Saurabh Maurya : महामारी के दौरान, कुछ ही छात्र ऐसे थे जिन्होंने उस दौर को स्किल सीखने के लिए इस्तेमाल किया। कुछ ने बचे समय में अपना बिजनेस शुरू कर दिया। IIT-BHU के स्टूडेंट सौरभ मौर्या (Saurabh Maurya) ने भी उस समय को ऐसे ही इस्तेमाल किया और इंजीनियरिंग के तीसरे साल में वह दो सफल स्टार्टअप खड़े कर चुके थे। एक समय तो उन्हें लगा कि स्टॉक मार्केट पैसा कमाने के लिए सबसे अच्छी जगह है। लेकिन शुरुआत में नुकसान उठाने के बाद उन्होंने मार्केट की पहेली को सुलझाने में कामयाबी हासिल की। 23 वर्षीय सौरभ आज एक सफल स्टार्टअप आंत्रप्रेन्योर, ट्रेडर और यूट्यूबर बन चुके हैं। वह अपने फॉलोअर्स को कमाई कराने के लिए अक्सर यूट्यूब पर लाइव आकर ट्रेड करते हैं। मनीकंट्रोल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने अपने सफर से जुड़ी कई दिलचस्प बातें साझा कीं।
मौर्य उत्तर प्रदेश के जौनपुर के ग्राम रसिकपुर के रहने वाले हैं। मकान के रूप में एक झोपड़ी थी और पिता एक घड़ी की रिपेयर की दुकान से खर्च चलाते थे। आईआईटी का एंट्रेंस निकालने में कामयाबी मिली और 2022 में माइनिंग इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल कर चुके हैं।
महामारी के दौर में ऑनलाइन पढ़ाई होती थी। सौरभ ने उस दौर को दो स्टार्टअप रैंकर्स कंसल्टेंसी और रैंकर्स एजुकेशन शुरू करने के लिए इस्तेमाल किया। इसके जरिये वह ऑनलाइन और ऑफलाइन क्लास दिया करते थे। रैंकर्स कंसल्टैंसी IIT JEE और NEET की तैयारी कराती थी। वहीं Rankers Consultancy लोन, स्किल एजुकेशन और लाइफ काउंसलिंग जैसे काम करती थी। उनकी कंपनियों ने पहले साल से ही कमाई शुरू कर दी थी।
स्टॉक मार्केट रोज हो रहा था नुकसान
इसके बाद उन्हें स्टॉक मार्केट कमाई की सबसे अच्छी जगह लगी। लेकिन शुरुआत में मार्केट की कोई जानकारी नहीं थी। इस बीच मैंने ऑप्शंस हाथ आजमाया।
आप्शंस में मिले अनुभव पर मौर्या ने कहा, शुरुआती दौर खासा चैलेजिंग रहा। मुझे जानकारियों की कमी के कारण रोज नुकसान हो रहा था। मैं दूसरों के टिप्स पर ट्रेड कर रहा था। मेरा घाटा बढ़ता गया। मुझे सब्जेक्ट को समझने की जरूरत महसूस हुई। फिर मैंने तीन महीने का ब्रेक लिया और इसे समझने की पूरी कोशिश की।
उन्होंने कहा, मैंने कई किताबें पढ़ीं, कई वीडियो देखे, कुछ कोर्स किए और आखिर में मैं अपनी स्ट्रैटजी के साथ मार्केट में उतरा। उन्होंने कहा, मैं पहले जिन ट्रेडर्स की स्ट्रैटजीस को अपनाता था वह अक्सर कारगर नहीं होती थी। मैंने गतिशील रणनीति पर काम किया।
उन्होंने कहा, मेरे लिए ऑप्शंस दक्षता का खेल (Game of Efficiency) है। इसमें पिछले दो दिन के बायर्स और सेलर्स के व्यवहार का आकलन किया जाता है। अगर पिछले दिन की तुलना में 50 फीसदी से ज्यादा बायर्स बाजार में टिके रहते हैं तो मैं तेजी पर दांव लगाऊंगा और इससे उलट स्थिति में, नीचे की तरफ।
एक्सपायरी के दिन क्या हो रणनीति
मेरे पास एक्सपायरी दिनों के लिए ऑप्शन सेलिंग की रणनीति है। यहां मैं कई आउट-ऑफ-द-मनी (OTM) स्ट्राइक प्राइस ऑप्शन बेचता हूं, जिनके शून्य पर जाने की संभावना अधिक होती है। ट्रेडिंग के आखिरी घंटे में अचानक उछाल भी देखने को मिल सकती है, जिसे गामा ब्लास्ट (Gamma Blast) के रूप में जाना जाता है, इसमें सभी प्रॉफिट खत्म हो जाता है, लेकिन लंबी अवधि में यह पैसा बनाता है। इसकी वजह यह है कि बाजार 70 प्रतिशत समय साइडवेज है और 30 प्रतिशत ट्रेंड कर रहा है।
मैं 20-22 रुपये के प्रीमियम के साथ कॉल और पुट ऑप्शन चुनता हूं और 4-5 रुपये के ऑप्शन खरीदकर हेच करता हूं। मेरा स्टॉप लॉस जुटाए गए प्रीमियम पर 2.5 गुना होता है। जब भी अंत में बड़ा मूव आता है, एक तरफ का स्टॉपलॉस हिट करता है, लेकिन दूसरी तरफ का जीरो हो जाएगा। यदि डेटा शॉर्ट कवरिंग के चलते Gamma Blast की ज्यादा संभावना दिखाते हैं तो मैं हेज पोजिशन को एडजस्ट करूंगा। एक्सपायरी डे पर मैं समय गुजरने के साथ पोजिशन को एडजस्ट करता रहता हूं और पूरा डिसीप्लिन बनाकर रखता हूं।
हालांकि, नए लोगों को सलाह है कि यहां रातोंरात सफलता नहीं मिलती। लगातार सीखकर ही आप सफलता हासिल कर सकते हैं। सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है।
डिस्क्लेमरः यहां दिए जाने वाले विचार और निवेश सलाह निवेश विशेषज्ञों के अपने निजी विचार और राय होते हैं। Moneycontrol यूजर्स को सलाह देता है कि वह कोई निवेश निर्णय लेने के पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।