IPO Allotment: आईपीओ में शेयर अलॉटमेंट मिलने का चांस कैसे बढ़ाएं? ये 7 तरीके आएंगे काम

IPO Allotment: आईपीओ में शेयर मिलना आसान नहीं है। खासकर जब इश्यू कई गुना सब्सक्राइब हो जाए। सही आवेदन, अलग PAN से वैध आवेदन, कट-ऑफ प्राइस और समय पर UPI मैंडेट जैसी छोटी बातें अलॉटमेंट का मौका बेहतर कर सकती हैं।

अपडेटेड Aug 25, 2026 पर 7:00 AM
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कई बार IPO में अलॉटमेंट न मिलने की वजह ओवरसब्सक्रिप्शन नहीं, बल्कि आवेदन में हुई गलती भी हो सकती है।

IPO Allotment: बहुत से ऐसे इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) होते हैं, जो लिस्टिंग पर तगड़ा मुनाफा देते हैं। लेकिन, इसका लाभ सिर्फ उन्हीं निवेशकों को होता है, जिन्हें आईपीओ का अलॉटमेंट मिलता है।

IPO में पैसा लगाना आसान है, लेकिन शेयर मिलना उतना आसान नहीं है। खासकर जब कोई IPO कई गुना सब्सक्राइब हो जाए। ऐसे में हजारों नहीं, लाखों निवेशकों के बीच शेयरों का बंटवारा होता है।

रिटेल निवेशकों के लिए ओवरसब्सक्राइब्ड IPO में अलॉटमेंट अक्सर लॉटरी के आधार पर होता है। इसलिए शेयर मिलने की कोई गारंटी नहीं होती। हालांकि, कुछ बातों का ध्यान रखकर आप अपनी एप्लीकेशन को सही रख सकते हैं और बेवजह रिजेक्शन से बच सकते हैं।


1. एक PAN से एक ही आवेदन करें

सबसे जरूरी बात यही है। एक ही PAN से कई आवेदन करने की कोशिश न करें। ऐसी एप्लीकेशन को मल्टीपल एप्लीकेशन माना जा सकता है और रिजेक्ट किया जा सकता है।

मान लीजिए आपको लगता है कि 5 अलग-अलग एप्लीकेशन डालने से शेयर मिलने का चांस पांच गुना बढ़ जाएगा। ऐसा नहीं है। उल्टा आपकी एप्लीकेशन ही रिजेक्ट हो सकती है। इसलिए एक PAN से एक ही वैध आवेदन करना बेहतर है।

2. परिवार के सदस्य आवेदन कर सकते हैं

अगर परिवार के दूसरे सदस्य भी IPO में निवेश करना चाहते हैं, तो वे अपने नाम से अलग आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए उनका अपना PAN, डीमैट अकाउंट और बैंक अकाउंट होना चाहिए।

उदाहरण के लिए, पति और पत्नी दोनों IPO के लिए अलग-अलग आवेदन कर सकते हैं। इसी तरह माता-पिता भी डीमैट अकाउंट से आईपीओ सब्सक्राइब कर सकते हैं।

3. ज्यादा लॉट लेने से रिटेल में चांस नहीं बढ़ता

यह एक बड़ा भ्रम है। कई निवेशकों को लगता है कि अगर 1 लॉट की जगह 10 लॉट के लिए आवेदन करेंगे, तो शेयर मिलने की संभावना भी 10 गुना बढ़ जाएगी। ऐसा जरूरी नहीं है।

मान लीजिए किसी IPO में रिटेल कैटेगरी बहुत ज्यादा सब्सक्राइब हो गई। ऐसी स्थिति में रिटेल निवेशकों को न्यूनतम लॉट देने के लिए लॉटरी हो सकती है। ऐसे में आपने 1 लॉट के लिए आवेदन किया हो या 10 लॉट के लिए, अलॉटमेंट मिलने का फैसला तय नियमों के मुताबिक ही होगा। ऐसे में अमूमन 1 लॉट ही मिलता है।

4. कट-ऑफ प्राइस का विकल्प चुनें

रिटेल निवेशकों के लिए IPO में कट-ऑफ प्राइस का विकल्प काफी काम का हो सकता है। इसका सीधा मतलब है कि आप IPO का अंतिम तय इश्यू प्राइस स्वीकार करते हैं। मान लीजिए किसी IPO का प्राइस बैंड ₹100 से ₹110 है। आपने ₹105 की बोली लगाई और कंपनी ने अंतिम इश्यू प्राइस ₹110 तय किया। ऐसे में आपकी बोली वैध नहीं रह सकती।

कट-ऑफ विकल्प चुनने पर यह समस्या नहीं आती। खासकर, जब अच्छे आईपीओ कई गुना सब्सक्राइब हो रहे हैं, ये विकल्प चुनना और भी जरूरी हो जाता है।

5. UPI मैंडेट समय पर मंजूर करें

IPO के अप्लाई कर देना ही काफी नहीं है। अगर आपने UPI के जरिए आवेदन किया है, तो UPI मैंडेट भी समय पर अप्रूव करना जरूरी है। आवेदन करने के बाद आपके UPI ऐप पर मैंडेट रिक्वेस्ट आ सकती है। इसे तय समय के भीतर मंजूर करें। अगर मैंडेट अप्रूव नहीं हुआ, तो आपकी एप्लीकेशन पूरी नहीं मानी जा सकती।

इसलिए IPO के आखिरी दिन आवेदन करके उसे भूल जाना सही तरीका नहीं है। आवेदन के बाद UPI ऐप और बैंक अकाउंट पर नजर रखें।

6. आवेदन की जानकारी ध्यान से भरें

कई बार IPO में अलॉटमेंट न मिलने की वजह ओवरसब्सक्रिप्शन नहीं, बल्कि आवेदन में हुई गलती भी हो सकती है। नाम, PAN, बैंक अकाउंट, डीमैट अकाउंट या दूसरी जानकारी में गलती होने पर परेशानी आ सकती है।

इसलिए आवेदन जमा करने से पहले सारी जानकारी एक बार जरूर जांच लें। यह भी देख लें कि जिस बैंक अकाउंट से आवेदन किया जा रहा है, वह उसी निवेशक का है। आवेदन के बाद अपनी बोली की जानकारी भी चेक की जा सकती है। इससे पता चल जाता है कि आपकी बोली सिस्टम में सही तरीके से दर्ज हुई है या नहीं।

7. रिटेल सब्सक्रिप्शन देखकर रणनीति बनाएं

हर IPO में अलॉटमेंट का चांस एक जैसा नहीं होता। अगर किसी IPO की रिटेल कैटेगरी 2 गुना सब्सक्राइब हुई है, तो स्थिति अलग होगी। लेकिन अगर यही कैटेगरी 50 या 100 गुना सब्सक्राइब हो जाए, तो शेयर मिलने की संभावना काफी कम हो सकती है।

इसलिए IPO में आवेदन करने से पहले सिर्फ GMP न देखें। रिटेल कैटेगरी का सब्सक्रिप्शन भी देखें। साथ ही कंपनी का कारोबार, वित्तीय प्रदर्शन और वैल्यूएशन भी समझें।

एक आसान उदाहरण से समझिए

मान लीजिए किसी IPO में रिटेल निवेशकों के लिए 1 लाख लॉट उपलब्ध हैं। लेकिन IPO को 10 लाख वैध रिटेल आवेदन मिल गए। अब हर निवेशक को शेयर देना मुमकिन नहीं होगा।

ऐसी स्थिति में तय नियमों के मुताबिक न्यूनतम लॉट के लिए लॉटरी हो सकती है। यानी आवेदन सही होना जरूरी है, लेकिन सही आवेदन करने के बाद भी शेयर मिलना पक्का नहीं है। यही वजह है कि IPO में अलॉटमेंट को लेकर किसी शॉर्टकट के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए।

तो IPO में अलॉटमेंट का चांस कैसे बढ़ाएं?

सीधी बात है। एक PAN से एक ही आवेदन करें। परिवार के दूसरे पात्र सदस्य अपने अलग PAN से आवेदन कर सकते हैं। कट-ऑफ प्राइस का विकल्प समझदारी से चुनें। UPI मैंडेट समय पर मंजूर करें और आवेदन की जानकारी अच्छी तरह जांच लें।

सबसे जरूरी बात यह है कि ज्यादा लॉट भरने या एक ही PAN से कई आवेदन करने को अलॉटमेंट का शॉर्टकट न समझें। ओवरसब्सक्राइब्ड IPO में शेयर मिलना काफी हद तक लॉटरी पर निर्भर करता है। इसलिए अलॉटमेंट की कोशिश के साथ यह भी देखना जरूरी है कि जिस IPO में पैसा लगा रहे हैं, उसकी कंपनी और वैल्यूएशन आपके लिए सही है या नहीं।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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