ब्रिटेन में ब्रेक्जिट (Brexit) पर चल रही खींचतान और अनिश्चितता को दूर करने के लिए गुरुवार को आम चुनाव हुए हैं। ऐसा पांच सालों में तीसरी बार है, जब यूनाइटेड किंगडम की जनता वोट डाल रही है। यूरोपियन यूनियन से अलग होने के मुद्दे पर 2016 में हुए रेफरेंडम के बाद से देश की राजनीति धीमी हो चुकी है। इस जनमत संग्रह में अधिकतर लोगों ने यूनियन छोड़ने के पक्ष में वोट दिया था। तबसे ब्रेक्जिट पर कोई डील नहीं हो पाई है। इस बार के चुनावों को एक पीढ़ी का सबसे अहम चुनाव कहा जा रहा है।
ब्रिटेन की संसद के निचले सदन हाउस ऑफ कॉमंस में 650 सीटों के लिए इस साल 3,322 उम्मीदवार चुनाव में खड़े हुए हैं। इंग्लैंड, वेल्स, स्कॉटलैंड और नॉर्दर्न आयरलैंड के सभी निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान केंद्रों पर वोटिंग अंतरराष्ट्रीय समयानुसार सुबह सात बजे शुरू हो गए थे। इसी समयानुसार रात 10 बजे वोटिंग खत्म होगी, जिसके तुरंत बाद काउंटिंग शुरू हो जाएगी। संभावना है कि शुक्रवार सुबह तक नतीजे घोषित हो जाएंगे।
अगर हाउस ऑफ कॉमंस में किसी पार्टी के आधे सांसद (326) चुनकर आते हैं तो वही पार्टी आमतौर पर सरकार बनाती है। अगर किसी भी पार्टी के पास बहुमत नहीं है तो वह एक या दो अन्य दलों के अधिकतर सांसदों का गठबंधन बनाकर सरकार बना सकती है।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन अपनी पार्टी के ब्रेक्जिट डील पूरी हो के संदेश पर जोर दे रहे हैं, वहीं विपक्षी दल अंतिम ब्रेक्जिट डील पर फिर से जनमत संग्रह कराना चाहते हैं और वे घरेलू मुद्दों जैसे कि संकट से जूझ रही सरकारी National Health Service (NHS) के मुद्दे पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
बता दें कि 31 अक्टूबर की अंतिम समयसीमा तक ब्रेक्जिट लागू करने में नाकाम रहने के बाद जॉनसन ने 12 दिसंबर को चुनाव कराने की घोषणा कर दी थी।