Amul Butter Supply: दिल्ली-एनसीआर में ज्यादातर लोग अमूल और मदर डेयरी के मक्खन की कमी को झेल रहे हैं। कंपनियों के मुताबिक दिसंबर तक मक्खन की कमी को पूरा करने के लिए अमूल और मदर डेयरी मक्खन का प्रोडक्शन बढ़ा रहे हैं। अमूल ब्रांड के मालिक गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF) के एमडी आर एस सोढ़ी ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि अगले 10-15 दिनों में सभी स्थानों पर सप्लाई सामान्य हो जाएगी। वहीं, मदर डेयरी के अधिकारी के मुताबिक प्रोडक्शन में तेजी आई है और जल्द ही सप्लाई सामान्य होगी।
इन कारणों से मक्खन की सप्लाई पर पड़ा असर
देश भर में मक्खन की सप्लाई पर असर दूध की सप्लाई में गिरावट होने से नजर आ रहा है। जुलाई-अक्टूबर सीजन में मक्खन की डिमांड अधिक रहती है लेकिन इस दौरान दूध की सप्लाई कम रही है। इंडस्ट्री के मुताबिक दूध की सप्लाई में कमी के कई कारण रहे। इसमें पहला कारण मवेशियों में गांठदार स्किन जैसी बीमारी रही। इसके अलावा चारा महंगा होना और किसानों के डेयरी कारोबार छोड़ने के कारण कमी दूध सप्लाई में हुई है।
होटल, केटरिंग इंडस्ट्री पर भी पड़ा असर
मवेशियों पर गांठदार त्वचा रोग का असर काफी गंभीर रहा। यह रोग पशु को काफी कमजोर कर देता है और दूध की मात्रा और क्वालिटी पर असर डालता है। एक्सपर्ट के मुताबिक बीमारी और अन्य कारकों के कारण कम दूध सप्लाई ने इस साल संगठित क्षेत्र की दूध खरीद पर असर डाला है। अनुमानों के मुताबिक एक साल पहले के स्तर से जुलाई-अक्टूबर के दौरान दूध की खरीद में 6 फीसदी की गिरावट आई है। यही कारण रहा कि प्रमुख डेरी प्रोडक्ट उत्पादकों ने मक्खन जैसे प्रोडक्ट पर फोकस करने की जगह दूध की सप्लाई को बनाए रखने पर ज्यादा फोकस किया। होटल, रेस्तरां और केटरिंग और घरेलू सेक्टर में मक्खन की सप्लाई प्रभावित हुई है।
देश में इतना बड़ा है मक्खन का बाजार
CRISIL मार्केट इंटेलिजेंस एंड एनालिटिक्स में रिसर्च के निदेशक पुषन शर्मा के अनुसार मक्खन और घी बाजार भारत के खाद्य बाजार में 26,500 करोड़ रुपये का है। इस सेगमेंट ने सितंबर में भारी कमी का सामना करना शुरू कर दिया और त्योहारी सीजन दीवाली और दशहरा के दौरान ये कमी अपने पीक पर पहुंच गई। इसका सामना ग्राहक अभी भी कर रहे हैं। भारत में महीने में औसतन 5,00,000 टन मक्खन की जरूरत होती है।