हफ्ते में 5 दिन काम करने का सिस्टम शुरू होने को लेकर निराश हुए थे नारायणमूर्ति

इंफोसिस के को-फाउंडर नारायण मूर्ति ने एक बार दोहराया है कि उनका वर्क-लाइफ बैलेंस में भरोसा नहीं है। उन्होंने हफ्ते में पांच दिन काम करने के कॉन्सेप्ट को लेकर भी अपनी निराशा जाहिर की। सीएनबीसी ग्लोबल लीडरशिप समिट में नारायणमूर्ति ने कहा, ' मैं वर्क लाइफ बैलेंस में यकीन नहीं रखता।' उन्होंने यह भी कहा कि वह अपनी राय पर कायम रहेंगे और मरते दम तक इसमें बदलाव नहीं करेंगे।

अपडेटेड Nov 15, 2024 पर 6:47 PM
इंफोसिस के को-फाउंडर नारायण मूर्ति ने एक बार दोहराया है कि उनका वर्क-लाइफ बैलेंस में भरोसा नहीं है।

इंफोसिस के को-फाउंडर नारायण मूर्ति ने एक बार दोहराया है कि उनका वर्क-लाइफ बैलेंस में भरोसा नहीं है। उन्होंने हफ्ते में पांच दिन काम करने के कॉन्सेप्ट को लेकर भी अपनी निराशा जाहिर की। सीएनबीसी ग्लोबल लीडरशिप समिट में नारायणमूर्ति ने कहा, ' मैं वर्क लाइफ बैलेंस में यकीन नहीं रखता।' उन्होंने यह भी कहा कि वह अपनी राय पर कायम रहेंगे और मरते दम तक इसमें बदलाव नहीं करेंगे।

भारत में वर्क लाइफ बैलेंस को लेकर अपनी राय के बारे में पूछे जाने पर नारायणमूर्ति ने बताया कि जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के इंडिपेंडेंट डायरेक्टर और नॉन-एग्जिक्यूटिव चेयरमैन केवी कामत ने एक बार कहा था कि भारत गरीब और विकासशील देश है, लिहाजा हमें वर्क-लाइफ बैलेंस पर फोकस करने के बजाय चुनौतियों से निपटने पर फोकस करना चाहिए।

उन्होंने कहा, 'मैं वाकई में उस वक्त काफी निराश हुआ था, जब 1986 में हमने हफ्ते में 6 दिन के बजाय 5 दिन काम करने का फैसला किया था। इंफोसिस के फाउंडर का कहना था, 'जब पीएम मोदी हर हफ्ते 100 घंटे काम कर रहे हैं, तो हमारे आसपास जो चीजें हो रही हैं, उसको लेकर सकारात्मकता दिखाने का एकमात्र जरिया हमारा काम है।'


मूर्ति का कहना था, ' भारत में कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं है। अगर आप स्मार्ट हैं, तो भी आपको काफी मेहनत करनी होगी। मुझे इस बात का काफी गर्व है कि मैंने पूरी जिंदगी कड़ी मेहनत की है। लिहाजा, मैं मरते दम तक अपनी राय नहीं बदलूंगा।' उनका यह भी कहना था कि भारत का विकास आराम के बजाय त्याग और परिश्रम पर निर्भर करता है और बिना कठिन परिश्रम के देश के लिए अपने ग्लोबल प्रतिद्वंद्वियों से मुकाबला करना मुश्किल होगा।

अपने काम के घंटों के बारे में नारायणमूर्ति ने बताया कि वह रोजाना 14 घंटे और हफ्ते में साढ़े छह दिन काम करते थे। मूर्ति ने कहा कि वह सुबह 6.30 बजे ऑफिस पहुंच जाते थे और रात के 8.30 बजे के बाद निकलते थे। इससे पहले मूर्ति ने कहा था कि भारतीयों को हर हफ्ते 70 घंटे काम करने की जरूरत है। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर बहस छिड़ गई थी।

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