UP के खूंखार गैंगस्टरों का कौन कर रहा है खात्मा? अतीक और अशरफ के बाद जीवा की हत्या से उठे कई सवाल

दो महीने से भी कम समय पहले पत्रकारों के भेष में आए तीन हत्यारों ने प्रयागराज में अस्पताल के गेट पर माफिया से नेता बने अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या करने के लिए इसी तरीके का इस्तेमाल किया था। दोनों ही मामलों में अब तक उत्तर प्रदेश पुलिस हत्यारों के किसी स्पष्ट मकसद का पता नहीं लगा पाई है, जो किसी भी प्रतिद्वंद्वी गैंग से जुड़े नहीं पाए गए हैं

अपडेटेड Jun 08, 2023 पर 12:58 PM
गैंगस्टर जीवा की लखनऊ अदालत परिसर के भीतर हत्या करने का आरोपी विजय यादव जौनपुर में रहता है

गैंगस्टर संजीव माहेश्वरी जीवा (Sanjeev Maheshwari Jeeva) की बुधवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ कोर्ट रूम के भीतर सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना के तुरंत बाद अदालत परिसर पहुंचे लखनऊ के पुलिस कमिश्नर एसबी शिरोडकर ने बताया कि लखनऊ जेल में बंद संजीव माहेश्वरी जीवा को एक मामले में सुनवाई के लिए अदालत लाया गया था, जहां अज्ञात हमलावरों द्वारा गोली मारकर उसकी हत्या कर दी गई। उन्होंने बताया कि हमलावर वकील की ड्रेस पहनकर आए थे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुख्यात गैंगस्टर जीवा को माफिया मुख्तार अंसारी गैंग का सदस्य माना जाता था।

जीवा भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक नेता की हत्या का आरोपी था। संजीव जीवा के हत्यारे को पता था कि लखनऊ कोर्ट परिसर में वकीलों की तलाशी नहीं ली जाएगी। इसलिए उसने एक पिस्तौल ले जाने के लिए वकीलों के कपड़े पहने और खूंखार गैंगस्टर को कोर्ट रूम के अंदर गोली मार दी।

अतीक-अशरफ और अब जीवा


दो महीने से भी कम समय पहले पत्रकारों के भेष में आए तीन हत्यारों ने प्रयागराज में अस्पताल के गेट पर माफिया से नेता बने अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या करने के लिए इसी तरीके का इस्तेमाल किया था। दोनों ही मामलों में अब तक उत्तर प्रदेश पुलिस हत्यारों के किसी स्पष्ट मकसद का पता नहीं लगा पाई है, जो किसी भी प्रतिद्वंद्वी गैंग से जुड़े नहीं पाए गए हैं। जीवा जेल में बंद गैंगस्टर मुख्तार अंसारी का खूंखार शूटर था। अब सवाल उठ रहा है कि यूपी में गैंगस्टर और माफिया आखिरकार किसके निशाने हैं? किसके कहने पर और क्यों बारी बारी से गैंगस्टर्स और माफियाओं को टारगेट किया जा रहा है। ऐसा इसलिए कि जीवा की हत्या से इसी पैटर्न पर माफिया डॉन अतीक अहमद और अशरफ की हत्या कर दी गई थी।

तीनों हत्याकांड के बाद उठे सवाल

तीनों माफियाओं की हत्या के बाद यूपी पुलिस पर तमाम तरह के सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर यूपी के खूंखार गैंगस्टरों की हत्या कौन कर रहा है और क्या ये कॉन्ट्रैक्ट किलिंग हैं जिनके आदेश कहीं और से आए थे? अतीक-अशरफ मामले में हमलावरों ने पकड़े जाने के बाद दावा किया था कि उन्होंने "प्रसिद्ध" होने के लिए अहमद ब्रदर्स को मार डाला, लेकिन अप्रैल में हत्याओं के लिए उन्हें पिस्तौल कैसे मिली यह अभी भी स्पष्ट नहीं है।

पुलिस को पता चला है कि जीवा मामले में हमलावर विजय यादव पिछले एक महीने से अपने परिवार के संपर्क में नहीं था। बता दें कि अतीक के कुछ हत्यारों की भी ऐसी ही कहानी है, जो अपने परिवारों के संपर्क में नहीं थे। विजय यादव का कोई गंभीर आपराधिक इतिहास नहीं है और पुलिस को अब तक जीवा से किसी तरह की निजी रंजिश की जानकारी नहीं है। हालांकि वह जौनपुर से ताल्लुक रखता है जिसका गैंगवार का इतिहास रहा है। उसने मुंबई में भी कुछ साल बिताए हैं।

नाबालिग से दुष्कर्म समेत दो अन्य आपराधिक मामले दर्ज

जीवा की लखनऊ अदालत परिसर के भीतर हत्या करने का आरोपी विजय यादव जौनपुर के केराकत कोतवाली क्षेत्र में रहता है और उसके खिलाफ एक नाबालिग लड़की का अपरहण कर उससे दुष्कर्म करने समेत दो आपराधिक मामले पहले से दर्ज हैं। जीवा की हत्या के बाद 24 वर्षीय विजय की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही केराकत के पुलिस क्षेत्राधिकारी गौरव शर्मा समेत थाने की पुलिस विजय के सर्की सुल्तानपुर गांव पहुंची और लोगों से उसके आपराधिक इतिहास के बारे में पूछताछ की।

गौरव शर्मा ने पीटीआई को बताया कि विजय लखनऊ में प्लंबर का काम करता था। वह एक शादी में शामिल होने 10 मई को अपने गांव आया था और अगले दिन लखनऊ वापस लौट गया था। क्षेत्राधिकारी ने बताया कि यादव के खिलाफ दो आपराधिक मामले पहले से दर्ज हैं। उन्होंने बताया कि एक मामला एक नाबालिग लड़की का कथित रूप से अपहरण करने और उससे दुष्कर्म से संबंधित है। इस संबंध में आजमगढ़ के देवगांव पुलिस थाने में मामला दर्ज है।

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अधिकारी ने बताया कि विजय के खिलाफ 2016 में दर्ज इस FIR में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) कानून के तहत भी आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि विजय के खिलाफ दूसरा मामला सरकारी काम में बाधा पहुंचाने के आरोपों से जुड़ा है, जो 2020 में केराकत पुलिस थाने में दर्ज किया गया था। विजय यादव के पिता श्यामा यादव ने बताया कि उसका बेटा मुंबई में एक निजी कंपनी में काम करता था। बाद में वह नौकरी छोड़कर घर चला आया। श्यामा ने बताया कि नौकरी छोड़ने के डेढ़ महीने बाद विजय रोजगार की तलाश में लखनऊ चला गया था जहां वह प्लंबर का काम करता था।

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