IGI के आईपीओ से हासिल कुछ पैसे का इस्तेमाल ब्लैकस्टोन विदेश में अधिग्रहण के लिए करेगी, यहां जानिए पूरा प्लान

आईजीआई का आईपीओ 4000 करोड़ रुपये का होगा। इसमें 1,250 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी होंगे, जबकि 2,750 करोड़ रुपये का ऑफर फॉर सेल होगा। लैब में तैयार होने वाले और प्राकृतिक डायमंड को ग्लोबल सर्टिफिकेशन इश्यू करती है

अपडेटेड Aug 26, 2024 पर 5:33 PM
ब्लैकस्टोन ने मई 2023 में IGI का करीब 55 करोड़ डॉलर में अधिग्रहण किया था।

इंटरनेशनल जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (इंडिया) (आईजीआई) का आईपीओ 4,000 करोड़ रुपये का हो सकता है। इसमें से करीब 1,100 करोड़ रुपये का इस्तेमाल ब्लैकस्टोन विदेश में आईजीआई ग्रुप के बिजनेस के अधिग्रहण के लिए कर सकती है। आईजीआई (इंडिया) का मालिकाना हक ब्लैकस्टोन के पास है। पिछले हफ्ते आईजीआई ने आईपीओ के लिए ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस सेबी के पास भेज दिया। इस आईपीओ में 1,250 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी होंगे, जबकि 2,750 करोड़ रुपये का ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) होगा। ओएफएस के तहत ब्लैकस्टोन अपने शेयर बेचेगी।

IGI का बिजनेस क्या है?

आईजीआई (IGI) लैब में तैयार होने वाले और प्राकृतिक डायमंड को ग्लोबल सर्टिफिकेशन इश्यू करती है। ब्लैकस्टोन ने मई 2023 में इसका करीब 55 करोड़ डॉलर में अधिग्रहण किया था। उसने चीन की इनवेस्टिंग कंपनियों Fosun और Roland Lowrie से इसका अधिग्रहण किया था।


विदेशी में कितनी इकाइयां हैं?

अभी के स्ट्रक्चर के मुताबिक, आईजीआई की सिर्फ इंडियन इकाई और तुर्की की इकाई उस कंपनी के हिस्सा हैं, जिसने आईपीओ के लिए अप्लिकेशन फाइल किया है। विदेशी बिजनेस के तहत आईजीआई बेल्जियम और आईजीआई नीदरलैंड्स आती हैं। इनका मालिकाना हक ब्लैकस्टोन की कंपनी BCP ASIA II TOPCO PTE के पास है। बीसीपी एशिया II टोपको इंडियन इकाई की भी प्रमोटर है, जिसने आईपीओ के लिए अप्लाई किया है।

IGI ने 23 अगस्त को डीआरएचपी फाइल किया

ब्लैकस्टोन के एक प्रवक्ता ने मनीकंट्रोल को बताया, "आईजीआई ने रेगुलेटर्स के पास 23 अगस्त को डीआरएचपी फाइल किया है। इसका मकसद कंपनी को इंडिया में लिस्ट कराना है। हम इस बारे में इससे ज्यादा नहीं बता सकते।" आईजीआई के आईपीओ के ब्लैकस्टोन के प्लान के बारे में जानकारी रखने वाले एक स्रोत ने मनीकंट्रोल को बताया कि Tehmasp Printer आईजीआई के ग्लोबल सीईओ की जिम्मेदारी संभालेंगे। अभी वह आईजीआई इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर है।

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विदेशी बिजनेस के अधिग्रहण का दूसरा रास्ता

सूत्र ने यह भी कहा कि इसका मतलब है कि अधिग्रहण के जरिए विदेश का पूरा बिजनेस इंडियन इकाई के तहत आ जाएगा। उसने कहा, "इसे दूसरे तरह से किया जा सकता था। इंडियन इकाई छोटी अवधि का कर्ज लेकर विदेशी बिजनेसेज का अधिग्रहण कर सकती थी। उसके बाद वह आईपीओ के लिए अप्लाई कर सकती थी। फिर आईपीओ से हासिल पैसे से वह कर्ज चुका सकती थी। लेकिन, इसमें इंडियन इकाई को कर्ज पर इंटरेस्ट चुकाना पड़ता। इसके अलावा विदेशी में बिजनेसेज के अधिग्रहण में समय लगता, जिससे आईपीओ में देर होती। "

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