LIC IPO के बारे में बुधवार को चौंकाने वाली खबर आई। ग्रे मार्केट में एलआईसी के शेयर पर प्रीमियम (GMP) निगेटिव हो गया। यह खबर उन करोड़ों इनवेस्टर्स को निराश कर सकती है, जिन्होंने एलआईसी के आईपीओ में पैसे लगाए हैं। इनमें कई ऐसे निवेशक हैं, जो पहली बार स्टॉक मार्केट में दाखिल हो रहे हैं।
एक ट्रेडर ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया, "एक समय ग्रे मार्केट में एलआईसी के शेयर पर प्रीमियम 93-95 रुपये तक पहुंच गया था। उसके बाद से यह लगातार गिरा है। 5 मई को प्रीमियम सिर्फ 8-10 रुपये रह गया था। 6 मई को यह 10 रुपये हो गया था। बुधवार को यह घटकर माइनस 15 पैसे रह गया है।"
LIC के आईपीओ में फॉरेन इनवेस्टर्स ने ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई है। इसका असर ग्रे मार्केट में इस शेयर के प्रीमियम पर पड़ा है। एलआईसी के आईपीओ में ज्यादातर रिटेल और डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स ने पैसे लगाए हैं। दरअसल, इनफ्लेशन लगातार बढ़ने से माना जा रहा है कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकते हैं। इस वजह से स्टॉक मार्केट में कमजोरी दिख रही है। इसका असर ग्रे मार्केट में शेयरों के प्रीमियम पर भी पड़ रहा है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि ग्रे मार्केट में प्रीमियम में निगेटिव में जाना एलआईसी के शेयरों की लिस्टिंग के लिए अच्छा संकेत नहीं है। 17 मई को एलआईसी के शेयर बीएसई और एनएसई पर लिस्ट होने वाले हैं। ज्यादातर पॉलिसीहोल्डर्स और रिटेल इनवेस्टर्स ने लिस्टिंग गेंस के लिए बोली लगाई है।
अगर एलआईसी के शेयरों की लिस्टिंग इश्यू प्राइस से कम पर होती है तो लिस्टिंग गेंस के मकसद से बोली लगाने वाले इनवेस्टर्स को बहुत मायूसी होगी। बताया जाता है कि एलआईसी के आईपीओ से पहले बड़ी संख्या में डीमैट अकाउंट खुले हैं। सिर्फ अप्रैल में 40 लाख डीमैट अकाउंट खुलने की खबर है।
सरकार ने एलआईसी का आईपीओ लॉन्च करने में बहुत सावधानी बरती थी। उसने इस आईपीओ की साइज घटाई थी। पहले वह एलआईसी में अपनी 5 फीसदी हिस्सेदारी बेचने वाली थी। बाद में उसने सिर्फ 3.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया।
सरकार ने एलआईसी की वैल्यूएशन भी बहुत घटा दी थी। पहले एलआईसी की वैल्यूएशन करीब 17 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है। इश्यू से ठीक पहले इसे घटाकर करीब 6 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया। दरअसल, सरकार इस आईपीओ को लेकर किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती थी।