Work week debate: कॉरपोरेट वर्ल्ड में काम के घंटों को लेकर बहस एक बार फिर शुरू हो गई है। इस बार इसे छेड़ने वाले शख्स हैं भारत के जी20 शेरपा और नीति आयोग के पूर्व CEO अमिताभ कांत। कांत ने बिजनेस स्टैंडर्ड के एक ईवेंट में काम के घंटों को लेकर अपनी राय रखी और कहा कि वर्क-लाइफ बैलेंस की आड़ में कड़ी मेहनत न करना 'फैशनेबल' नहीं होना चाहिए। देश को कड़ी मेहनत करनी चाहिए, फिर चाहे वह सप्ताह में 80 घंटे की हो या 90 घंटे की।
27 फरवरी को बिजनेस स्टैंडर्ड द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए अमिताभ कांत ने कहा, "वर्क-लाइफ बैलेंस के नाम पर युवा पीढ़ी को यह न बताएं कि उन्हें कड़ी मेहनत करने की जरूरत नहीं है। हम सभी युवा पीढ़ी को गलत संदेश दे रहे हैं कि हम कड़ी मेहनत किए बिना भी आगे बढ़ सकते हैं।" कांत ने कहा, "यदि आपकी महत्वाकांक्षा 4 ट्रिलियन डॉलर से 30 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की अर्थव्यवस्था बनने की है, तो आप इसे एंटरटेनमेंट और किसी फिल्म स्टार के विचारों के बेसिस पर नहीं कर सकते।"
'कड़ी मेहनत के बिना कोई भी देश महान नहीं बन सकता'
हालांकि कांत ने काम से इतर जीवन के विचार को पूरी तरह से खारिज नहीं किया। उन्होंने बताया कि वह गोल्फ खेलने के साथ-साथ हर दिन लगभग 90 मिनट फिजिकल एक्सरसाइज करते हैं। कांत ने कहा, "मैं कई अन्य चीजें भी करता हूं। आप कड़ी मेहनत करके भी ऐसा कर सकते हैं। 1-1/2 घंटे अलग रहें। आपके पास अभी भी 22-1/2 घंटे हैं। आप सो सकते हैं और फिर भी कड़ी मेहनत कर सकते हैं। वर्क-लाइफ का भरपूर बैलेंस है।"
पहले एनआर नारायण मूर्ति और एसएन सुब्रह्मण्यन ने छेड़ा था मुद्दा
पिछले साल, इंफोसिस के को-फाउंडर एनआर नारायण मूर्ति ने सप्ताह में 70 घंटे काम करने की वकालत की थी। अक्टूबर 2024 में नारायण मूर्ति ने कहा कि भारत के युवाओं को देश की प्रोडक्टिविटी में सुधार के लिए हर हफ्ते 70 घंटे काम करना चाहिए। इसके बाद वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर पूरे देश में बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने इसे सही ठहराया तो कुछ लोगों ने इसे पुरानी सोच और कर्मचारी के लिए नुकसानदायक बताया।
इसके बाद इस साल जनवरी में एलएंडटी के चेयरमैन एसएन सुब्रह्मण्यन ने कर्मचारियों को प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए सप्ताह में 90 घंटे काम करने और यहां तक कि रविवार को भी काम करने का सुझाव दिया। इसके बाद एक बार फिर काम के घंटों को लेकर बहस छिड़ गई।