WFI President Suspended: 'पूर्व पदाधिकारियों का कंट्रोल, अध्यक्ष कर रहे मनमानी’ खेल मंत्रालय ने इस आधार पर रद्द की कुश्ती महासंघ की मान्यता
WFI President Suspended: WFI प्रमुख संजय सिंह (Sanjay Singh) ने हाल ही में घोषणा की थी, अंडर-15 (U-15) और अंडर-20 (U-20) के नेशनल चैंपियनशिप इस साल उत्तर प्रदेश के गोंडा में खेली जाएगी। बता दें गोंडा बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) का गृह क्षेत्र है। खेल मंत्रालय का तर्क है कि WFI ने उचित प्रकिया का पालन नहीं किया
WFI President Suspended: खेल मंत्रालय ने इस आधार पर रद्द की कुश्ती महासंघ की मान्यता
WFI President Suspended: भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के नवनिर्वाचित अध्यक्ष संजय सिंह (Sanjay Singh) को खेल मंत्रालय (Sports Ministry) ने निलंबित कर दिया है। WFI को अगले आदेश तक अपनी सभी गतिविधियां निलंबित करने का भी निर्देश दिया गया है। ये फैसला मशहूर पहलवान साक्षी मलिक (Sakshi Malik) की कुश्ती छोड़ने की घोषणा और बजरंग पुनिया (Bajrang Punia) के पद्मश्री लौटाने के ऐलान के बाद आया है। सिंह को 21 दिसंबर को WFI प्रमुख चुना गया था। इसके तुरंत बाद, पहलवानों ने यौन उत्पीड़न के आरोपी और कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) से उनकी नजदीकी के आधार पर उनके चुनाव का विरोध किया था।
WFI प्रमुख ने हाल ही में घोषणा की थी, अंडर-15 (U-15) और अंडर-20 (U-20) के नेशनल चैंपियनशिप इस साल उत्तर प्रदेश के गोंडा में खेली जाएगी। बता दें गोंडा बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह का गृह क्षेत्र है।
खेल मंत्रालय का तर्क है कि WFI ने उचित प्रकिया का पालन नहीं किया और पहलवानों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय दिए बिना अंडर-15 और अंडर-20 नेशनल चैंपियनशिप के आयोजन की ‘जल्दबाजी में घोषणा’ की थी।
मंत्रालय ने साथ ही कहा कि नई संस्था ‘पूरी तरह से पूर्व पदाधिकारियों के नियंत्रण’ में काम कर रही थी, जो राष्ट्रीय खेल संहिता के अनुरूप नहीं है।
WFI के चुनाव 21 दिसंबर को हुए थे, जिसमें पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के विश्वासपात्र संजय सिंह और उनके पैनल ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी।
न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, खेल मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, "नए निकाय ने WFI संविधान का पालन नहीं किया। महासंघ अगले आदेश तक निलंबित रहेगा। WFI कुश्ती के दैनिक कामकाज को नहीं देखेगा। उन्हें उचित प्रक्रिया और नियमों का पालन करने की जरूरत है।"
विनेश फोगाट और साक्षी मलिक के साथ बृजभूषण के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करने वाले शीर्ष पहलवान बजरंग पूनिया ने पूर्व अध्यक्ष के विश्वासपात्र संजय सिंह के WFI अध्यक्ष बनने के विरोध में शुक्रवार को अपना पद्मश्री पुरस्कार सरकार को लौटा दिया था। इससे एक दिन पहले साक्षी ने भी कुश्ती को अलविदा कह दिया था।
'जल्दबाजी में की गई नेशनल चैंपियनशिप की घोषणा'
सूत्र ने निलंबन के कारणों के बारे में बताते हुए कहा, "WFI के नवनिर्वाचित अध्यक्ष संजय सिंह ने 21 दिसंबर 2023 को अध्यक्ष चुने जाने के दिन ही घोषणा की कि कुश्ती के लिए अंडर-15 और अंडर-20 नेशनल चैंपियनशिप साल खत्म होने से पहले ही उत्तर प्रदेश के गोंडा के नंदिनी नगर में होगी।"
उन्होंने कहा, "यह घोषणा जल्दबाजी में की गई है। उन पहलवानों को पर्याप्त सूचना दिए बिना, जिन्हें इस नेशनल चैंपियनशिप में भाग लेना है। WFI के संविधान के प्रावधानों का पालन भी नहीं किया गया।"
मंत्रालय के सूत्र ने कहा, "WFI के संविधान की प्रस्तावना के नियम 3(e) के अनुसार, WFI का मकसद अन्य बातों के अलावा कार्यकारी समिति की तरफ से चयनित जगहों पर UWW (यूनाईटेड वर्ल्ड रेस्लिंग) के नियमों के अनुसार सीनियर, जूनियर और सब जूनियर नेशनल चैंपियनशिप आयोजित करने की व्यवस्था करना है।’’
सूत्र ने कहा कि नई संस्था ने उसी परिसर (बृजभूषण का आधिकारिक बंगला) में काम करना शुरू कर दिया है, जहां से पिछले पदाधिकारी काम करते थे और जहां कथित तौर पर खिलाड़ियों के यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है।
सूत्र ने कहा, "ऐसा लगता है कि नवनिर्वाचित निकाय पूर्व पदाधिकारियों के पूरी तरह कंट्रोल में है, जो खेल संहिता का पूर्ण उल्लंघन है।"
उन्होंने कहा, "महासंघ का संचालन पूर्व पदाधिकारियों की तरफ से नियंत्रित परिसर से हो रहा है। यह कथित परिसर भी वही है, जहां खिलाड़ियों के यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है और वर्तमान में अदालत इस मामले की सुनवाई कर रही है।"
सूत्र ने कहा, "भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के नवनिर्वाचित कार्यकारी निकाय की तरफ से लिए गए फैसले स्थापित कानूनी और प्रक्रियात्मक मानदंडों की घोर उपेक्षा को दर्शाते हैं, जो WFI के संवैधानिक प्रावधानों और राष्ट्रीय खेल विकास संहिता दोनों का उल्लंघन है।"
सूत्र ने कहा कि नई संस्था के ये सभी कदम निष्पक्ष और पारदर्शी शासन के स्थापित मानदंडों के विपरीत हैं।
'अध्यक्ष की ओर से पूर्ण मनमानी की बू आती है'
सूत्र ने कहा, "इन कदमों में अध्यक्ष की ओर से पूर्ण मनमानी की बू आती है, जो सुशासन के स्थापित सिद्धांतों के खिलाफ है और पारदर्शिता और उचित प्रक्रिया से रहित है। निष्पक्ष खेल, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए संचालन के मानदंडों का पालन महत्वपूर्ण है। खिलाड़ियों, हितधारकों और जनता के बीच विश्वास बनाने के लिए यह महत्वपूर्ण है।"
सूत्र ने कहा कि नेशनल चैंपियनशिप आयोजित करने का निर्णय कार्यकारी समिति को सूचित करके प्रक्रियात्मक तरीके से किया जाना चाहिए था, जो नहीं किया गया।
सूत्र ने कहा, "इस तरह के निर्णय (राष्ट्रीय चैंपियनशिप का आयोजन) कार्यकारी समिति की तरफ से लिए जाते हैं, जिसके सामने एजेंडे को विचार के लिए रखा जाना जरूरी होता है। WFI संविधान के नियम 11 के अनुसार ‘बैठक के लिए नोटिस और कोरम’ टाइटल के तहत, कार्यकारी समिति की बैठक के लिए न्यूनतम नोटिस पीरियड के लिए 15 दिन का समय होता है और कोरम एक-तिहाई प्रतिनिधियों का होता है।"
उन्होंने कहा, "यहां तक कि कार्यकारी समिति की आपातकालीन बैठक के लिए भी न्यूनतम नोटिस अवधि सात दिन और एक तिहाई प्रतिनिधियों के कोरम की आवश्यकता स्पष्ट है।"
सूत्र ने कहा, "WFI के नियम 10(D) के अनुसार महासंघ के सामान्य कामकाज को देखना, बैठकों की डिटेल तैयार करना, महासंघ के सभी रिकॉर्ड तैयार करना, आम सभा और कार्यकारी समिति की बैठक बुलाना WFI के महासिचव का काम है।’’
उन्होंने कहा, "ऐसा लगता है कि महासचिव कार्यकारी समिति की उक्त बैठक में शामिल नहीं थे, जो बिना किसी नोटिस या कोरम के आयोजित की गई थी।"
WFI के नवनिर्वाचित महासचिव प्रेम चंद लोचब ने चुनाव के एक दिन बाद संजय सिंह को लिखा था कि ‘कुछ राज्यों ने आयु वर्ग और जूनियर नेशनल चैंपियनशिप के कार्यक्रम और स्थल में बदलाव पर आपत्ति जताई है।’