Uttarakhand Rains: उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के बीच हर्षिल-चितकुल ट्रेक मार्ग (Harsil-Chitkul Trek Route) पर हिमस्खलन में लापता हुए 11 ट्रेकर्स में से सात शुक्रवार को मृत पाए गए। तलाशी और बचाव दल को उनके शव 5,000 मीटर की ऊंचाई पर मिले। News18 के मुताबिक, दो ट्रेकर्स अभी भी लापता हैं और दो को बचा लिया गया है।

उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने शनिवार को बताया कि लमखागा दर्रे के पास लापता हुए 11 ट्रेकर्स के एक अन्य ग्रुप के पांच और शवों को भी बरामद कर लिया गया है। जिन ट्रेकर्स को बचाया गया है उनमें बंगाल का 32 वर्षीय मिथुन दारी भी शामिल है। दारी का फिलहाल हर्षिल आर्मी अस्पताल में इलाज चल रहा है। 

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किन्नौर के उपायुक्त आबिद हुसैन सादिक ने कहा कि चार ट्रैकर अब भी लापता हैं, जबकि दो को बचा लिया गया है। उन्होंने बताया कि ट्रैकर दल पड़ोसी राज्य उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित हर्षिल से किन्नौर जिला स्थित छितकुल के लिए 11 अक्टूबर को निकला था, लेकिन वह खराब मौसम के कारण लामखागा दर्रे में 17 से 19 अक्टूबर के बीच लापता हो गया।

यह दर्रा सबसे दुर्गम दर्रों में से एक है, जो किन्नौर जिले को हर्षिल से जोड़ता है। उपायुक्त ने बताया कि बचाव दल ने पांच ट्रैकर के शवों को विभिन्न स्थानों पर बर्फ के नीचे दबा हुआ पाया। शवों को एक स्थान पर एकत्र किया गया और उन्हें शुक्रवार को हेलीकॉप्टर से उत्तरकाशी भेजा गया। उन्होंने बताया कि दो ट्रैकर को बचा लिया गया लेकिन उनमें से एक की हालत बहुत नाजुक बताई जा रही है।

उन्होंने बताया कि थल सेना, भारत तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और किन्नौर पुलिस लापता ट्रैकर का पता लगाने के लिए एक संयुक्त अभियान चला रही है। ट्रैकर दल ने उत्तरकाशी वन विभाग से इनर लाइन परमिट लिया था।

दल के सदस्यों की पहचान दिल्ली की अनीता रावत (38), कोलकाता के मिथुन दारी (31), तन्मय तिवारी (30), विकास मकल (33), सौरभ घोष (34), सवियन दास (28), रिचर्ड मंडल (30) और सुकेन मांझी (43) के रूप में की गई है। दल के साथ मौजूद रसोई कर्मियों की पहचान देवेंद्र (37), ज्ञान चंद्र (33) और उपेंद्र (32) के रूप में की गई है तथा वे तीनों उत्तरकाशी स्थित पुरोला से हैं।

उत्तराखंड सरकार ने समुद्र तल से 20,000 फुट की ऊंचाई पर स्थित लामखागा दर्रे से इस दल के लापता हो जाने के बारे में हिमाचल प्रदेश सरकार को सूचना दी थी। उपायुक्त ने बताया कि यह सूचना मिलने के बाद आईटीबीपी और सेना के अधिकारियों से संपर्क किया गया तथा बलों ने गुरुवार सुबह बचाव अभियान शुरू किया।

बता दें कि उत्तराखंड में रविवार रात से करीब तीन दिनों तक लगातार भारी बारिश हुई। उत्तराखंड में भारी बारिश के बाद आई आपदा में मरने वालों की संख्या 68 हो गई है जबकि 24 अन्य लोग घायल हैं।

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