भारत में धड़ाधड़ आ रहे हैं IPO, लेकिन जुटाई गई पूंजी के मामले में ये 2 देश अभी भी आगे

2025 के पहले छह महीनों में भारत में 108 कंपनियां लिस्ट हुईं। संख्या सालाना आधार पर 30 प्रतिशत कम रही। इन्होंने IPO से 4.6 अरब डॉलर जुटाए। यह आंकड़ा सालाना आधार पर 2 प्रतिशत कम है। EY का मानना है कि 2025 की दूसरी छमाही यानि जुलाई-सितंबर में IPO मार्केट का प्रदर्शन अच्छा रहेगा

अपडेटेड Jul 21, 2025 पर 6:27 PM
2025 की पहली छमाही में IPO से पूरी दुनिया में हुई कमाई में भारत की हिस्सेदारी केवल 8 प्रतिशत की रही।

भारत में IPO तो धड़ाधड़ आ रहे हैं लेकिन इनसे कमाई उतनी बंपर नहीं हो रही है। EY ग्लोबल IPO ट्रेंड्स की लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, IPO की संख्या के मामले में भारत दुनिया भर में सबसे एक्टिव बाजारों में से एक है। लेकिन इनसे जुटाई गई कुल पूंजी के मामले में यह अमेरिका और चीन से अभी भी पीछे है। 2025 की पहली छमाही यानि जनवरी-जून में IPO से पूरी दुनिया में हुई कमाई में भारत की हिस्सेदारी केवल 8 प्रतिशत की रही। वहीं अमेरिका की हिस्सेदारी 28 प्रतिशत और चीन की 34 प्रतिशत रही।

2025 के पहले छह महीनों में भारत में 108 कंपनियां लिस्ट हुईं। इन्होंने IPO से 4.6 अरब डॉलर जुटाए। यह एक मजबूत प्रदर्शन लग सकता है लेकिन सालाना आधार पर 2 प्रतिशत कम है। साथ ही एक फैक्ट यह भी है कि इन 6 महीनों में IPO की संख्या सालाना आधार पर 30 प्रतिशत कम रही।

वैश्विक स्तर पर बात करें तो अमेरिका में 2025 की पहली छमाही में 109 IPO आए। फिर भी कुल मिलाकर जुटाए गए पैसे कम ही रहे। दूसरी ओर चीन में IPO गतिविधियों में 30 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि देखी गई।


IPO लाने वाले और निवेशक दोनों हो रहे सिलेक्टिव

EY की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय बाजार में IPO लाने वाले इस बात को लेकर सिलेक्टिव हो रहे हैं कि वे कब और कैसे पब्लिक इश्यू लाएं, जबकि निवेशक ऐसी कंपनियों की ओर रुख कर रहे हैं जिनका इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत हो और जिनमें ग्रोथ क्लियरली दिख रही हो। गौर करने वाली बात यह भी है कि भू-राजनीतिक तनाव और अस्थिर मैक्रोइकोनॉमिक स्थितियों ने IPO लाने वालों को और अधिक सतर्क कर दिया है। कई नामी कंपनियां या तो अपने लिस्टिंग प्लान में देरी कर रही हैं या फिर वैल्यूएशन को लेकर अपनी उम्मीदों को रिवाइज कर रही हैं।

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2025 की दूसरी छमाही में दिख सकती है तेजी

EY का मानना है कि 2025 की दूसरी छमाही यानि जुलाई-सितंबर में IPO मार्केट का प्रदर्शन अच्छा रहेगा। कई कंपनियों को पब्लिक इश्यू के लिए रेगुलेटरी अप्रूवल मिल चुका है और वे बाजार की स्थितियां अनुकूल होने का इंतजार कर रही हैं। वैसे अब मार्केट सेंटिमेंट में सुधार होता दिख रहा है। खुदरा निवेशकों की रुचि शेयरों में बनी हुई है और रेगुलेटरी वातावरण काफी हद तक सपोर्टिव है। मैक्रोइकोनॉमिक संकेतक, अधिक अनुकूल होते जा रहे हैं, खास तौर से महंगाई और लिक्विटी के मामले में।

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