कनाडा में भारतीय छात्रों को पैसे का लालच देकर भड़का रहे हैं खालिस्तानी आतंकी, भारतीय उच्चायुक्त का सनसनीखेज खुलासा

India Canada Row: ओटावा से वापस बुलाए गए भारत के उच्चायुक्त संजय वर्मा ने इस बात का खुलासा किया है कि कनाडा में खालिस्तानी आतंकवादी कैसे काम करते हैं और भारतीय छात्रों की अपनी गैंग में किस तरह से भर्ती करते हैं। उन्होंने भारतीय माता-पिता को चेतावनी दी है कि वे उन पर नजर रखें

अपडेटेड Oct 25, 2024 पर 11:35 AM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
India Canada Row: ओटावा से वापस बुलाए गए भारतीय उच्चायुक्त ने बताया कि खालिस्तानी आतंकवादी भारतीय छात्रों को पैसे का लालच देकर प्रभावित कर रहे हैं

India Canada Row: कनाडा के व्यवहार को अत्यंत घटिया बताते हुए ओटावा से वापस बुलाए गए भारत के उच्चायुक्त संजय वर्मा ने कहा है कि ऐसे देश ने, जिसे हम मित्रवत लोकतांत्रिक देश मानते हैं, भारत की पीठ में छुरा घोंपा और सर्वाधिक गैर-पेशेवर रवैया अपनाया। संजय वर्मा ने गुरुवार (24 अक्टूबर) को इस बात का खुलासा किया कि कनाडा में खालिस्तानी आतंकवादी कैसे काम करते हैं और भारतीय छात्रों की अपनी गैंग में किस तरह से भर्ती करते हैं। उन्होंने माता-पिता को चेतावनी दी कि वे उन पर नजर रखें और उन्हें "गलत विकल्पों" से दूर रखें। NDTV के साथ एक इंटरव्यू में संजय वर्मा ने कहा कि खालिस्तानी आतंकवादी आमतौर पर कनाडा में भारतीय छात्रों को स्थिर पैसे का लालच देकर लुभाते हैं।

संजय वर्मा ने आगे कहा कि कनाडा में भारतीय छात्रों को अपने आस-पास के बारे में जागरूक रहना चाहिए। उन्हें खालिस्तानी आतंकवादियों और चरमपंथियों द्वारा कट्टरपंथीकरण के प्रयासों का विरोध करना चाहिए। उन्होंने कनाडा में रहने वाले छात्रों के माता-पिता से आग्रह किया कि वे "कृपया उनसे नियमित रूप से बात करें और उनकी स्थिति को समझने की कोशिश करें"।

गैंग में कैसे करते हैं भर्ती?


यह बताते हुए कि ये आतंकवादी भारतीय छात्रों की अपने गैंग में भर्ती कैसे करते हैं, भारतीय दूत ने NDTV को बताया, "यह (खालिस्तानी आतंकवादियों का कनाडा में भारतीय छात्रों तक पहुंचना) कैसे काम करता है... उस अर्थव्यवस्था की स्थिति को देखते हुए, वहां नौकरियाँ बहुत कम हैं... इसलिए छात्रों को पैसे और भोजन की पेशकश की जाती है। इस तरह खालिस्तानी आतंकवादी और चरमपंथी उन्हें नापाक योजनाओं के साथ प्रभावित करते हैं।" उन्होंने कहा कि फिर इन छात्रों को कनाडा में भारतीय राजनयिक भवनों के बाहर विरोध प्रदर्शन करते हुए तस्वीरें और वीडियो सबूत लेने के लिए राजी किया जाता है। आमतौर पर भारत विरोधी नारे लगाते हैं और तिरंगे का अपमान करते हैं।

उन्होंने कहा, "फिर उनसे कहा जाता है कि वे शरण मांग लें... क्योंकि उनका कहना होगा कि 'अगर मैं अब भारत वापस गया, तो मुझे दंडित किया जाएगा...। ऐसे छात्रों को शरण (कनाडा में) दिए जाने के मामले भी सामने आए हैं।" संजय वर्मा ने भारतीय अभिभावकों से कनाडा में अपने बच्चों पर नजर रखने की अपील करते हुए कहा कि देश में सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियां सक्रिय हैं। यह भारतीय छात्रों को गलत दिशा में धकेल रही हैं।

कनाडा के लिए वोटबैंक हैं कट्टरपंथी

उन्होंने से कहा कि मुट्ठीभर खालिस्तान समर्थकों ने इस विचारधारा को एक आपराधिक उपक्रम बना दिया है जो मानव तस्करी और हथियार तस्करी जैसी अनेक गतिविधियों में लिप्त हैं। इस सबके बावजूद कनाडा के अधिकारियों ने आंखें मूंद रखी हैं क्योंकि ऐसे कट्टरपंथी स्थानीय नेताओं के लिए वोट बैंक होते हैं। कनाडा ने अपने नागरिक और भारत द्वारा खालिस्तानी आतंकवादी घोषित किए गए हरदीप सिंह निज्जर की जून 2023 में हत्या के मामले में कहा था कि वर्मा इस मामले में जांच के तहत निगरानी की श्रेणी में हैं।

इस मामले में कनाडा आगे कोई कार्रवाई करता, उससे पहले भारत ने वर्मा और पांच अन्य राजनयिकों को वहां से वापस बुला लिया। क्या उन्होंने अपने 36 साल के राजनयिक कॅरियर में कभी इस तरह का कुछ देखा है, इस सवाल पर वर्मा ने पीटीआई से कहा, "यह अत्यंत घटिया बात है। यह द्विपक्षीय संबंधों के प्रति सर्वाधिक गैर-पेशेवर रवैया है। अगर वे मानते हैं कि यह उनके लिए भी एक व्यापक रिश्ता है तो राजनयिक के पास अन्य कूटनीतिक साधन होते हैं। चीजों का संतोषजनक समाधान निकालने के लिए इन साधनों का इस्तेमाल किया जा सकता था।"

बुधवार को पीटीआई से बातचीत करते हुए वर्मा ने कनाडा में खालिस्तानी आंदोलन, स्थानीय नेताओं से राजनीतिक लाभ के लिए खालिस्तान समर्थकों को मिल रही सहायता और खालिस्तानियों की आपराधिक गतिविधियों आदि के बारे में विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, "जो बच्चा सबसे ज्यादा रोता है, मां सबसे पहले उसका पेट भरती है। इसी तरह, उन लोगों (खालिस्तान समर्थकों) की संख्या मुट्ठीभर ही है, लेकिन वे सबसे ज्यादा चिल्लाते हैं और कनाडा के नेताओं का उन पर सबसे अधिक ध्यान जाता है।"

वर्मा ने कहा कि कनाडा में घोर कट्टरपंथी खालिस्तानियों की संख्या महज करीब 10,000 है। करीब आठ लाख की सिख आबादी में उनके समर्थकों की संख्या संभवत: एक लाख है। उन्होंने कहा, "वे समर्थन हासिल करने के लिए वहां आम सिखों को धमकाते हैं जिसमें इस तरह की धमकियां शामिल हैं कि 'हमें पता है कि तुम्हारी बेटी कहां पढ़ रही है।'"

ये भी पढ़ें- India-China LAC Agreement: सीमा पर भारत-चीन के बीच तनाव कम करने की कोशिशें शुरू, टकराव वाले प्वाइंट से अस्थायी टेंट हटाए गए

वर्मा ने कहा, "खालिस्तानियों ने कनाडा में खालिस्तान को एक कारोबार बना लिया है। खालिस्तान के नाम पर वे मानव तस्करी करते हैं, ड्रग्स की तस्करी करते हैं, हथियारों की तस्करी करते हैं और ऐसे सारे काम करते हैं। वे इससे बहुत धन जुटाते हैं और गुरुद्वारों के माध्यम से भी पैसा जुटाते हैं तथा इसका कुछ हिस्सा अपने सभी घृणित कृत्यों में खर्च करते हैं।" उन्होंने कहा, "वो सारी घटिया चीजें जिनके बारे में आप सोच सकते हैं, वे उनमें संलिप्त हैं।"

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।