Daily Voice : फार्मा और हेल्थकेयर शेयरों का वर्तमान वैल्यूएशन उनके ऐतिहासिक ऊंचाई से काफी नीचे है और फार्मा और हेल्थकेयर सेगमेंट में अभी भी काफी दम बाकी है। इस सेक्टर के किसी भी सेगमेंट में चाहे वह अस्पताल, एपीआई या फार्मा एक्सपोर्ट कोई भी हो, दोहरे अंकों में रिटर्न मिल सकता है। ये बातें मनीकंट्रोल के साथ हुई बातचीत में अल्फा कैपिटल ( Alpha Capital) के अखिल भारद्वाज ( Akhil Bhardwaj) ने कही हैं। प्राइवेट वेल्थ मैनेजमेंट का 14 सालों से ज्यादा का अनुभव रखने वाले भारद्वाज ने इस बातचीत में आगे कहा कि लार्ज-कैप में वैल्यूएश थोड़ा महंगा है, लेकिन ये अभी बबल ज़ोन में नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि लार्जकैप में पीई का विस्तार होना अभी बाकी है। इस समय लोगों के पास बहुत सारा पैसा यूं हू पड़ा है। ये लोग निवेश के लिए अच्छे मौके का इंतजार कर रहा है। एक बार जब ग्लोबल सेंटीमेंट सुधर जाएगा और महंगाई कम हो जाएगी तो हमों एफआईआई की तरफ भारतीय बाजारों में जोरदार निवेश होता दिखेगा।
इंफ्रा और इंजीनियरिंग सेक्टर में अर्निंग अपग्रेड की बहुत उम्मीद नहीं
अखिल भारद्वाज को इंफ्रा और इंजीनियरिंग सेक्टर में अर्निंग अपग्रेड की बहुत उम्मीद नहीं दिख रही है। उनका कहना कि यदि आप इन सेक्टर्स के पिछले दो वर्षों को देखें महंगाई में गिरावट, कच्चे माल की लागत में कमी, कम कैपिटल कॉस्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर सरकार के फोकस के चलते इंफ्रा सेक्टर में जोरदार तेजी आई है।
सरकार की तरफ से होने वाले पूंजीगत व्यय में बढ़त से इन सेक्टर्स को फायदा हुआ है। लेकिन निजी पूंजीगत व्यय में अभी तेजी आनी बाकी है। अगर निजी पूंजीगत व्यय बढ़ना शुरू हो जाता है तो हमें इन सेक्टर्स में कुछ और उछाल देखने को मिल सकता है। ये तो इन सेक्टर्स के लिए कुछ पॉजिटिव फैक्टर्स है। लेकिन निगेटिव फैक्टर्स भी हैं।
आज हम ऐसे माहौल में हैं जहां महंगाई परेशान कर रही है। अधिकांश केंद्रीय बैंकों ने मौद्रिक नीति कड़ी कर दी है और पूंजी की लागत बढ़ गई है। जियोपोलिटिकल तनाव के कारण दुनिया में अनिश्चितता है। विकसित देशों में मंदी का डर बना हुआ। इसके निवेश गतिविधियों में बाधा पड़ सकती है। इसके अलावा अगले साल हमारे आम चुनाव भी हैं जिसके चलते पूंजीगत व्यय में कमी आ सकती है,और सामाजिक कार्यों में होने वाला खर्च बढ़ सकता है।
लार्जकैप में वैल्यूएशन बबल जोन में नहीं
क्या आपको लगता है कि लार्जकैप में वैल्यूएशन बबल जोन में नहीं है? इस सवाल के जवाब में अखिल भारद्वाज ने कहा कि लार्जकैप के वैल्यूएशन थोड़ा महंगे नजर आ रहे है, लेकिन इनमें बबल बनने जैसी कोई बात नहीं। अगर आप निफ्टी 50 के ट्रेलिंग पीई को देखें तो यह अपनी लंबी अवधि के औसत के आसपास है, यहां तक कि फॉरवर्ड पीई भी ज्यादा महंगा नहीं है। इसका अकेला कारण यह है कि पिछले दो सालों से लार्जकैप कंपनियां काफी अच्छा मुनाफा कमा रही हैं।
आगे एफआईआई निवेश में आएगी तेजी
आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि बैंकों और दूसरी फाइनेंशियल कंपनियों ने (जो कि निफ्टी 50 का लगभग 35-40 फीसदी हिस्सा हैं) ने पिछले 2 सालों में नेट इंटरेस्ट मार्जिन में सुधार, एनपीए में कमी और क्रेडिट साइकिल में आई तेजी के कारण बहुत अच्छा मुनाफा दर्ज किया है। बैंकों और वित्तीय कंपनियों का एनपीए दशक के निचले स्तर पर है। लार्जकैप में पीई का विस्तार होना अभी बाकी है। इस समय लोगों के पास बहुत सारा पैसा यूं हू पड़ा है। ये लोग निवेश के लिए अच्छे मौके का इंतजार कर रहा है। एक बार जब ग्लोबल सेंटीमेंट सुधर जाएगा और महंगाई कम हो जाएगी तो हमों एफआईआई की तरफ भारतीय बाजारों में जोरदार निवेश होता दिखेगा।
मिडकैप और स्मॉलकैप में अभी निवेश के मौके
इतनी तेजी के बाद क्या अभी भी मिडकैप और स्मॉल कैप में निवेश के मौके हैं? इसके जवाब में अखिल ने कहा कि मिडकैप और स्मॉलकैप अच्छे दौर में चल रहे हैं। इन्होंने पिछले पांच महीनों से बहुत अच्छा रिटर्न दिया है। उन्होंने हाल के दिनों में मिडकैप और स्मॉल कैप में भारी निवेश हुआ है। आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि जहां मिडकैप और स्मॉलकैप में निवेश बढ़ा है। वहीं लार्जकैप, फ्लेक्सी फंड और ईएलएसएस जैसी कुछ कटेगरी में बिकवाली देखने को मिली है। लेकिन क्या मिडकैप और स्मॉल कैप की ये रैली जारी रहेगी? यह कहना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन अगर निवेश की समय सीमा 5-10 साल लंबी है, तो आप धीरे-धीरे कुछ धनराशि इन शेयरों में लगाना शुरू कर सकते हैं। लंबी अवधि में छोटे मझोले शेयरों में निश्चित रूप से अच्छा पैसा बनेगा।