AGS Transact IPO: शेयरों की लिस्टिंग तय समय से पहले सोमवार को होगी, जानिए कैसी हो सकती है लिस्टिंग

AGS Transact IPO: शेयरों की लिस्टिंग पहले 1 फरवरी को होने वाली थी लेकिन उस दिन बजट पेश होने के कारण लिस्टिंग अब एक दिन पहले होगी

अपडेटेड Jan 30, 2022 पर 11:22 AM
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AGS Transact के शेयरों की लिस्टिंग सोमवार 31 जनवरी को होने वाली है

AGS Transact Tech Share: पेमेंट सॉल्यूशंस प्रोवाइड करने वाली कंपनी AGS Transact की लिस्टिंग 31 जनवरी सोमवार को होने वाली है। पहले कंपनी की लिस्टिंग 1 फरवरी को होने वाली थी। लेकिन 1 फरवरी को बजट पेश होता है इसलिए अब कंपनी की लिस्टिंग एक दिन पहले 31 जनवरी को होगी। यह 2022 की पहली लिस्टिंग है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि AGS Transact Tech के शेयरों की लिस्टिंग कमजोर हो सकती है। वैसे तो यह ओमनी चैनल पेमेंट सॉल्यूशंस मुहैया कराती है। यानी इससे ऑनलाइन ऑफलाइन किसी भी प्लेटफॉर्म पर पेमेंट किया जा सकता है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनी में फाइनेंशियल कंसिस्टेंसी नहीं है यानी इसकी आमदनी या कैश फ्लो में उतारचढ़ाव रहता है। इसके साथ ही कमजोर मार्केट सेंटीमेंट, ऑफर फॉर सेल होने, एक ही सेगमेंट पर पूरी निर्भरता रहने, सीमित ग्राहक और जबरदस्त प्रतियोगिता होने के कारण इसकी लिस्टिंग कमजोर रह सकती है।


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AGS Transact ने पब्लिक इश्यू से 680 करोड़ रुपए जुटा रही है। यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल है। कंपनी का इश्यू प्राइस 175 रुपए है।

AGS Transact का इश्यू 19 जनवरी को खुला और 21 जनवरी को बंद हुआ था। कंपनी का इश्यू 7.79 गुना सब्सक्राइब हुआ था। नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 25.61 गुना सब्सक्राइब हुआ है। वहीं क्वालीफाइड इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स का रिजर्व हिस्सा 2.68 गुना और रिटेल इनवेस्टर्स पोर्शन 3.08 गुना सब्सक्राइब हुआ है।

Dhan के फाउंडर प्रकाश गुप्ता ने कहा, "मार्केट सेंटीमेंट नेगेटिव हो चुका है और इसका असर लिस्टिंग पर नजर आ सकता है।" उन्होंने कहा, यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल है और IPO का पूरा पैसा प्रमोटर्स के पास जाएगा। कंपनी के पास पॉजिटिव फ्री कैश फ्लो भी है और बैलेंसशीट में कर्ज भी है जो चिंता का कारण है।

पिछली एक तिमाही में मार्केट में काफी उतारचढ़ाव रहा है। पिछले कुछ हफ्तों में ही निफ्टी 18,300 के हाई से 6% गिर चुका है। बजट से पहले इस गिरावट की कई वजहें रही हैं। इनमें महंगाई का दबाव, तेल की बढ़ती कीमतें और मार्च में फेड की तरफ से रेट बढ़ाने के संकेत हैं।

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