Manipur Violence: आखिर एक बार फिर क्यों सुलग रहा मणिपुर? हिंसा की चपेट में है राज्य, NPP के समर्थन वापस लेने से सियासी संकट!

Manipur Violence: मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच लंबे समय से संघर्ष चल रहा है। हालांकि एक घटना के चलते पिछले दो दिनों से इंफाल घाटी सुलग गई है। विधायकों और मंत्रियों के घरों पर भी भीड़ के हमले हो रहे हैं। घाटी के सिविल सोसायटी ग्रुप ने राज्य के साथ-साथ केंद्र की सरकार को भी अल्टीमेटम दिया है

अपडेटेड Nov 18, 2024 पर 11:14 PM
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Manipur Violence: मणिपुर एक बार फिर सुलग रहा है। पिछले दो दिनों से यहां अशांति फैली हुई है। इंफला घाटी में हिंसात्मक प्रदर्शन जारी हैं।

Manipur Violence: मणिपुर एक बार फिर सुलग रहा है। पिछले दो दिनों से यहां अशांति फैली हुई है। इंफला घाटी में हिंसात्मक प्रदर्शन जारी हैं। इसके अलावा भीड़ ने कुछ मंत्रियों और विधायकों के घरों पर भी हमला किया है। पिछली रात बड़ी संख्या लोग इकट्ठा हुए और उन्होंने मंत्रियों-विधायकों के घर और संपत्तियों पर हमला किया। सिविल सोसायटी ग्रुप्स ने केंद्र और राज्य सरकारों को सैन्य समूहों के खिलाफ निर्णायक कदम उठाने का अल्टीमेटम दिया है और चेतावनी दी है कि ऐसा नहीं होता है तो उन्हें आम लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ेगा।

इस हिंसा की आंच सरकार पर भी दिखने लगी है। मणिपुर में एन बीरेन सिंह की अगुवाई में बीजेपी की सरकार है जिससे सहयोगी नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) ने समर्थन वापस लेने का ऐलान कर दिया है। एनपीपी सुप्रीमो और मेघालय के मुख्‍यमंत्री कॉनराड संगमा ने बीजेपी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर समर्थन वापसी का ऐलान किया है। हालांकि बीजेपी के पास राज्य की 60 में से 32 सीटें हैं तो सरकार चलाने के लिए उसके पास बहुमत है।

मणिपुर के फिर से सुलगने की क्या है वजह?


मणिपुर में पिछले कुछ महीने से हिंसा लगातार जारी है। हालांकि अब एकाएक जो हो रहा है, उसके पीछे वजह जिरीबाम गोलीबारी का बाद कथित रूप से बंधक बनाए गए 6 लोगों के सड़े-गले शव मिलना है। इस गोलीबारी में 10 कूकी उग्रवादी मारे गए थे। इन शवों के मिलने के बाद मेईती लोगों की बहुलता वाले घाटी के सिविल सोसायटी ग्रुप्स ने सरकार को अल्टीमेटम दिया है। को-ऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटिग्रिटी (COCOMI) के प्रवक्ता खुरैजम आथौबा ने मांग की है कि आतंकियों और सशस्त्र समूहों के खिलाफ तत्काल सैन्य कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि इस मसले सो सुलझाने के लिए जल्द से जल्द सभी विधायक और बाकी नेता मिलकर निर्णायक कदम उठाएं। आगे उन्होंने कहा कि अगर सरकार इस पर कोई निर्याणक फैसला नहीं लेती है तो उन्हें आम लोगों के गुस्से का सामना करना होगा।

वहीं इस बीच कूक-जो की बहुलता वाले इलाकों में उनके जनजातीय संगठन ने राज्य के घाटी जिलों में AFSPA का एरिया बढ़ाने की मांग की है। कांगपोकपी जिले के सदर हिल्स की जनजातीय एकता समिति (कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी) ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से मणिपुर के घाटी जिलों के सभी 13 पुलिस थाना क्षेत्रों में AFSPA लागू करने और पर्वतीय क्षेत्रों से इसे वापस लेने की अपील की है। जिरीबाम संकट के बाद इस समुदाय ने भी विरोध प्रदर्शन तेज कर दिए हैं।

राजनीतिक स्तर पर क्या हो रहा?

स्टेट कैबिनेट ने केंद्र से पुलिस स्टेशन के छह इलाकों में फिर से अफस्पा (AFSPA) लगाने के फैसले के रिव्यू और इसे वापस लेने का आग्रह किया है। वहीं इस मामले में विपक्ष राज्य और केंद्र को घेरने की कोशिश कर रहा है। विपक्ष के नेता ओक्रम इबोबी सिंह का कहना है कि वह पहले ही कह चुके हैं कि अगर विधायकों के इस्तीफा देने से संकट हल हो जाता है, तो वे इसके लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि इस स्थिति की जिम्मेदारी राज्य और केंद्र पर है। संविधानिक व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा चुकी है। यह सरकार की जिम्मेदारी है और वे इससे बच नहीं सकते। वहीं केंद्र ने राज्य में CRPF के टॉप अधिकारियों को भेजा है।

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