Navratri 2023 Day 4: चौथे दिन होती है मां कूष्मांडा की पूजा, कई रोगों से मिलती है मुक्ति, जानिए कैसे करें पूजा

Navratri 2023 Day 4: शारदीय नवरात्रि का आज चौथा दिन और इस दिन मां कूष्मांडा की पूजा होती है। मां की आठ भुजाएं हैं। इसलिए ये अष्टभुजा देवी के नाम से भी जानी जाती हैं। संस्कृत भाषा में कूष्माण्ड कुम्हड़े को कहते हैं। इन्हें कुम्हड़ा विशेष रूप से प्रिय है। कूष्‍मांडा देवी को आदिशक्ति मां का अवतार माना गया है

अपडेटेड Oct 18, 2023 पर 11:59 AM
Navratri 2023 Day 4: मान्‍यता है कि मां कूष्‍मांडा की पूजा करने से आपकी हर मनोकामना पूर्ण होती है।

Navratri 2023 Day 4: नवरात्रि के चौथे दिन देवी के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। देवी मां कूष्मांडा आदिशक्ति का वह स्वरूप हैं। जिनकी मंद मुस्कान से इस सृष्टि ने सांस लेना आरंभ किया है। देवी कूष्मांडा का निवास स्थान सूर्यमंडल के बीच में माना जाता है। देवी का तेज ही इस संसार को तेज बल और प्रकाश प्रदान करता है। देवी कूष्मांडा मूल प्रकृति और आदिशक्ति हैं। मां कुष्माण्डा का स्वरुप बहुत ही पावन है। मां की आठ भुजाएं हैं। इसलिए मां कूष्माण्डा अष्टभुजा के नाम से भी जानी जाती हैं। इनके आठ हाथों में कमण्डल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प अमृतपूर्ण कलश, चक्र, गदा और माला है। मां कूष्माण्डा का वाहन सिंह है।

इनकी पूजा करने से बड़ी से बड़ी बीमारियों से मुक्ति मिलती है। मां दुर्गा का यह स्वरूप अपने भक्त को आर्थिक ऊंचाईयों पर ले जाने में निरन्तर सहयोग करने वाला है। मां कूष्मांडा के आशीर्वाद से आर्थिक स्थितियां मजबूत होती हैं। साथ ही घर से दरिद्रता दूर होती है।

कूष्मांडा का अर्थ


देवी मां कूष्मामा का नाम दो शब्दों से लिया हरया है। कू- जिसका मतलब होता है थोड़ा। उष्मा जिसका अर्थ है गर्मी और अंडा जिसका अर्थ है ब्रह्मांड। देवी ने अपनी मंद मुस्‍कान से ब्रह्मांड की उत्‍पन्‍न किया था। इसलिए इनका नाम कुष्‍मांडा पड़ा। माना जाता है जब सृष्टि के आरंभ से पहले चारों तरफ सिर्फ अंधेरा था। ऐसे में मां ने अपनी हल्‍की सी हंसी से पूरे ब्रह्मांड की रचना की। वह सूरज के घेरे में रहती हैं और उन्‍हीं के अंदर इतनी शक्ति है कि वह सूरज की तपिश को सह सकती हैं। माता अपने भक्त की हर चाहत को पूरी करती हैं और भोग एवं मोक्ष प्रदान करती हैं।

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देवी कुष्मांडा की पूजा विधि

नवरात्र के चौथे दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और हरे वस्त्र धारण करके मां कुष्मांडा का ध्यान, पूजन करें। पूजा के दौरान मां कुष्मांडा को हरी इलाइची, सौंफ या कुम्हड़ा अर्पित करें। इसके बाद उनके मुख्य मंत्र "ॐ कुष्मांडा देव्यै नमः" का 108 बार जाप करें। आप चाहें तो सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं। नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा को मालपुए का भोग लगाना चाहिए। इसे स्वयं भी ग्रहण करें और दूसरों को भी प्रसाद के रूप में बांटें।

मां कुष्‍मांडा की आरती

कूष्मांडा जय जग सुखदानी।

मुझ पर दया करो महारानी॥

पिगंला ज्वालामुखी निराली।

शाकंबरी माँ भोली भाली॥

लाखों नाम निराले तेरे ।

भक्त कई मतवाले तेरे॥

भीमा पर्वत पर है डेरा।

स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥

सबकी सुनती हो जगदंबे।

सुख पहुँचती हो माँ अंबे॥

तेरे दर्शन का मैं प्यासा।

पूर्ण कर दो मेरी आशा॥

माँ के मन में ममता भारी।

क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥

तेरे दर पर किया है डेरा।

दूर करो माँ संकट मेरा॥

मेरे कारज पूरे कर दो।

मेरे तुम भंडारे भर दो॥

तेरा दास तुझे ही ध्याए।

भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥

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