वैंस इलेक्ट्रोइंजीनियरिंग्स के ₹33.98 करोड़ के IPO को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है। यह इश्यू 628.73 गुना के बंपर सब्सक्रिप्शन के साथ बंद हुआ है। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 281.65 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 1,031.87 गुना, रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 686.32 गुना और एंप्लॉयीज के लिए रिजर्व हिस्सा 0.95 गुना सब्सक्राइब हुआ। अब 5 अक्टूबर अलॉटमेंट फाइनल होने की तारीख है।
उसके बाद कंपनी के शेयर BSE SME पर 7 अक्टूबर को लिस्ट हो सकते हैं। ग्रे मार्केट में कंपनी का शेयर 50.85 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं। IPO से हुई कमाई का इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करने के लिए और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।
जिने लोगों ने Vans Electroengineerings IPO में पैसे लगाए हैं, वे इसकी रजिस्ट्रार Bigshare Services Pvt.Ltd. और BSE के जरिए अलॉटमेंट चेक कर सकते हैं। प्रोसेस इस तरह है...
Bigshare Services की साइट से
Vans Electroengineerings ने पब्लिक इश्यू की ओपनिंग से पहले एंकर इनवेस्टर्स से ₹9.49 करोड़ जुटाए। वैंस इलेक्ट्रोइंजीनियरिंग लिमिटेड भारतीय रेलवे के इलेक्ट्रिफिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर, मेट्रो सिस्टम्स और रिन्यूएबल एनर्जी एप्लीकेशन के लिए ट्रैक्शन पावर सप्लाई और ओवरहेड इक्विपमेंट सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले कंपोनेंट्स बनाती और सप्लाई करती है। इसके प्रोडक्ट्स मुख्य रूप से भारतीय रेलवे और रेलवे कॉन्ट्रैक्टर्स को सप्लाई किए जाते हैं। कंपनी ट्रैक्शन सबस्टेशन, सेक्शनिंग पोस्ट, फीडिंग पोस्ट और दूसरे रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन सिस्टम जैसे एप्लीकेशन के लिए सिंगल पोल और डबल पोल वैक्यूम सर्किट ब्रेकर (VCBs) और वैक्यूम इंटरप्टर (VIs) बनाती है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।