Lumpy Skin Disease: क्या है लंपी वायरस, जिससे 67,000 से अधिक मवेशियों की हो चुकी है मौत, यहां जानें सबकुछ

लंपी वायरस एक संक्रामक वायरल बीमारी है जो मवेशियों को प्रभावित करती है। यह जानलेवा वायरल बुखार, त्वचा पर गांठ का कारण बनती है और इससे जानवरों की मौत भी हो सकती है

अपडेटेड Sep 12, 2022 पर 9:45 PM
अधिकांश मामले वाले क्षेत्रों में मवेशियों का वैक्सीनेशन करने के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास किए जा रहे हैं

केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा कि देश भर में जुलाई में ढेलेदार त्वचा रोग या लंपी वायरस  (Lumpy Virus)के फैलने के बाद से अब तक 67,000 से अधिक मवेशियों की मौत हो गई है। एक बयान में कहा गया है कि आठ से अधिक राज्यों में बीमारी के अधिकांश मामले वाले क्षेत्रों में मवेशियों का वैक्सीनेशन करने के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास किए जा रहे हैं।

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा से बात करते हुए पशुपालन और डेयरी विभाग के सचिव जतिंद्र नाथ स्वैन ने कहा कि इस बीमारी से प्रभावित विभिन्न राज्य मौजूदा वक्त में मवेशियों में ढेलेदार त्वचा रोग (Lumpy Skin Disease- LSD) को नियंत्रित करने के लिए 'बकरी के चेचक' के वैक्सीन का उपयोग कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान निकाय आईसीएआर के दो संस्थानों द्वारा विकसित एलएसडी के लिए एक नए वैक्सीन 'लंपी-प्रोवैकइंड (Lumpi-ProVacInd)' की व्यावसायिक पेशकश में आगे ‘3-4 महीने’ का समय लगेगा।


राजस्थान सबसे अधिक प्रभावित

लंपी वायरस मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में फैल गया है। आंध्र प्रदेश और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में कुछ छिटपुट मामले हैं। जतिंद्र नाथ स्वैन ने पीटीआई से कहा, ‘राजस्थान में प्रतिदिन मरने वालों मवेशियों की संख्या 600-700 है। लेकिन अन्य राज्यों में यह संख्या एक दिन में 100 से भी कम है।’ उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने राज्यों से वैक्सीनेशन प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा है।

वैक्सीन तैयार, 100% प्रभावी

स्वैन के अनुसार, बकरी चेचक का वैक्सीन 100 फीसदी प्रभावी है और पहले से ही 1.5 करोड़ डोज प्रभावित राज्यों में दी जा चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि देश में बकरी पॉक्स के वैक्सीन की पर्याप्त आपूर्ति है। दो कंपनियां इस वैक्सीन का निर्माण कर रही हैं और उनके पास एक महीने में वैक्सीन की चार करोड़ डोज बनाने की क्षमता है। कुल मवेशियों की आबादी लगभग 20 करोड़ है। उन्होंने कहा कि अब तक 1.5 करोड़ बकरी पॉक्स की डोज दी जा चुकी है।

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उन्होंने कहा कि जहां कोई मामला सामने नहीं आया है, वहां बकरी पॉक्स के वैक्सीन की केवल एक मिली की डोज एलएसडी से लड़ने में मदद करने के लिए पर्याप्त है, जहां इस रोग का प्रकोप फैला हुआ है वहां मवेशियों को तीन मिलीलीटर की डोज दी जा सकती है।

नए वैक्सीन के संबंध में, स्वैन ने कहा कि 'लंपी-प्रोवैकइंड' को व्यावसायिक रूप से उतारने में तीन-चार महीने का समय लगेगा। उन्होंने कहा कि निर्माताओं को नए वैक्सीन के व्यावसायिक उत्पादन के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से अनुमति लेनी होगी। कमर्शियल प्रोडक्शन पेशकश करने में 3-4 महीने का समय लगेगा।

दूध उत्पादन भी प्रभावित

दूध उत्पादन पर एलएसडी के प्रभाव के बारे में गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF) के मैनेजिंग डायरेक्टर आर एस सोढ़ी ने कहा कि गुजरात में दूध उत्पादन 0.5 फीसदी मामूली रूप से प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि वैक्सीनेशन प्रक्रिया से गुजरात में स्थिति नियंत्रण में है। सोढ़ी ने कहा कि अन्य राज्यों में प्रभाव थोड़ा अधिक हो सकता है।

उन्होंने कहा कि अमूल सहित संगठित दूध उत्पादकों की खरीद साल भर पहले की तुलना में कम हुई है। लेकिन इसके लिए एलएसडी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। पिछले साल के विपरीत, असंगठित खिलाड़ी, मिठाई निर्माता और होटल आक्रामक रूप से दूध की खरीद कर रहे हैं। मदर डेयरी के मैनेजिंग मनीष बंदलिश ने कहा कि समग्र योजना में उत्पादन पर मामूली असर पड़ा है।

क्या है ढेलेदार त्वचा रोग?

लंपी वायरस ने जुलाई 2019 में भारत, बांग्लादेश और चीन में दस्तक दिया था। यह एक संक्रामक वायरल बीमारी है जो मवेशियों को प्रभावित करती है। यह जानलेवा वायरल बुखार, त्वचा पर गांठ का कारण बनती है और इससे जानवरों की मौत भी हो सकती है।

यह रोग मच्छरों, मक्खियों, जुओं और ततैयों द्वारा मवेशियों के सीधे संपर्क में आने और दूषित भोजन और पानी के माध्यम से फैलता है। 19वीं पशुधन जनगणना के अनुसार, दुनिया के सबसे बड़े दूध उत्पादक देश भारत में साल 2019 में मवेशियों की आबादी 19.25 करोड़ की थी।

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