SpaceX, OpenAI और Anthropic... तीन बड़े अमेरिकी IPO! क्या भारतीय निवेशक भी पैसा लगा सकते हैं? जानिए नियम
अमेरिका की तीन बड़ी कंपनियों- SpaceX, OpenAI और Anthropic के संभावित IPO ने दुनियाभर के निवेशकों का ध्यान खींचा है। लेकिन क्या भारतीय निवेशकों को इन IPO में सीधे शेयर मिल सकते हैं? जानिए निवेश, अलॉटमेंट, टैक्स और नियमों से जुड़ी जरूरी बातें।
ज्यादातर भारतीय निवेशकों के लिए सबसे आसान रास्ता IPO के बाद शेयर खरीदना है।
अरबपति कारोबारी एलॉन मस्क की SpaceX, ChatGPT बनाने वाली OpenAI और Claude AI डेवलप करने वाली Anthropic के संभावित IPO को लेकर दुनियाभर में काफी चर्चा है। भारत में भी कई निवेशक इन कंपनियों में निवेश करना चाहते हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या भारतीय निवेशक इन विदेशी IPO में हिस्सा ले सकते हैं?
क्या भारतीय विदेशी IPO में निवेश कर सकते हैं?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भारतीय नागरिक RBI की लिबराइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत विदेशी शेयरों और IPO में निवेश कर सकते हैं। इस नियम के तहत एक व्यक्ति एक वित्त वर्ष में 2.5 लाख डॉलर तक विदेश भेज सकता है।
यानी नियमों के हिसाब से भारतीय निवेशकों को विदेशी IPO में निवेश करने की अनुमति है। लेकिन असली चुनौती नियम नहीं, बल्कि शेयरों का अलॉटमेंट है।
अमेरिकी IPO में शेयर मिलना इतना मुश्किल क्यों है?
EquiRize Securities के डायरेक्टर इमरान खान के मुताबिक, अमेरिका में IPO के ज्यादातर शेयर बड़े संस्थागत निवेशकों को दिए जाते हैं। रिटेल निवेशकों के हिस्से में बहुत कम शेयर आते हैं।
कुछ कंपनियां रिटेल निवेशकों के लिए प्लेटफॉर्म तय करती हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर विदेशी निवेशक को वहां निवेश का मौका मिल जाएगा। गैर-अमेरिकी निवेशकों के लिए पात्रता अलग-अलग हो सकती है।
Growth Investing के फाउंडर नरेंद्र सिंह के मुताबिक, भारत की तरह अमेरिका में रिटेल निवेशकों के लिए कोई तय कोटा नहीं होता। वहां IPO में 70% से 90% तक शेयर आमतौर पर संस्थागत निवेशकों को मिल जाते हैं। यही वजह है कि विदेशी रिटेल निवेशकों को अक्सर बहुत कम या बिल्कुल भी अलॉटमेंट नहीं मिलता।
भारतीय निवेशकों के लिए सबसे आसान तरीका क्या है?
ज्यादातर भारतीय निवेशकों के लिए सबसे आसान रास्ता IPO के बाद शेयर खरीदना है। जब कंपनी के शेयर NYSE या NASDAQ जैसे एक्सचेंजों पर लिस्ट हो जाते हैं, तब भारतीय निवेशक उनमें निवेश कर सकते हैं।
इसके लिए दो प्रमुख विकल्प हैं। पहला, LRS के तहत Vested, INDmoney और Interactive Brokers जैसे इंटरनेशनल ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना। दूसरा, GIFT City के IFSC प्लेटफॉर्म के जरिए अमेरिकी शेयरों में निवेश करना। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, Anand Rathi और Motilal Oswal जैसे IFSC-रजिस्टर्ड ब्रोकर भी यह सुविधा देते हैं।
निवेश पर टैक्स कैसे लगता है?
विदेश में निवेश के लिए पैसे भेजने पर एक वित्त वर्ष में 10 लाख रुपये से ज्यादा रकम पर 20% TCS लगता है। हालांकि यह अतिरिक्त टैक्स नहीं है। ITR दाखिल करते समय इसका क्रेडिट लिया जा सकता है।
अगर विदेशी शेयर खरीदने के 24 महीने के भीतर बेच दिए जाते हैं, तो मुनाफे पर आपकी आयकर स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। वहीं 24 महीने से ज्यादा होल्ड करने पर मुनाफे पर 12.5% टैक्स लगाया जाता है।
अगर अमेरिकी कंपनी डिविडेंड देती है, तो अमेरिका में आमतौर पर 25% टैक्स काट लिया जाता है। हालांकि भारत-अमेरिका टैक्स संधि (DTAA) के तहत इसका क्रेडिट भारत में लिया जा सकता है।
निवेश से पहले किन बातों का ध्यान रखें?
विदेशी शेयरों में निवेश करने वाले भारतीयों को FEMA, LRS, KYC और टैक्स रिपोर्टिंग के नियमों का पालन करना होता है। साथ ही आयकर रिटर्न में अपने विदेशी निवेश की जानकारी देना भी जरूरी है।
यानी भारतीय निवेशक SpaceX, OpenAI और Anthropic जैसी कंपनियों में निवेश कर सकते हैं, लेकिन IPO के दौरान सीधे शेयर मिलना आसान नहीं है। ज्यादातर मामलों में निवेशकों को इन कंपनियों के शेयर लिस्टिंग के बाद ही खरीदने का मौका मिलता है।
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