FD vs Lump Sum: ₹10 लाख की FD या ₹10 लाख का लंप सम, 10 साल बाद किसमें ज्यादा पैसा बनेगा?

FD vs Lump Sum: ₹10 लाख की FD और इक्विटी लंपसम में 10 साल बाद कितना पैसा बनेगा। FD में 7.5% और इक्विटी में 12% रिटर्न के उदाहरण से समझिए कि टैक्स, महंगाई और जोखिम जोड़ने पर कौन सा विकल्प ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।

अपडेटेड Aug 24, 2026 पर 3:40 PM
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FD का ब्याज आपकी टैक्सेबल इनकम में जुड़ता है।

FD vs Lump Sum: अगर आपके पास ₹10 लाख एकमुश्त हैं, तो सवाल है... FD में लगाएं या इक्विटी म्यूचुअल फंड में लंपसम निवेश करें? FD में रिटर्न तय होता है। जोखिम कम रहता है। इक्विटी में उतार-चढ़ाव ज्यादा है, लेकिन लंबे समय में ज्यादा रिटर्न की संभावना भी रहती है।

सिर्फ रिटर्न देखना काफी नहीं है। टैक्स, महंगाई और जोखिम भी देखना होगा। आइए आसान हिसाब से समझते हैं।

FD में ₹10 लाख डालने पर


मान लेते हैं कि FD पर औसतन 7.5% सालाना ब्याज मिलता है। अगर ब्याज को निकालने के बजाय जमा रहने दिया जाए, तो उस पर भी आगे ब्याज मिलता रहेगा।

10 साल में ₹10 लाख बढ़कर करीब ₹20.6 लाख हो सकते हैं। यानी करीब ₹10.6 लाख की कमाई। यह सिर्फ उदाहरण है। असली FD दर बैंक और अवधि के हिसाब से अलग हो सकती है।

₹10 लाख का इक्विटी लंप सम

अब यही ₹10 लाख इक्विटी म्यूचुअल फंड में एक साथ लगाते हैं। यहां 12% सालाना औसत रिटर्न मान लेते हैं। यह गारंटीड रिटर्न नहीं है। अगर 10 साल तक औसतन 12% रिटर्न मिला, तो ₹10 लाख करीब ₹31 लाख हो सकते हैं। यानी करीब ₹21 लाख की बढ़त।

दोनों का सीधा हिसाब

विकल्प निवेश अनुमानित रिटर्न 10 साल बाद
FD ₹10 लाख 7.50% ₹20.6 लाख
इक्विटी लंप सम ₹10 लाख 12% ₹31 लाख

इस उदाहरण में इक्विटी लंपसम करीब ₹10.4 लाख आगे है। लेकिन यहां जोखिम भी ज्यादा है।

FD में क्या फायदा है?

FD में बाजार का उतार-चढ़ाव नहीं होता। ब्याज दर पहले से पता होती है। इसलिए जिन लोगों को पैसा सुरक्षित और स्थिर रखना है, उनके लिए FD आसान विकल्प है। खासकर अगर पैसा कुछ साल में चाहिए, तो सिर्फ ज्यादा रिटर्न की उम्मीद में पूरा पैसा इक्विटी में डालना जोखिम भरा हो सकता है।

इक्विटी में जोखिम कितना है?

मान लीजिए ₹10 लाख लगाने के बाद बाजार 20% गिर गया। आपके निवेश की वैल्यू करीब ₹8 लाख दिख सकती है। 30% गिरावट में यह करीब ₹7 लाख हो सकती है। लेकिन 10 साल का समय है, तो बाजार के उतार-चढ़ाव से उबरने का मौका भी मिलता है। शर्त है कि गिरावट देखकर घबराकर निवेश न बेचें।

टैक्स का क्या होगा?

FD का ब्याज आपकी टैक्सेबल इनकम में जुड़ता है। इसलिए 7.5% ब्याज का पूरा फायदा हाथ में नहीं आता। टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स देना पड़ सकता है। इक्विटी म्यूचुअल फंड में भी टैक्स लगता है। 10 साल बाद बेचने पर लागू नियमों के मुताबिक लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ सकता है। इसलिए ₹31 लाख को टैक्स के बाद मिलने वाली रकम न मानें।

महंगाई को भी जोड़िए

मान लीजिए महंगाई औसतन 6% रही। तब आज के ₹10 लाख की खरीदने की ताकत 10 साल बाद करीब ₹5.6 लाख जितनी रह सकती है। यानी सिर्फ पैसा बढ़ना काफी नहीं है। पैसा महंगाई से तेज बढ़ना भी जरूरी है। निवेश करते वक्त महंगाई का ध्यान रखना सबसे जरूरी है।

फिर कौन बेहतर?

अगर आपकी प्राथमिकता सुरक्षा और तय रिटर्न है, तो FD बेहतर बैठती है। अगर लक्ष्य 10 साल या उससे ज्यादा दूर है और आप बाजार का जोखिम उठा सकते हैं, तो इक्विटी लंपसम में ज्यादा रिटर्न की संभावना है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

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