चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ ने केंद्रीय कानून मंत्रालय को लिखे एक पत्र में सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सबसे वरिष्ठ जज जस्टिस संजीव खन्ना को अपना उत्तराधिकारी नामित किया है। यह पत्र उस परंपरा के अनुसार लिखा गया है, जिसमें भारत के रिटायर चीफ जस्टिस दूसरे सबसे वरिष्ठ जज को उत्तराधिकारी नामित करते हैं, जिनकी सिफारिश को केंद्र सरकार की ओर से मंजूर किया जाना होता है। डीवाई चंद्रचूड़ ने 9 नवंबर, 2022 को भारत के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला था। बतौर CJI उनका कार्यकाल 10 नवंबर को खत्म होगा। सुप्रीम कोर्ट के जज 65 साल की उम्र में रिटायर होते हैं।
9 अक्टूबर को भूटान में एक कार्यक्रम में बोलते हुए, चंद्रचूड़ ने कहा कि उनका मन भविष्य और अतीत के बारे में भय और चिंताओं से भरा हुआ है और इस सवाल पर विचार कर रहे हैं कि क्या उन्होंने वो सब कुछ हासिल किया, जो उन्होंने करने के लिए सोचा था और इतिहास उनके कार्यकाल को कैसे आंकेगा।
उन्होंने कहा, "थोड़ा असहज होने के लिए मुझे माफ करें। दो साल तक देश की सेवा करने के बाद, मैं इस साल नवंबर में भारत के चीफ जस्टिस के रूप में पद छोड़ दूंगा। जैसे-जैसे मेरा कार्यकाल खत्म हो रहा है, मेरा मन भविष्य और अतीत के बारे में दर और चिंताओं से घिर गया है।"
उन्होंने आगे कहा, "मैं खुद को इस तरह के सवालों पर विचार करते हुए पाता हूं: क्या मैंने वो सब कुछ हासिल कर लिया, जो मैंने करने का निश्चय किया था? इतिहास मेरे कार्यकाल का मूल्यांकन कैसे करेगा? क्या मैं चीजों को अलग ढंग से कर सकता था? मैं जजों और कानूनी पेशेवरों की भावी पीढ़ियों के लिए क्या विरासत छोड़ूंगा?"
उन्होंने अपने दो साल के कार्यकाल पर विचार करते हुए संतोष जताया और कहा कि उन्हें यह जानकर सांत्वना मिली कि परिणाम की परवाह किए बिना उन्होंने लगातार अपना बेस्ट दिया।
कौन हैं जस्टिस संजीव खन्ना?
उन्होंने 1983 में बार काउंसिल ऑफ दिल्ली में एक वकील के रूप में नामांकन किया और तीस हजारी परिसर में जिला अदालतों में प्रैक्टिस की। बाद में, उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट और ट्रिब्युनल में प्रैक्टिस की।
जस्टिस खन्ना ने इनकम टैक्स विभाग के लिए वरिष्ठ स्थायी वकील के रूप में भी काम किया और 2004 में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के लिए स्थायी वकील (सिविल) बने।
वह दिल्ली हाई कोर्ट में आपराधिक मामलों में एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और एमिकस क्यूरी के रूप में भी उपस्थित हुए, बाद में 2005 में दिल्ली हाई कोर्ट के एडिशनल जज और 2006 में परमानेंट जज बने।
न्यायमूर्ति खन्ना ने दिल्ली जुडिशियल एकेडमी, दिल्ली इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर और जिला न्यायालय मध्यस्थता केंद्रों के अध्यक्ष/प्रभारी न्यायाधीश जैसे पदों पर भी काम किया।
वह किसी भी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस नहीं बने, बल्कि 18 जनवरी 2019 को उन्हें प्रमोट कर के सुप्रीम कोर्ट के जज पर प्रमोट कर दिया गया था।
वह वर्तमान में राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष और राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी, भोपाल के गवर्निंग काउंसिल के सदस्य हैं।
एक टीवी शो के दौरान की गई टिप्पणी को लेकर एक पत्रकार के खिलाफ मामले में उनकी अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि अनुच्छेद 19(1)(A) का इस्तेमाल भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार को पराजित करने के लिए नहीं किया जा सकता है।
वह जिस पीठ का हिस्सा थे, उसने विवादित सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी थी। वह उस संवैधानिक बेंच का भी हिस्सा थे, जिसने संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को बरकरार रखा और चुनावी बॉन्ड योजना को रद्द कर दिया।