LIC के बारे में अच्छी बातें तो आपने जान ली...अब कुछ निगेटिव फैक्ट्स भी जान लीजिए

कुछ एनालिस्ट्स ने इस इश्यू में इनवेस्टमेंट से जुड़े रिस्क की तरफ भी इनवेस्टर्स का ध्यान दिलाया है। एलआईसी का मार्केट शेयर लगातार घट रहा है। उधर, प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियों का मार्केट शेयर बढ़ रहा है

अपडेटेड Apr 30, 2022 पर 10:35 AM
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एलआईसी के बारे में एक दूसरी फिक्र की बात यह है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इसकी मजबूत मौजूदगी नहीं है। इसकी 90 फीसदी पॉलिसीज एजेंट्स के जरिए बेची जाती हैं।

LIC का आईपीओ अगले हफ्ते खुल जाएगा। ज्यादातर एनालिस्ट्स ने इस इश्यू में पैसे लगाने की सलाह दी है। उनका मानना है कि दूसरी इश्योरेंस कंपनियों के मुकाबसे एलआईसी की वैल्यूशन कम लगाई गई है। आनंद राठी, रेलिगेयर ब्रोकिंग, मारवाड़ी फाइनेंशियल सर्विसेज और सैमको सिक्योरिटीज ने इस इश्यू को सब्सक्राइब करने का सेजशन दिया है।

कुछ एनालिस्ट्स ने इस इश्यू में इनवेस्टमेंट से जुड़े रिस्क की तरफ भी इनवेस्टर्स का ध्यान दिलाया है। एलआईसी का मार्केट शेयर लगातार घट रहा है। उधर, प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियों का मार्केट शेयर बढ़ रहा है। अभी टोटल लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम के मामले में एलआईसी का मार्केट शेयर 64 फीसदी है। एलआईसी फाइनेशियल ईयर 2015-16 से 2020-21 के दौरान यह 6 फीसदी कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ी है। इसके मुकाबले प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियों की ग्रोथ 18 फीसदी सीएजीआर रही है।

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एलआईसी ने यह बात मानी है कि कई बार इसे सरकार के निर्देश के तहत ऐसे कदम उठाने पड़ते हैं जो शेयरहोल्डर्स के इंटरेस्ट में नहीं होते हैं। एलआईसी ने 2018 में भारत डायनेमिक्स और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स के आईपीओ को फेल करने से बचाया था। एलआईसी ने आईडीबीआई बैंक को भी खरीदकर इसकी नाव पार लगाने की कोशिश की थी।

आईडीबाई बैंक की हालत डूबा कर्ज बहुत ज्यादा बढ़ जाने से बहुत खराब हो गई थी। इसमें 51 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए एलआईसी ने 21,600 करोड़ रुपये खर्च किए थे। फिर, 2019 में उसने इस बैंक में और 4,743 करोड़ रुपये इनवेस्ट किया था।

एलआईसी के बारे में एक दूसरी फिक्र की बात यह है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इसकी मजबूत मौजूदगी नहीं है। इसकी 90 फीसदी पॉलिसीज एजेंट्स के जरिए बेची जाती हैं। ड्राफ्ट पेपर से यह जानकारी मिलती है कि सिर्फ 36 फीसदी इंडिविजुअल रिन्यूअल प्रीमियम डिजिटल मोड से पे किए गए। प्राइवेट बीमा कंपनियों के मामले में यह 90 फीसदी से ज्यादा है। एनालिस्ट्स का कहना है कि अगर यह ट्रेंड जारी रहता है तो एलआईसी की कास्ट में इजाफा होगा।

डिजिटल पेमेंट सिस्टम बनाने में सिर्फ एक बार खर्च करना पड़ता है। इसके मुकाबले ब्रांच के जरिए प्रीमियम कलेक्शन के सिस्टम पर ज्यादा खर्च आता है। एनालिस्ट्स का मानना है कि एलआईसी का फिजिकल पेमेंट मोड पर ज्यादा निर्भरता अच्छा नहीं है। इससे एजेंट्स पर डिपेंडेंस बना रहता है, जो आम तौर पर ज्यादा कमीशन लेते हैं।

एलआईसी की वैल्यू ऑफ न्यू बिजनेस मार्जिन (VNB) सितंबर 2021 में 9.3 फीसदी दी। पूरे फाइनेंशियल ईयर 2020-21 के लिए यह 9.9 फीसदी थी। इसके मुकाबले प्राइवेट लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों का वीएनबी मार्जिन 11 से 27 फीसदी के बीच है। सभी कंपनियों के वीएनबी मार्जिन में 2016 से 2021 के दौरान काफी इम्प्रूवमेंट देखने को मिला है। एचडीएफसी लाइफ का वीएनबी मार्जिन सबसे ज्यादा 26.1 फीसदी है। इसके बाद मैक्स लाइफ का 25.2 फीसदी है।

एलआईसी का मार्क-टू-मार्केट लॉस 6,028 करोड़ रुपये है। एलआईसी ने ड्रॉफ्ट पेपर्स में बताया है कि 11,265 करोड़ रुपये मूल्य की मिस्प्राइस्ड इंश्योरेंस पॉलिसिजी में से 5,351 करोड़ रुपये के पेपर्स एनपीए हो चुके हैं। इसके लिए एलआईसी ने पूरी प्रोविजनिंग कर दी है। इसके चलते एलआईसी को 6,028 करोड़ रुपये का लॉस बैलेंसशीट में दिखाना होगा।

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