त के बारे में बताते हैं। इसके साथ ही लोग अकसर खीरे के महत्व को लेकर भी कनफ्यूज रहते हैं। आखिर कृष्ण जन्मोत्सव खीरे के बिना क्यों है अधूरा-

जन्माष्टमी की सही तारीख

ज्योतिष आचार्यों के मुताबिक मथुरा में जन्माष्टमी भाद्रपद के महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को अर्द्धरात्रि व्याप्ति में मनाते हैं। इस साल जन्माष्टमी 6 सितंबर 2023 को बुधवार के दिन मनाना बिलकुल सही है। शास्त्रों के मुताबिक जन्माष्टमी स्मार्त और वैष्णव तरीके से मनाई जाती है। ऐसे में आप जन्माष्टमी का व्रत किस दिन रखेंगे, चलिए आपको डिटेल में बताते हैं।

जन्माष्टमी का व्रत रखने का सही समय

इस साल जन्माष्टमी के लिए अष्टमी तिथि अर्द्धरात्रि में और दूसरे दिन भी है। उसके साथ ही पहले दिन रोहिणी नक्षत्र है। ऐसे में जन्माष्टमी पहले दिन मनाई जाएगी। इस वर्ष भाद्रपद कृष्ण अष्टमी 6 सितंबर रात 03:37 से 7 सितंबर को शाम 04:14 तक है और रोहिणी नक्षत्र 6 सितंबर को सुबह 09:20 से 7 सितंबर को सुबह 10:25 तक है। इस साल 6 सितंबर को अष्टमी तिथि अर्द्धरात्रि में रोहिणी नक्षत्र के साथ है और अगले दिन अष्टमी अर्द्धरात्रि और रोहिणी नक्षत्र वाली नहीं हैइस वजह से 6 सितंबर को ही जन्माष्टमी मनाना सही है। 6 सितंबर को जन्माष्टमी पूजा का मुहूर्त रात 11:57 से सुबह 12:42 तक है। व्रत का पारण समय 7 सितंबर को सुबह 06:02 से है।

खीरे का मां देवकी से संबंध

जन्माष्टमी के दिन खीरे को उसके तने से काटकर अलग किया जाता है। इसे श्री कृष्ण का माता देवकी से अलग होने का प्रतीक माना गया है। कई जगहों पर खीरा काटने की प्रक्रिया को जन्माष्टमी के दिन नल छेदन भी कहा जाता है। जन्म के समय जैसे बच्चों की गर्भनाल काट कर उन्हें गर्भाशय से अलग किया जाता है। वैसे ही श्री कृष्ण जन्मोत्सव के मौके पर खीरे के डंठल को काटकर कान्हा के जन्म को दिखाने की परंपरा है।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें