वित्त वर्ष 2024 में 75 कंपनियों के IPO आए। प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों के मुताबिक, इन 75 कंपनियों ने अपने-अपने इश्यू के जरिये 61,000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा जुटाए। सालाना आधार पर इसमें 19% की बढ़ोतरी हुई। हालांकि, पिछले वित्त वर्ष में LIC का मेगा IPO आया था और अगर इसे छोड़ दिया जाए, तो बढ़ोतरी का आंकड़ा 58 पर्सेंट तक पहुंच जाता है।
IPO के जरिये जुटाए गए फंडों में 20 पर्सेंट रकम प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल द्वारा शेयरों की बिक्री से हासिल हुई। इसके अलावा, 29% फंड ऑफर फॉर सेल (OFS) के तहत शेयरों की बिक्री से मिला। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2024 में 47 पर्सेंट फंड यानी तकरीबन 29,000 करोड़ रुपये नए इक्विटी शेयर जारी कर जुटाए गए। पर्सेंट के लिहाज से यह आंकड़ा पिछले 7 साल में सबसे ज्यादा है।
कंपनियों ने फंडों का इस्तेमाल किस तरह किया?
IPO में रिटेल इनेवस्टर्स की दिलचस्पी का अंदाजा इस बात से भी पता चलता है कि मौजूदा वित्त वर्ष में एक IPO के लिए औसत 13.17 लाख ऐप्लिकेशन मिले। यह पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है, जहां आंकड़ा 5.5 लाख से भी ज्यादा था। इस वित्त वर्ष में काफी समय बाद टाटा ग्रुप की किसी कंपनी का IPO आया। टाटा टेक्नोलॉजीज (Tata Technologies) के IPO को सबसे ज्यादा यानी 50 लाख से भी ज्यादा रिटेल ऐप्लिकेशन मिले।
बहरहाल, इस वित्त वर्ष में भले ही काफी ज्यादा संख्या में IPO देखने को मिले, लेकिन इश्यू के औसत साइज में गिरावट आई। संबंधित अवधि में IPO का औसत साइज 815 करोड़ रुपये था, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 1,400 करोड़ और वित्त वर्ष 2023 में 2,000 करोड़ से भी ज्यादा था। मौजूदा वित्त वर्ष में कई साइज के IPO आए, मसलन 100 करोड़ रुपये से कम और 1,000 रुपये से भी ज्यादा के IPO देखने को मिले।