Uttarkashi Tunnel Rescue: पिछले 16 दिनों से उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग (Silkyara Tunnel) में फंसे मजदूर (Trapped Workers) अब जल्द ही बाहर आने वाले हैं। अधिकारी मंगलवार को एक बड़ी सफलता के करीब पहुंच गए हैं। जहां एक तरफ इन 41 जिंदगियों को बचाने के लिए सभी तैयारियां चल रही हैं, तो वही अधिकारी भी उनके बाहर आने के बाद उचित देखभाल भी सुनिश्चित कर रहे हैं। जरूरत के मुताबिक, इन मजदूरों को संभवत: देहरादून या जिला अस्पताल ले जाया जाएगा।
News18 के बाद इस पूरे मामले से जुड़े एक अधिकारी ने बताया, “रेस्क्यू के बाद की देखभाल उतनी ही जरूरी है, जितना कि रेस्क्यू ऑपरेशन। मजदूरों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाया जाएगा। इसके लिए, उनके स्वास्थ्य और स्थिति के आधार पर हवाई और सड़क परिवहन की व्यवस्था की गई है।”
हर एक मजदूर के लिए एक एंबुलेंस
एक अधिकारी ने कहा, “डॉक्टरों की एक टीम घटना स्थल पर है। 41 एम्बुलेंस हैं, हर एक वर्कर के लिए एक एंबुलेंस, और अगर किसी को तत्काल अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ती है, तो उसके लिए दो हेलीकॉप्टर भी हैं। इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर वायु सेना भी शामिल होगी।
उन्होंने आगे कहा, "किसी भी मेडिकल इमरजेंसी के मामले में मजदूरों को एयरलिफ्ट करने के लिए चिन्यालीसौड़ में एक चिनूक हेलीकॉप्टर भी तैनात किया गया है।"
इसके अलावा 41 मजदूरों के इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चिन्यालीसौड़ में तैयारियां पूरी हो गई हैं। सिल्क्यारा से लगभग 30 Km दूर चिन्यालीसौड़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 41 ऑक्सीजन सपोर्ट बेड वाला एक अलग वार्ड तैयार किया गया है।
न केवल शारीरिक देखभाल बल्कि अधिकारी मजदूरों को मेंटल केयर भी देने के लिए तैयार हैं। अधिकारी ने आगे कहा कि बंद जगह में इतने लंबे समय तक फंसे रहने के कारण श्रमिकों को मनोवैज्ञानिक आघात (psychological trauma) का भी सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा, “मनोचिकित्सक पिछले कुछ दिनों से सुरंग में फंसे मजदूरों के संपर्क में हैं। बचाव के बाद उनकी अच्छे तरीके से काउंसलिंग भी की जाएगी।”
12 नवंबर में निर्माणधीन सिलक्यारा-बड़कोट सुरंगा का एक हिस्सा अचानक से ढह गया था, जिसमें ये 41 मजदूर सुरंग के भीतर ही फंस गए। सिल्कयारा से बरकोट तक सुरंग में सिल्कयारा की ओर 60 मीटर की दूरी में मलबा गिरने से सुरंग ढह गई थी।
जिस जगह ये मजदूर फंसे थे, उसकी ऊंचाई 8.5 मीटर और लंबाई 2 Km है। वो सुरंग का निर्मित हिस्सा है और अच्छी बात ये है कि वहां तक बिजली और पानी की सप्लाई भी मौजूद थी।
पिछले हफ्ते, अधिकारी ताजा पका हुआ खाना उन तक भेजने और मजदूरों के साथ वीडियो कम्युनिकेशन करने में भी कामयाब रहे। इससे पहले वे केवल पैक्ड फूड आइटम ही उनके पास तक भेज पा रहे थे।