Concord Biotech ने ऐसे वक्त आईपीओ पेश किया है, जब फार्मा कंपनियों के शेयरों की रौनक लौट रही है। कॉनकोर्ड बायोटेक में दिवंगत इनवेस्टर राकेश झुनझुवाला की इनवेस्टमेंट यूनिट Rare Trusts ने निवेश किया है। इससे कॉनकोर्ड के आईपीओ में निवेशकों की दिलचस्पी दिख रही है। यह आईपीओ 4 अगस्त को खुल गया है। इस कंपनी में कुछ बड़े फॉरेन फंडों का भी निवेश है। यह कंपनी खास फर्मंटेशन आधारित API (Active Pharmaceutical Ingredients) बनाती है। इसका इस्तेमाल immunosuppressants and oncology के क्षेत्र में होता है। इनमें कंपनी की अच्छी बाजार हिस्सेदारी है। इसका प्रोडक्ट्स पोर्टफोलियो डायवर्सिफायड है। कंपनी 70 से ज्यादा देशों को प्रोडक्ट्स की सप्लाई करती है।
कंपनी ने किया बेहतर प्रदर्शन
2022 में आइडेंटिफायड-फर्मंटेशन आधारित API प्रोडक्ट्स में वॉल्यूम के लिहाज से कॉनकोर्ड बायोटेक की बाजार हिस्सेदारी 20 फीसदी से ज्यादा थी। कंपनी से जुड़ी दूसरी अच्छी बात यह है कि इसकी वित्तीय स्थिति अच्छी है। फाइनेंशियल ईयर 2022-23 के दौरान कंपनी का प्रॉफिट साल दर साल आधार पर 37.2 फीसदी पढ़कर 240 करोड़ रुपये रहा। कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष में कई मानकों पर अच्छा प्रदर्शन किया। इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू साल दर साल आधार पर 20 फीसदी बढ़कर 853.2 करोड़ रुपये रहा। कंपनी का EBITDA 25.6 फीसदी बढ़कर 343.3 करोड़ रुपये रहा। ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन भी 190 बेसिस प्वॉइंट्स बढ़कर 40.2 फीसदी रहा। API सेगमेंट के लिए अभी स्थितियां अनुकूल हैं। इस वजह से कंपनी के लिए बेहतर संभावनाएं दिख रही हैं।
प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के मुकाबले वैल्यूएशन
कॉनकोर्ड बायोटेक का यह आईपीओ 1,550.59 करोड़ रुपये का है। कंपनी ने शेयर के लिए 705-741 रुपये प्राइस बैंड तय किया है। इससे फाइनेंशियल ईयर 2022-23 की अर्निंग्स के आधार पर कंपनी के शेयर का प्राइस-टू-अर्निंग्स रेशियो (P/E) 32.3 गुना है। अगर प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के शेयरों के पीई से इसकी तुलना की जाए तो तस्वीर साफ हो जाती है। Divis Laboratories का पीई रेशियो 54.15 है। Suven Pharma का पीई रेशियो 30.08 है। Laurus Labs का पीई 23.70 है। इस तरह Concord Biotech का पीई रेशियो प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के मुकाबले ज्यादा है। लेकिन, इसका रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) इन कंपनियों के मुकाबले ज्यादा है।
RoE और RoCE बढ़ने की गुंजाइश
कॉनकोर्ड बायोटेक के RoE में साल दर साल आधार पर इजाफा हुआ है। फाइनेंशियल ईयर 2021-22 में यह 16.64 फीसदी था, जो 2022-23 में बढ़कर 26.55 फीसदी पर पहुंच गया। रिटर्न ऑन कैपिटल एंप्लॉयड (RoCE) में भी इम्प्रूवमेंट देखने को मिला है। यह FY22 के 20.55 से बढ़कर FY23 में 28.54 फीसदी पर पहुंच गया। फिर भी कुछ एनालिस्ट्स का कहना है कि ऑपरेटिंग पैमानों पर अच्छा प्रदर्शन के बावजूद इसके RoCE और RoE कम हैं। एक एनालिस्ट ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा कि इसकी वजह कंपनी का लोअर यूटिलाइजेशन हो सकता है। ऐसे में भविष्य में कंपनी के RoE और RoCE दोनों बढ़ने की संभावना दिख रही है। हालांकि, ये प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के मुकाबले पहले से ही ज्यादा हैं।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
ज्यादातर एनालिस्ट्स का कहना है कि कंपनी के मौजूदा वैल्यूएशन में शॉर्ट टर्म में इसकी संभावनाएं शामिल दिखती हैं। मेहता सिक्योरिटीज के एक एनालिस्ट ने कहा कि अगर शेयर के 741 रुपये के ऊपरी प्राइस बैंड को देखा जाए तो ऐसा लगता है कि इश्यू में शेयर के लिए पूरी कीमत वसूल की जा रही है। WealthMills Securities के डायरेक्टर (इक्विटी स्ट्रेटेजी) ने भी इसी तरह की राय जताई। उन्होंने कहा कि अगर कोई निवेशक इस आईपीओ में पैसा लगाना चाहता है तो उसे यह निवेश लंबी अवधि के लिए करना होगा।