Sambhal News: संभल का अमृत सरोवर निकला शंख माधव तीर्थ, अब बनेगा भव्य पर्यटन स्थल

Sambhal: संभल में अमृत सरोवर के रूप में विकसित किया जा रहा तालाब ऐतिहासिक शंख माधव तीर्थ निकला। इसके सौंदर्यीकरण के लिए 38 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। प्रशासन ने अब तक 41 तीर्थ व 19 कूपों की पहचान की है। चंदौसी में प्राचीन बावड़ी, मकसूदनपुर में शिवलिंग मिला, और मस्जिद हिंसा में सीओ पर आरोप लगा है

अपडेटेड Feb 06, 2025 पर 12:43 PM
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संभल के प्राचीन तीर्थ और कूपों की खोज जारी

संभल में स्थित एक प्राचीन तालाब, जिसे अमृत सरोवर के रूप में विकसित किया जा रहा था, ऐतिहासिक शंख माधव तीर्थ निकला। यह जानकारी नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी डॉ. मणिभूषण तिवारी ने दी, उन्होंने बताया कि इस तीर्थ का उल्लेख ऐतिहासिक ग्रंथों में मिलता है। पहले इसे आम जलाशय माना जाता था, लेकिन 2022 में इसे संरक्षित कर सरोवर का दर्जा देने का निर्णय लिया गया। इसके सौंदर्यीकरण के लिए 38 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है, जिसके अंतर्गत लाल पत्थर से सीढ़ियां, प्रकाश व्यवस्था, फर्श और बैठने की सुविधा विकसित की जाएगी। संभल के धार्मिक स्थलों में महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस तीर्थ का धार्मिक महत्व भी है।

मान्यता है कि यहां स्नान करने से व्यक्ति धनी होता है और भगवान विष्णु की प्रसन्नता के लिए शंख दान करना शुभ माना जाता है। सौंदर्यीकरण के बाद यह स्थल श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा।

38 लाख रुपये से होगा सरोवर का सौंदर्यीकरण


सरकार द्वारा जारी 38 लाख रुपये के बजट से इस तीर्थस्थल का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। इसमें लाल पत्थर से कुंड की सीढ़ियां बनाई जाएंगी और बाहरी क्षेत्र में प्रकाश, फर्श और बैठने की उचित व्यवस्था की जाएगी। चामुंडा मंदिर के सामने स्थित इस तालाब को पहले आम जलाशय माना जाता था, लेकिन 2022 में इसे सरोवर का दर्जा देने के लिए बजट स्वीकृत किया गया था।

संभल के प्राचीन तीर्थ और कूपों की खोज जारी

संभल जिले में मौजूद 68 प्राचीन तीर्थ और 19 कूपों में से प्रशासन अब तक 41 तीर्थ और सभी 19 कूपों की पहचान कर चुका है। इनमें से कई तीर्थ विलुप्ति की कगार पर थे। पालिका प्रशासन के अनुसार, ऐतिहासिक "शंभल दर्शन" ग्रंथ में इस तीर्थ को श्वेत माधव तीर्थ के नाम से भी जाना जाता है।

शंख माधव तीर्थ का धार्मिक महत्व

यह तीर्थ संभल के हल्लू सराय क्षेत्र में चामुंडा मंदिर से पूर्व दिशा में स्थित है। मान्यता है कि इस कुंड में स्नान करने से व्यक्ति धन-धान्य से संपन्न होता है। यहां मार्गशीर्ष शुल्क सप्तमी व पंचमी को विशेष स्नान का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा, भगवान विष्णु की प्रसन्न करने के लिए शंख दान करने की भी परंपरा है।

चंदौसी में बावड़ी को ढकने का कार्य तेजी से जारी

चंदौसी में एक पुरानी भूमिगत दो-मंजिला बावड़ी की खोज के बाद उसे बरसात से बचाने के लिए वाटरप्रूफ टेंट से ढकने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। इसके लिए बांस-बल्लियों से 400 वर्गमीटर क्षेत्र में ढांचा तैयार किया जा रहा है, जिसमें बरेली से आए कारीगर कार्यरत हैं। 21 दिसंबर को प्रशासन ने खाली प्लॉट की खुदाई करवाई थी, जिसमें यह प्राचीन बावड़ी सामने आई। हालांकि, गैस रिसाव के कारण खुदाई कार्य रोक दिया गया है।

मकसूदनपुर में मिला शिवलिंग

गांव मकसूदनपुर में महावा नदी के किनारे अचानक जमीन से पानी निकलने पर एक शिवलिंगनुमा पत्थर मिला। इसे देखकर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी और भजन-कीर्तन व प्रसाद वितरण शुरू हो गया। ग्रामीणों का मानना है कि यह स्थान भगवान शिव का निवास है। श्रद्धालुओं ने परिक्रमा भी शुरू कर दी है और इसका वीडियो इंटरनेट मीडिया पर साझा किया गया है।

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