Kartavya Path Inaugration: PM मोदी ने सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा और कर्तव्य पथ का किया उद्घाटन, बोले- हमेशा के लिए मिट गया गुलामी का प्रतीक
Kartavya Path Inaugration: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने कर्तव्य पथ का उद्घाटन करने के बाद, कहा, ‘राजपथ का राज ब्रिटिश राज’ के लिए था
MoneyControl News
अपडेटेड Sep 08, 2022 पर 11:09 PM
PM मोदी ने सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा का किया उद्घाटन
Kartavya Path Inaugration: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने गुरुवार को इंडिया गेट (India Gate) पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा (Netaji Subhas Chandra Bose Statue) का अनावरण किया। उन्होंने नए नाम वाले कर्तव्य पथ (Kartavya Path) का भी उद्घाटन किया। कर्तव्य पथ राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक एक सेक्शन है। इसमें चारों ओर हरियाली के साथ लाल ग्रेनाइट पैदल मार्ग, नहरें, अलग-अलग राज्यों के फूड स्टॉल, नए सर्विस ब्लॉक और वेंडिंग कियोस्क होंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने कर्तव्य पथ का उद्घाटन करने के बाद, कहा, ‘राजपथ का राज ब्रिटिश राज’ के लिए था। इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 28 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण करने के बाद, मोदी ने कहा, "अगर भारत सुभाष चंद्र बोस के दिखाए मार्ग को फॉलो करता, तो देश एक नई ऊंचाई पर पहुंच जाता। दुख की बात है कि उसे भुला दिया गया।"
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "उपनिवेशवाद का प्रतीक 'किंग्सवे' एक इतिहास होगा। इसे हमेशा के लिए मिटा दिया गया है। कर्तव्य पथ के रूप में एक नए युग की शुरुआत हुई है। उपनिवेशवाद के एक और प्रतीक को हटाने पर मैं देश के सभी लोगों को बधाई देता हूं।"
बोस की प्रतिमा उसी जगह पर स्थापित की गई है, जहां इस साल की शुरुआत में पराक्रम दिवस (23 जनवरी) के अवसर पर नेताजी की होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण किया गया था। इस होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण नेताजी की 125वीं जयंती के अवसर पर किया गया था।
यह पहला प्रोजेक्ट है, जो मोदी सरकार की 13,450 करोड़ रुपए की महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना के तहत पूरी हुई है।
‘देश की सत्ता का गलियारा’ कहे जाने वाले सेंट्रल विस्टा के पुनर्विकास की प्रोजेक्ट के तहत एक नए त्रिकोणीय संसद भवन, एक कॉमन केंद्रीय सचिवालय, तीन किलोमीटर लंबे राजपथ का पुनर्विकास, प्रधानमंत्री के नए निवास और कार्यालय और उपराष्ट्रपति के लिए नए एन्क्लेव की परिकल्पना की गई है।
प्रतिमा का अनावरण आजाद हिंद फौज के पारंपरिक गीत ‘कदम, कदम बढ़ाए जा’ की धुन के साथ किया गया। एक भारत-श्रेष्ठ भारत और अनेकता में एकता की भावना को प्रदर्शित करने के लिए देश के कोने-कोने से आए 500 कलाकारों ने एक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया।
प्रतिमा का अनावरण करने के बाद प्रधानमंत्री ने नेताजी को पुष्पांजलि भी अर्पित की।
अधिकारियों के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने सेंट्रल विस्टा एवेन्यू के पुनर्विकास कार्य में शामिल मजदूरों से बातचीत भी की और उनसे कहा कि उन्हें गणतंत्र दिवस परेड में आमंत्रित किया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने इस परियोजना से जुड़े कुछ अलग-अलग पहलुओं का अवलोकन भी किया।
बोस की प्रतिमा की खासियत
करीब 26,000 घंटे के अथक कलात्मक प्रयासों से अखंड ग्रेनाइट को तराश कर 65 मीट्रिक टन वजन की इस प्रतिमा को तैयार किया गया है। काले रंग के ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित 28 फुट ऊंची यह प्रतिमा इंडिया गेट के पास एक छतरी के नीचे स्थापित की गई है।
नेताजी की इस प्रतिमा को पारंपरिक तकनीकों और आधुनिक औजारों का उपयोग कर पूरी तरह हाथों से बनाया गया है। अरुण योगीराज के नेतृत्व में मूर्तिकारों के एक दल ने यह प्रतिमा तैयार की है।
यह प्रतिमा भारत की विशालतम, सजीव, पत्थर पर हाथ से बनी प्रतिमाओं में से एक है। ग्रेनाइट के इस पत्थर को तेलंगाना के खम्मम से 1665 किलोमीटर दूर नई दिल्ली तक लाने के लिए 100 फुट लंबा 140 पहियों वाला एक ट्रक विशेष तौर पर तैयार किया गया था।
प्रतिमा के अनावरण के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, जी किशन रेड्डी, धर्मेंद्र प्रधान, मीनाक्षी लेखी सहित कई केंद्रीय मंत्री, भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जे पी नड्डा और कई देशों के राजनयिक भी मौजूद थे।