पाकिस्तान में बनाया आतंकी संगठन, कई बार जा चुका है जेल, कौन है सुखबीर बादल पर गोली चलाने वाला खिलस्तानी नेता नारायण सिंह चौरा?

Sukhbir Singh Badala Attack: नारायण सिंह चौरा आतंकवादी समूह खालिस्तान नेशनल आर्मी का लीडर है। हालांकि, अब ये संगठन इनएक्टिव है। बादल पर गोली चलाने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। चौरा ने बंदूक से गोली तो चलाई, लेकिन तभी एक शख्स ने उसका हाथ पकड़ा और उस पीछे धकेलता हुआ ले गया, जिससे उसका निशाना चूक गया

अपडेटेड Dec 04, 2024 पर 2:54 PM
कौन है सुखबीर सिंह बादल पर गोली चलाने वाला खिलस्तानी नेता नारायण सिंह चौरा?

शिरोमणि अकाली दल (SAD) के नेता सुखबीर सिंह बादल पर बुधवार को एक शख्स ने उस समय गोली चलाने की कोशिश की, जब वह सजा के तौर पर स्वर्ण मंदिर के बाहर ‘सेवादार’ के रूप में सेवा दे रहे थे। इस हमले में बादल बाल बाल बच गए। स्वर्ण मंदिर के बाहर मौजूद कुछ लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया, जिससे उसका निशाना चूक गया और गोली दीवार में जा लगी। बादल पर गोली चलाने वाले शख्स की पहचान नारायण सिंह चौरा के रूप में हुई, जो एक खालिस्तानी नेता है। सुखबीर बादल को Z+ प्लस सिक्योरिटी मिली है।

चौरा आतंकवादी समूह खालिस्तान नेशनल आर्मी का लीडर है। हालांकि, अब ये संगठन इनएक्टिव है। बादल पर गोली चलाने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। चौरा ने बंदूक से गोली तो चलाई, लेकिन तभी एक शख्स ने उसका हाथ पकड़ा और उस पीछे धकेलता हुआ ले गया, जिससे उसका निशाना चूक गया।


कौन है नारायण सिंह चौरा?

नारायण सिंह चौरा के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत कई मामले दर्ज हैं। वह शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (SGPC) के पूर्व कर्मचारी है। 1984 में जब पंजाब में चरमपंथ अपने चरम पर था, तो वह पाकिस्तान भाग गया था, जहां उसने एक आतंकवादी संगठन बनाया था। उग्रवाद से जुड़ी गतिविधियों के लिए उसे कई बार जेल भेजा गया है।

हाल के सालों में, चौरा राजनीतिक और सामाजिक तौर पर ज्यादा एक्टिव हो गया था। पूर्व आतंकवादी दलजीत सिंह बिट्टू और चौरा ने 2023 में हुई अजनाला की घटना पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, जिसमें दोनों ने वारिस पंजाब दे के प्रमुख अमृतपाल सिंह की आलोचना की थी। इस घटना के बाद अमृतपाल के समर्थक काफी नाराज भी हुए थे। अमृतपाल सिंह खडूर साहिब से लोकसभा सांसद हैं।

दरअसल अमृतपाल सिंह के एक सहयोगी को छुड़ाने के लिए फरवरी 2023 में हथियारों से लैस लगभग 200-250 लोगों की भीड़ ने कथित तौर पर अजनाला पुलिस स्टेशन पर हमला कर दिया था। प्रेस कॉन्फ्रेंस में, चौरा और बिट्टू ने सुझाव दिया कि अमृतपाल को पुलिस स्टेशन में घुसने के बजाय ज्यादा सतर्क रुख अपनाना चाहिए था।

कैसे हुई उग्रवाद की शुरुआत?

नारायण सिंह चौरा का जन्म 1956 में पंजाब के गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक तहसील के चोरा बाजवा गांव में एक किसान परिवार में हुआ था। उसने सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से अपनी शुरुआती शिक्षा पूरी की, जिसके बाद अमृतसर में शहीद सिख मिशनरी कॉलेज में दाखिला लिया, जहां उसने एक सिख उपदेशक बनने की ट्रेनिंग ली।

उसने पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ से 'ज्ञानी' की डिग्री हासिल की और पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला से पॉलिटिकल साइंस के साथ-साथ पंजाबी में मास्टर्स किया। चौरा किताबें, लेख, कविताएं, नोवल और नाटक लिखने के अलावा सिख धर्म पर लेक्चर भी देता था। कुछ सालों तक उसने SGPC प्रचारक के रूप में भी काम किया।

1982 में वह अकाल फेडरेशन में शामिल हो गया। जून 1984 में स्वर्ण मंदिर के अंदर सेना की कार्रवाई के बाद वह पाकिस्तान भाग गया। चौरा कई बार जेल भी जा चुका है- 5 सितंबर, 1995 से 31 जुलाई, 1997 तक; 29 जनवरी 2004 से 29 अप्रैल 2005 तक; और 26 फरवरी 2013 से 4 अगस्त 2018 तक।

पाकिस्ता में बनई खालिस्तान नेशनल आर्मी

उसे कई तरह आरोपों का सामना करना पड़ा, जिसमें राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने का आरोप भी शामिल था। उस पर भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के अलावा, आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए थे। चौरा को ज्यादातर मामलों में बरी कर दिया गया।

पाकिस्तान जाने के बाद चौरा ने खालिस्तान नेशनल आर्मी बनाई। पुलिस के अनुसार, आतंकवाद के शुरुआती चरण के दौरान पंजाब में हथियारों और विस्फोटकों की बड़ी खेप की तस्करी में उसने अहम भूमिका निभाई थी।

पाकिस्तान में रहते हुए, उसने कथित तौर पर "देशद्रोही" साहित्य के अलावा गुरिल्ला वॉर पर एक किताब भी लिखी। उसने एक आत्मकथा भी लिखी। चौरा 1990 के दशक के मध्य में भारत लौट आया और उग्रवाद से जुड़ी कई गतिविधियों में शामिल रहा।

पूर्व CM के हत्यारों को जेल से भगाने का आरोप

उस पर 2004 में बब्बर खालसा इंटरनेशनल के आतंकवादियों जगतार सिंह हवारा, परमजीत सिंह भियोरा, जगतार सिंह तारा और देवी सिंह को जेल की बिजली सप्लाई बंद करके चंडीगढ़ की बुड़ैल जेल से भागने में मदद करने का आरोप था। भियोरा, हवारा और तारा पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्यारे थे। हालांकि, चौरा को मामले में बरी कर दिया गया था।

2015 में जब सिख सभा सरबत खालसा का आयोजन हुआ था, तब चौरा जेल में था। सरबत खालसा मंच पर, पपलप्रीत सिंह ने चौरा का एक मैसेज पढ़ा, जिसके बाद सिंह और अन्य पर देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया। अब पपलप्रीत सिंह अमृतपाल सिंह के साथ असम की डिब्रूगढ़ जेल में हैं।

चौरा को आखिरी बार 2022 में जमानत पर रिहा किया गया था और उस पर अमृतसर, रोपड़ और तरनतारन सहित पंजाब के अलग-अलग जिलों में कई मामले दर्ज हैं।

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