IPO Watch : गाजियाबाद स्थित सीवेज और वॉटर सोल्यूशन कंपनी ईएमएस लिमिटेड (EMS Limited) को उम्मीद है कि चालू वित्तीय वर्ष 2023-24 में उसकी रेवेन्यू ग्रोथ लगभग 25 फीसदी पर स्थिर हो जाएगी। कंपनी के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर आशीष तोमर ने मनीकंट्रोल से हुई बातचीत में आग कहा कि यह ग्रोथ पिछले वित्तीय वर्ष 2022-23 में आई 50 फोसदी की ग्रोथ की तुलना में कम है। बता दें कि सरकार द्वारा कंपनी पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाए जाने के कारण इसके रेवेन्यू में पिछले साल भारी बढ़त देखने को मिली थी। वित्त वर्ष 2023 में सरकार द्वारा कुछ प्रतिबंध हटाने के कारण कंपनी के रेवेन्यू में भारी ग्रोथ तो हुई ही थी साथ कंपनी को अपनी लंबित परियोजनाओं को पूरा करने में आसानी भी हुई थी।
आशीष तोमर ने इस बातचीत में आगे कहा कि कंपनी सरकार की ब्लैक लिस्ट से अपना नाम निकलवाने में कामयाब रही है। उसे अब सरकार 300 करोड़ से 400 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिलने की नई उम्मीद दिख रही है। अब कंपनी के रेवेन्यू में स्थिरता आती दिखेगा और इसका टर्नओवर में 25 फीसदी के आसपास स्थिर होता दिखेगा।
8 सितंबर को सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था EMS का आईपीओ
बताते चलें की EMS Limited का आईपीओ 8 सितंबर को सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। आईपीओ खुलने से पहले कंपनी छह एंकर निवेशकों से 96.37 करोड़ रुपये जुटा चुकी है। आईपीओ का इश्यू प्राइस 211 रुपये है। ये इश्यू 12 सितंबर तक खुला रहेगा। आईपीओ की इश्यू साइज 321.24 करोड़ रुपये और लॉट साइज 70 शेयरों का है। यह आईपीओ 8 सितंबर को बोली के पहले दिन ही पूरी तरह से सब्सक्राइब हो गया था।
कंपनी सरकारी ब्लैकलिस्ट से हुई बाहर
बता दें की पहले कंपनी को अपर्याप्त सुरक्षा और बोली दस्तावेजों में तथ्यों की गलत जानकारी इन दो कारणों से सरकारी ब्लैकलिस्टि में डाल दिया गया था। अब कंपनी प्रबंधन ने कहा है कि कंपनी ने इन दोनों मुद्दों का समाधान कर लिया है। कंपनी के सीईओ ने इस बारे में और स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि गाजियाबाद स्थिति एक कार्यस्थल पर हुई एक घटना के कारण कंपनी को यूपी जल निगम द्वारा ब्लैकलिस्ट में डल दिया गया था। इसके खिलाफ कंपनी ने उच्च न्यायालय में अपील की। उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में इस ब्लैकलिस्टिंग को कानून का उल्लंघन बताया। जिसके बाद कंपनी को ब्लैकलिस्ट से हटा दिया गया। इसी तरह बोली दस्तावेजों में तथ्यों की गलत जानकारी वाले मामले में भी कंपनी को अदालत से क्लीन चिट मिल गई है।
कंपनी ने 2,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के लिए बोली लगाई
फिलहाल, कंपनी ने 2000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के लिए बोली लगाई है और उसे 300 करोड़ से 400 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। कंपनी की मौजूदा ऑर्डर बुक 1750 करोड़ रुपये की है और बुक का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा भवन और विद्युतीकरण कार्यों से आता है।
कंपनी के पास हैं 1750 करोड़ रुपये के ऑर्डर
आशीष तोमर ने मनीकंट्रोल से हुई बातचीत में बताया कि फिलहाल कंपनी ने 2000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स के लिए बोली लगाई है और उसे 300 करोड़ से 400 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। कंपनी की मौजूदा ऑर्डर बुक 1750 करोड़ रुपये की है। कंपनी को मिले कुल ऑर्डर में लगभग 85 फीसदी हिस्सा बिल्डिंग और इलेक्ट्रिफिकेशन से जुड़े कामों का है।